राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ Questions with Answers

राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ (Handicrafts of Rajasthan) – Part 12

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की हस्तकलाएँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में ब्लू पॉटरी, मलीर प्रिंट बाड़मेर (बालोतरा), थेवा कला, उस्ता कला, जट पट्टी कला, मीनाकारी, बादला, जोधपुर, फड़ चित्रण, मथैरण कला बीकानेर आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान की हस्तकलाएँ
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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221. मलीर प्रिंट का संबंध है?

  • (A) उदयपुर से
  • (B) बाड़मेर से
  • (C) सांगानेर से
  • (D) बूंदी से

मलीर प्रिंट बाड़मेर (बालोतरा) की प्रसिद्ध छपाई है। इसमें कत्थई और काले रंग का प्रयोग होता है और यह केवल एक तरफ छपाई वाली होती है। इसकी विशेषता है ज्यामितीय डिजाइनों का उपयोग। खत्री जाति के लोग इसे बनाते हैं और इस क्षेत्र के प्रसिद्ध कलाकार मोहम्मद यासीन छींपा मलीर प्रिंट के लिए विख्यात हैं।

222. बाड़मेर ब्लॉक मुद्रित कपड़े का एक और नाम क्या है?

  • (A) टोकरी बुनाई
  • (B) अजरक
  • (C) छींट
  • (D) शेवरॉन

बाड़मेर के ब्लॉक मुद्रित कपड़े अजरख या मलीर प्रिंट के नाम से जाने जाते हैं। अजरख प्रिंट में लाल-नीले रंग का उपयोग होता है और यह दोनों तरफ छपाई होती है, जबकि मलीर प्रिंट कत्थई और काले रंग में केवल एक तरफ छपाई की जाती है। दोनों में ज्यामितीय डिजाइनों की प्रधानता होती है।

223. हिसामुद्दीन किस हस्तशिल्प के सिद्धहस्त कलाकार थे?

  • (A) थेवा कला
  • (B) उस्ता कला
  • (C) जट पट्टी कला
  • (D) मीनाकारी

हिसामुद्दीन उस्ता उस्ता कला के सिद्धहस्त कलाकार थे। यह कला ऊँट की खाल पर सोने की नक्काशी (मुनव्वती कला) के रूप में प्रसिद्ध है। बीकानेर इसका प्रमुख केंद्र है। हिसामुद्दीन उस्ता को 1986 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 'कैमल हाइड ट्रेनिंग सेंटर' बीकानेर में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

224. जोधपुर का प्रसिद्ध बादला निम्नलिखित में से क्या है?

  • (A) लकड़ी का मंदिर
  • (B) जस्ते से बनी पानी की बोतल
  • (C) जरी की साड़ी
  • (D) टेराकोटा की मूर्तियां

बादला जोधपुर की पारंपरिक कला है, जिसमें जस्ते से बनी पानी की बोतलें प्रसिद्ध हैं। यह धातु-शिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है। राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों की अन्य कलाएँ भी उल्लेखनीय हैं – मोलेला (राजसमंद) टेराकोटा मूर्तियों के लिए, बेवाण (बस्सी, चित्तौड़गढ़) लकड़ी (फाष्ट) मंदिरों के लिए तथा जयपुर जरी की साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। इस प्रकार प्रत्येक क्षेत्र ने अपनी अलग पहचान बनाई।

225. फड़ चित्रण के लिए जाना जाता है।

  • (A) शाहपुरा
  • (B) चित्तौड़
  • (C) नाथद्वारा
  • (D) किशनगढ़

फड़ चित्रण राजस्थान की प्रसिद्ध लोककला है, जो मुख्यतः शाहपुरा (भीलवाड़ा) क्षेत्र में विकसित हुई। इसमें बड़े कपड़े पर धार्मिक और पौराणिक कथाएँ चित्रित की जाती हैं। यह कला चलित मंदिर के रूप में जानी जाती है और मेलों व जागरणों में सुनाई जाने वाली कहानियों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। इसके प्रमुख कलाकारों में श्रीलाल जोशी और पार्वती जोशी का नाम लिया जाता है।

226. कांवड़' बनाने के लिए कौन प्रसिद्ध है?

  • (A) उस्ताद लालचन्द
  • (B) मांगीलाल मिस्त्री
  • (C) साहिबराम
  • (D) चम्पालाल

राजस्थान में कांवड़ बनाने की परंपरा विशेष रूप से मांगीलाल मिस्त्री (जांगिड़ समाज, द्वारिका) से जुड़ी है। कांवड़ लकड़ी से बने छोटे-छोटे मंदिर जैसे दिखते हैं, जिनमें धार्मिक कथाओं और देवी-देवताओं की झांकियाँ चित्रित होती हैं। यह कला लोक आस्था से गहराई से जुड़ी है और धार्मिक यात्राओं तथा पूजा-अर्चना में प्रयुक्त होती है।

227. ऊंट की खाल पर स्वर्णित नक्काशी का कार्य किस नाम से किया जाता है?

  • (A) कारचोब
  • (B) फड़चित्रण
  • (C) उस्ता कला
  • (D) मथेरण कला

ऊँट की खाल पर स्वर्णिम नक्काशी का कार्य 'उस्ता कला' कहलाता है। इसे मुनव्वती कला भी कहते हैं। बीकानेर इसका मुख्य केंद्र है। महाराजा अनुपसिंह के समय लाहौर से लाए गए उस्ता परिवारों ने इसे विकसित किया। कलाकार हिसामुद्दीन उस्ता और मोहम्मद हनीफ इस कला के लिए प्रसिद्ध रहे।

228. मथैरण किस जिले की प्रसिद्ध लोक कला है?

  • (A) जोधपुर
  • (B) चुरू
  • (C) बीकानेर
  • (D) उदयपुर

मथैरण कला बीकानेर की प्रसिद्ध लोक कला है। इसमें देवी-देवताओं के भित्ति चित्र बनाए जाते हैं। यह पौराणिक कथाओं और धार्मिक विषयों पर आधारित होती है। मथैरण परिवार इस कला में विशेष रूप से निपुण रहा है और इसे जैन मिश्रित शैली की चित्रकारी के लिए जाना जाता है।

229. कलाकार जो बीकानेर के प्रसिद्ध मथैरण परिवार से संबंधित हैं-

  • (A) मुन्नालाल एवं मुकुन्द
  • (B) अहमद अली एवं शाह मोहम्मद
  • (C) नारायण दास एवं बिशन दास
  • (D) रामनाथ एवं मनोहर

बीकानेर का मथैरण परिवार अपने धार्मिक और भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। इस परिवार से जुड़े मुन्नालाल एवं मुकुन्द प्रमुख कलाकार रहे। इन्होंने देवी-देवताओं के भित्ति चित्र और व्यक्तिगत चित्र बनाने में महारत हासिल की। बीकानेर चित्र शैली के विकास में इस परिवार का बहुत योगदान है।

230. अपने बहुआयामी रूपों जैसे ऊंट की खाल का मीनाकारी, स्वर्ण मीनाकारी और महलों और हवेलियों में चित्रों (उस्ता कला) के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

  • (A) बीकानेर
  • (B) जोधपुर
  • (C) गंगानगर
  • (D) उदयपुर

उस्ता कला बीकानेर की विश्व प्रसिद्ध कला है। इसमें ऊँट की खाल पर स्वर्ण मीनाकारी और मुनव्वती का कार्य किया जाता है। राजस्थान लघु उद्योग निगम ने बीकानेर में “कैमल हाइड ट्रेनिंग सेंटर” की स्थापना की, जहाँ इस कला को बढ़ावा दिया गया। यह कला केवल ऊँट की खाल तक सीमित नहीं रही बल्कि काँच, लकड़ी और मिट्टी की वस्तुओं पर भी की जाती है। प्रमुख कलाकार हिसामुद्दीन उस्ता और मोहम्मद हनीफ रहे।

231. निम्नलिखित में से राजस्थान में कौनसा विकल्प पारंपरिक उद्योग का एक उदाहरण है?

  • (A) सीमेंट
  • (B) ईंट निर्माण
  • (C) पश्मीना शॉल
  • (D) हस्तनिर्मित कालीन

हस्तनिर्मित कालीन राजस्थान का पारंपरिक उद्योग है। बीकानेर और जैसलमेर कालीन निर्माण के लिए प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा जयपुर, बाड़मेर और टोंक ऊनी कंबल व गलीचों के लिए, नापासर खेसले के लिए, और टांकला व सालावास दरियों के लिए प्रसिद्ध हैं। ये उद्योग पीढ़ियों से चलते आ रहे हैं और स्थानीय रोजगार व संस्कृति से जुड़े हुए हैं।

232. राजस्थान में 'ब्लू पॉटरी' कला का संबंध किस जिले में है?

  • (A) बीकानेर
  • (B) उदयपुर
  • (C) जयपुर
  • (D) जोधपुर

ब्लू पॉटरी का प्रमुख केंद्र जयपुर है। इसे महाराजा रामसिंह के समय दिल्ली के भोला नामक व्यक्ति से सिखाया गया था। चूड़ामन और कालूराम जैसे कुम्हारों ने इसे अपनाया। ब्लू पॉटरी में नीले, हरे और सफेद रंगों का उपयोग चीनी मिट्टी जैसे बर्तनों पर किया जाता है। यह कला फारस और चीन से प्रेरित है और जयपुर में इसे नया रूप मिला।

233. राजस्थान की किस रियासत ने ब्लू पॉटरी को संरक्षण दिया?

  • (A) बूंदी
  • (B) उदयपुर
  • (C) जोधपुर
  • (D) जयपुर

ब्लू पॉटरी को जयपुर के शासकों ने संरक्षण दिया। विशेषकर महाराजा सवाई रामसिंह (1835–1880) के काल में यह कला खूब फली-फूली। यह कला मूल रूप से फारस और चीन से आई थी। चूड़ामन और कालूराम कुम्हारों ने इसे दिल्ली के भोला से सीखा और जयपुर में स्थापित किया। बाद में कृपालसिंह शेखावत जैसे कलाकारों ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

234. पद्मश्री कृपालसिंह शेखावत का सम्बन्ध है-

  • (A) माण्डणा से
  • (B) उस्ता कला से
  • (C) ब्लू पॉटरी से
  • (D) कालबेलिया नृत्य से

कृपालसिंह शेखावत ब्लू पॉटरी कला के महान कलाकार थे। यह कला क्वार्ट्ज मिट्टी पर नीले, सफेद और हरे रंगों से चित्रकारी की जाती है। शेखावत जी ने इसे नई पहचान दिलाई और 1974 में पद्मश्री तथा 2000 में शिल्पगुरु सम्मान प्राप्त किया। इनके योगदान से जयपुर की ब्लू पॉटरी कला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हुई।

235. राजस्थान के कृपालसिंह शेखावत ने उनके किस क्षेत्र में योगदान के लिए 1974 में पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त किया?

  • (A) हाथीदांत कार्य
  • (B) ब्लू पॉटरी
  • (C) लाख कार्य
  • (D) साहित्य

कृपालसिंह शेखावत को ब्लू पॉटरी कला में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। यह कला मूल रूप से फारस और चीन से आई थी और जयपुर में इसका विकास महाराजा रामसिंह के समय हुआ। शेखावत जी ने पारंपरिक डिजाइनों के साथ-साथ आधुनिकता का भी समावेश किया।

236. .............. जयपुर का परंपरागत शिल्प है।

  • (A) थेवा कार्य
  • (B) ऊनी खादी
  • (C) पेन्टिंग्स
  • (D) ब्लू पॉटरी

जयपुर की पारंपरिक हस्तकला “ब्लू पॉटरी” है। इसे पहले “कामचीनी” भी कहा जाता था। इसमें चीनी मिट्टी जैसी वस्तुओं पर कोबाल्ट ऑक्साइड से नीला रंग प्रमुख होता है। इसका उद्भव पर्शिया से हुआ और जयपुर में इसे विशेष पहचान मिली।

237. ब्लू पॉटरी को राजस्थान में किस शासक द्वारा लाया गया?

  • (A) महाराजा राम सिंह
  • (B) महाराजा मान सिंह
  • (C) महाराजा माधो सिंह
  • (D) महाराजा भवानी सिंह

ब्लू पॉटरी को जयपुर में महाराजा रामसिंह (1835–1880 ई.) ने लाया। दिल्ली के भोला नामक व्यक्ति से चूड़ामन और कालूराम कुम्हारों ने इसे सीखा और जयपुर में स्थापित किया। धीरे-धीरे यह जयपुर की प्रमुख कला बन गई।

238. निम्नलिखित में से कौन सा (हस्तशिल्प-स्थान) सुमेलित नहीं है?

  • (A) दाबू प्रिन्ट – आकोला गाँव (चित्तौड़गढ़)
  • (B) अजरख प्रिन्ट – बाड़मेर
  • (C) उस्ता कला – बीकानेर
  • (D) जट पट्टी – नागौर

जटपट्टी का केंद्र नागौर नहीं बल्कि जसोल (बाड़मेर) है। यहाँ बकरियों के बालों से जटपट्टी की बुनाई होती है। सिरोही, भाकला और गंदहा इसके अन्य उत्पाद हैं। जबकि आकोला दाबू प्रिंट, बाड़मेर अजरख प्रिंट और बीकानेर उस्ता कला के लिए प्रसिद्ध हैं।

239. जिरोही, भाकला, गंदहा किस उद्योग के नाम हैं?

  • (A) जटपट्टी
  • (B) पेचवर्क
  • (C) मीनाकारी
  • (D) ब्लू पॉटरी

जिरोही, भाकला और गंदहा जटपट्टी उद्योग से जुड़े नाम हैं। जटपट्टी की बुनाई बकरियों के बालों से की जाती है और इसका प्रमुख केंद्र जसोल (बाड़मेर) है। इसे मजबूत और आकर्षक कपड़ों की श्रेणी में रखा जाता है। राजस्थान में यह ग्रामीण उद्योग लंबे समय से प्रचलित है।

240. थेवा कला के लिए प्रसिद्ध परिवार कौन सा है?

  • (A) सुथार परिवार
  • (B) सोनी परिवार
  • (C) शेखावत परिवार
  • (D) गेहलोत परिवार

थेवा कला प्रतापगढ़ का प्रमुख शिल्प है और इसे सोनी परिवार ने विकसित किया। इसमें बेल्जियम के काँच पर सोने या चाँदी की नक्काशी करके चित्र बनाए जाते हैं। इस कला के प्रवर्तक नाथूजी सोनी थे। सोनी परिवार को इस कला के लिए कई बार राष्ट्रपति पुरस्कार और 2015 में महेशराज सोनी को पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7 | Part 8 | Part 9 | Part 10 | Part 11 | Part 12 | Part 13

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