राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ Questions with Answers

राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ (Handicrafts of Rajasthan) – Part 2

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की हस्तकलाएँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में वील, हाथीदाँत की चूड़ियाँ - जोधपुर, छपाई के घाघरे - आकोला (चित्तौड़गढ़), आम पापड़ - बाँसवाड़ा, पेपरमेशी, पाने, चटापटी, मोठड़ा, बटोड़ा, बांधनी आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान की हस्तकलाएँ
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

✍️ Prepared & Reviewed by:
Shiksha247 Rajasthan GK Faculty & Content Team (Since 2021)

📢 Daily Latest Updates ke liye Join Krein:

21. किस जिले की मसूरिया, मलमल व डोरा साड़ियाँ प्रसिद्ध है?

  • (A) कोटा
  • (B) जोधपुर
  • (C) बीकानेर
  • (D) टोंक

मसूरिया, मलमल और डोरा साड़ियाँ विशेष रूप से कोटा जिले की प्रसिद्ध हैं। इन्हें कोटा डोरिया साड़ी भी कहा जाता है। इन साड़ियों में महीन सूती या रेशमी धागों से जालीदार बुनाई की जाती है, जो इन्हें हल्का और आरामदायक बनाती है। यह साड़ियाँ राजस्थान की वस्त्र परंपरा की शान हैं।

22. निम्न में से कौनसा युग्म असंगत है?

  • (A) हाथीदाँत की चूड़ियाँ - जोधपुर
  • (B) छपाई के घाघरे - आकोला (चित्तौड़गढ़)
  • (C) आम पापड़ - बाँसवाड़ा
  • (D) जस्ते की मूर्तियाँ - अलवर

जस्ते की मूर्तियाँ अलवर की नहीं बल्कि जोधपुर की प्रसिद्ध कला है। जोधपुर में बादला और जस्ते के शिल्प विशेष पहचान रखते हैं। जबकि अन्य युग्म सही हैं – जोधपुर हाथीदाँत की चूड़ियों के लिए, आकोला छपाई के घाघरों के लिए और बाँसवाड़ा आम पापड़ के लिए प्रसिद्ध है।

23. बादला' क्या होता है?

  • (A) लाख की चूड़िया बनाने वाला
  • (B) फेरों के समय पहने जाने वाले दुल्हन के वस्त्र
  • (C) जिंक से निर्मित पानी की बोतल
  • (D) ऊँट के खाल से बनी कुप्पी

बादला जिंक से बना या जिंक का लेप किया हुआ जल पात्र होता है। इसका प्रयोग विशेष रूप से पानी को ठंडा रखने के लिए किया जाता है। यह कला और बर्तन जोधपुर की प्रसिद्ध विशेषता हैं। राजस्थान में धातु शिल्प की परंपरा के अंतर्गत बादला एक अनोखा उदाहरण है, जो आज भी पारंपरिक उपयोग में लाया जाता है।

24. बिनोटा (दुल्हा-दुल्हन की जूतियाँ) कहाँ के प्रसिद्ध हैं?

  • (A) जोधपुर
  • (B) उदयपुर
  • (C) चुरू
  • (D) जैसलमेर

राजस्थान की पारंपरिक बिनोटा (दुल्हा-दुल्हन की जूतियाँ) विशेष रूप से चुरू जिले की प्रसिद्ध हैं। ये जूतियाँ हाथ से तैयार की जाती हैं और शादी-ब्याह जैसे अवसरों पर पहनी जाती हैं। बिनोटा जूतियाँ अपने आकर्षक डिज़ाइन और कढ़ाई के कारण जानी जाती हैं।

25. सालावास गाँव की दरियाँ प्रसिद्ध हैं, सालावास गाँव किस जिले में है?

  • (A) बाड़मेर
  • (B) बालोतरा
  • (C) जयपुर
  • (D) जोधपुर

सालावास गाँव, जो जोधपुर जिले में स्थित है, अपनी पारंपरिक दरियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ हाथ से बनी दरियाँ अपने आकर्षक रंगों और टिकाऊपन के कारण विशेष पहचान रखती हैं। यह कला स्थानीय कारीगरों की पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।

26. कागज पर निर्मित देवी-देवताओं के चित्र कहलाते है-

  • (A) पेपरमेशी
  • (B) पाने
  • (C) वील
  • (D) चटापटी

कागज पर बने देवी-देवताओं के चित्र पाने कहलाते हैं। यह छोटे आकार के चित्र होते हैं, जिन्हें धार्मिक महत्व प्राप्त है। विशेष रूप से नाथद्वारा में श्रीनाथजी के पाने सर्वाधिक प्रसिद्ध और कलात्मक माने जाते हैं। पाने कला भक्ति और चित्रकला का सुंदर मेल है, जो राजस्थान की धार्मिक संस्कृति को दर्शाती है।

27. पश्चिमी राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं द्वारा घर को सजाने व दैनिक उपयोग की वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए बनायी जाने वाली मिट्टी की महलनुमा आकृति क्या कहलाती है?

  • (A) मोठड़ा
  • (B) वील
  • (C) बटोड़ा
  • (D) बांधनी

पश्चिमी राजस्थान में ग्रामीण महिलाएँ अपने घर को सजाने और उपयोगी वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी की महलनुमा आकृतिबनाती हैं, जिसे वील कहा जाता है। वील केवल उपयोगी ही नहीं बल्कि सजावटी भी होती है। इस पर रंग, आकृतियाँ और पारंपरिक डिजाइन बनाकर घर को सुंदर बनाया जाता है। यह लोककला गाँव की महिलाओं की सृजनशीलता का अनूठा उदाहरण है।

28. ब्लू पॉटरी के लिए प्रसिद्ध कृपालसिंह का सम्बन्ध किस जिले से है?

  • (A) जयपुर
  • (B) सीकर
  • (C) झुंझुनूं
  • (D) ब्यावर

राजस्थान की प्रसिद्ध ब्लू पॉटरी कला का विकास मुख्यतः जयपुर में हुआ है। इसके लिए कृपाल सिंह शेखावत का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस कला को संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। जयपुर की ब्लू पॉटरी अपने नीले और हरे रंगों की अनोखी पारदर्शिता और आकर्षक डिजाइन के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

29. श्रीलाल जोशी, पार्वती जोशी, शांतिलाल जोशी, दुर्गेश कुमार जोशी राजस्थान की किस चित्रकला शैली के प्रसिद्ध कलाकार हैं?

  • (A) तारकशी कला
  • (B) फड़ चित्रकारी शैली
  • (C) उस्ता कला
  • (D) ब्लू पॉटरी

राजस्थान की फड़ चित्रकारी शैली के प्रमुख कलाकारों में श्रीलाल जोशी, पार्वती जोशी, शांतिलाल जोशी और दुर्गेश कुमार जोशी का नाम शामिल है। फड़ चित्रण में कपड़े पर देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं को चित्रित किया जाता है। यह चित्रकला विशेष रूप से शाहपुरा (भीलवाड़ा) में विकसित हुई और धार्मिक अनुष्ठानों से गहराई से जुड़ी है।

30. राजस्थान की प्रसिद्ध मीनाकारी हस्तकला का उद्गम कहाँ से हुआ-

  • (A) पर्शिया (ईरान)
  • (B) दमिश्क
  • (C) पेरिस
  • (D) गुजरात

मीनाकारी कला का उद्गम पर्शिया (ईरान) से माना जाता है। इसे मुगलों द्वारा भारत लाया गया और लाहौर में स्थापित किया गया। बाद में इस कला को राजस्थान के आमेर और जयपुर में संरक्षण मिला। यहाँ के शासकों ने इस कला को प्रोत्साहित किया और कलाकारों को बसाया। धीरे-धीरे जयपुर मीनाकारी विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हो गई।

31. धेवा कला का सम्बन्ध राजस्थान के किस जिले से है?

  • (A) प्रतापगढ़
  • (B) नाथद्वारा
  • (C) बीकानेर
  • (D) जयपुर

राजस्थान की प्रसिद्ध थेवा कला (धेवा कला) का संबंध प्रतापगढ़ जिले से है। इसमें रंगीन काँच पर सोने की बारीक नक्काशी करके सुंदर आकृतियाँ बनाई जाती हैं। इस कला में बेल्जियम के रंगीन काँच का विशेष उपयोग होता है। प्रतापगढ़ का सोनी परिवार इस कला के लिए प्रसिद्ध है और इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला चुका है।

32. राजस्थान का कौनसा शहर ब्लैक पॉटरी के लिए प्रसिद्ध है?

  • (A) बीकानेर
  • (B) अलवर
  • (C) कोटा
  • (D) जयपुर

राजस्थान में ब्लैक पॉटरी के लिए कोटा प्रसिद्ध है। यहाँ पर काले रंग की विशेष मिट्टी से बर्तन और सजावटी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। ब्लैक पॉटरी का कार्य सवाई माधोपुर क्षेत्र में भी देखा जाता है। यह कला अपनी विशिष्टता और अनूठे डिजाइनों के कारण आज भी हस्तशिल्प मेलों में आकर्षण का केंद्र बनी रहती है।

33. श्री अब्दुल गफूर खाँ, इम्तियाज अली तथा अब्दुल रजाक कुरैशी किस क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं?

  • (A) मीनाकारी
  • (B) कुंदन कला
  • (C) सांगानेरी प्रिंट
  • (D) पीतल पर खुदाई

अब्दुल गफूर खाँ, इम्तियाज अली और अब्दुल रजाक कुरैशी राजस्थान में पीतल पर खुदाई की कला में प्रसिद्ध रहे हैं। इस कला को मुरादाबादी कार्य भी कहा जाता है। इसमें पीतल के बर्तनों पर नक्काशी और सजावटी चित्र बनाए जाते हैं। जयपुर में इस कला को सरंक्षण मिला और कई कलाकारों ने इसे विश्वस्तर पर प्रसिद्ध किया।

34. गरासियों की फाग ओढ़नी कहाँ की प्रसिद्ध है?

  • (A) आबू रोड
  • (B) फालना
  • (C) मथानिया
  • (D) सोजत

गरासियों की फाग ओढ़नी विशेष रूप से सोजत क्षेत्र की प्रसिद्ध है। इस ओढ़नी को विशेष रंगों और डिजाइनों से सजाया जाता है। गरासिया जनजाति की महिलाएँ इसे त्योहारों और विशेष अवसरों पर पहनती हैं। यह ओढ़नी उनकी सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपरा का प्रतीक है।

35. वुडन पेन्टेड फर्नीचर कहाँ का प्रसिद्ध है?

  • (A) किशनगढ़
  • (B) ब्यावर
  • (C) कोटा
  • (D) जोधपुर

वुडन पेंटेड फर्नीचर के लिए किशनगढ़ प्रसिद्ध है। यहाँ लकड़ी के फर्नीचर पर रंगीन चित्रकारी की जाती है, जिससे ये वस्तुएँ आकर्षक और कलात्मक बनती हैं। यह फर्नीचर घरेलू उपयोग के साथ-साथ सजावटी उद्देश्य से भी लोकप्रिय है। किशनगढ़ की यह परंपरा राजस्थान की कलात्मक धरोहर का हिस्सा है।

36. मोण' क्या है?

  • (A) आदिवासी महिलाओं की ओढ़नी
  • (B) गोटे का एक प्रकार
  • (C) मेड़ता क्षेत्र में बना मिट्टी का बड़ा मटका
  • (D) कपड़े पर मोम की परत चढ़ाया गया चित्र

राजस्थान के मेड़ता क्षेत्र में बनने वाले बड़े आकार के मिट्टी के मटके को मोण कहा जाता है। यह स्थानीय स्तर पर पानी संग्रहण और घरेलू उपयोग के लिए बनाए जाते हैं। मोण की विशेषता इसका बड़ा आकार और टिकाऊपन है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरागत जीवन शैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

37. कौनसा जिला भोडल की छपाई के लिए प्रसिद्ध है?

  • (A) केशवरायपाटन
  • (B) बालोतरा
  • (C) बगरू
  • (D) भीलवाड़ा

भीलवाड़ा जिले में भोडल की छपाई प्रसिद्ध है। यहाँ के छींपे अभ्रक (माइका) का उपयोग करके कपड़ों पर छपाई करते हैं। अभ्रक की चमक के कारण यह प्रिंट दूर से ही आकर्षक दिखाई देता है। स्थानीय भाषा में अभ्रक को भोडल कहा जाता है। इस कारण इसे भोडल की छपाई कहा जाता है, जो भीलवाड़ा की पारंपरिक शिल्पकला का हिस्सा है।

38. कम्बलों की बुनाई के लिए प्रसिद्ध स्थान है?

  • (A) गडरा रोड (बाड़मेर)
  • (B) बालोतरा
  • (C) रामसर (बीकानेर)
  • (D) नापासर (बीकानेर)

राजस्थान में गडरा रोड (बाड़मेर) कम्बलों की बुनाई के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के कम्बल अपनी मजबूती और गर्माहट के लिए जाने जाते हैं। स्थानीय कारीगर ऊन से मोटे और टिकाऊ कम्बल बनाते हैं, जो विशेष रूप से ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में उपयोग किए जाते हैं।

39. रामदेव जी के घोड़े कहाँ के प्रसिद्ध हैं?

  • (A) बीकानेर
  • (B) पोकरण
  • (C) कोटा
  • (D) गोगामेड़ी

पोकरण (जैसलमेर) के घोड़े विशेष रूप से रामदेव जी के घोड़े के रूप में प्रसिद्ध हैं। इन घोड़ों को लोक मेलों और धार्मिक अवसरों पर सजाकर प्रस्तुत किया जाता है। राजस्थान की लोक संस्कृति में इन घोड़ों का विशेष धार्मिक महत्व है।

40. आम पापड़ के लिए प्रसिद्ध जिला है?

  • (A) बाँसवाड़ा
  • (B) उदयपुर
  • (C) कोटा
  • (D) सिरोही

राजस्थान का बाँसवाड़ा जिला आम पापड़ के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पारंपरिक विधि से आम को सुखाकर पापड़ बनाया जाता है। बाँसवाड़ा के आम पापड़ स्वादिष्ट और लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। यह स्थानीय कुटीर उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7 | Part 8 | Part 9 | Part 10 | Part 11 | Part 12 | Part 13

❓ Question / Doubt / Correction?

Agar aapko kisi MCQ me doubt, correction ya suggestion lagta hai, to please is post ke comment section ki jagah humare YouTube channel par dedicated discussion video ke comment box me post link ke sath comment karein.

📝 Comment karne ka format:
• MCQ Post ka link
• Question number
• Short doubt / correction



👉 Official Discussion Video:
Shiksha247 YouTube Channel
📱 Shiksha247 App
Test Series • eBooks • PYQ • Solved Papers
Download App
Scroll to Top