राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ (Handicrafts of Rajasthan) – Part 4
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की हस्तकलाएँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में मीनाकारी, कुंदन, जरी, ब्लू पॉटरी, सांगानेरी प्रिंट, बांधनी, कामचीनी, कोफ्तगिरी, चम्पाकली, पेपरमेशी, दरी निर्माण, फड़ कला, लोहे के औजार, मिरर वर्क, लवाण आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की हस्तकलाएँ
- कुल प्रश्न: 20
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(Since 2021)
61. राजस्थान में हस्तकलाओं का तीर्थ किस जिले को कहा जाता है-
- (A) उदयपुर
- (B) जोधपुर
- (C) जयपुर
- (D) कोटा
राजस्थान की राजधानी जयपुर को हस्तकलाओं का तीर्थ कहा जाता है। यहाँ मीनाकारी, कुंदन, जरी, ब्लू पॉटरी, सांगानेरी प्रिंट, बांधनी और कई अन्य कलाएँ विकसित हुई हैं। जयपुर की हस्तकलाएँ देश-विदेश में निर्यात होती हैं और इन्हें शाही संरक्षण भी प्राप्त रहा है। इसलिए इसे हस्तकला का तीर्थ माना जाता है।
62. हस्तशिल्प उद्योग को सर्वाधिक संरक्षण देने वाला संस्थान है-
- (A) राजस्थली
- (B) राजसीको
- (C) रीको
- (D) नाबार्ड
राजस्थान में हस्तशिल्प उद्योग को सर्वाधिक संरक्षण राजसीको (राजस्थान लघु उद्योग निगम) देता है। इसका मुख्यालय जयपुर में है और इसकी स्थापना 3 जून 1961 को हुई थी। राजसीको का उद्देश्य हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करना और उन्हें बाजार उपलब्ध कराना है।
63. टेराकोटा मूर्तियाँ निम्नलिखित में से किस से बनाई जाती हैं-
- (A) जस्ते से
- (B) लकड़ी से
- (C) मिट्टी से
- (D) एल्युमिनियम से
टेराकोटा मूर्तियाँ मिट्टी से बनाई जाती हैं। राजस्थान के मोलेला (राजसमंद) में यह कला विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहाँ देव-प्रतिमाएँ और पौराणिक कथाओं से संबंधित आकृतियाँ मिट्टी से तैयार की जाती हैं। टेराकोटा कला ग्रामीण जीवन और धार्मिक परंपरा से गहराई से जुड़ी है।
64. राजस्थान में कोफ्तगिरी के काम के लिए कौन-से शहर प्रसिद्ध हैं-
- (A) अलवर एवं भरतपुर
- (B) अलवर एवं जयपुर
- (C) जयपुर एवं बीकानेर
- (D) जैसलमेर एवं बीकानेर
कोफ्तगिरी कला मुख्यतः अलवर और जयपुर में प्रसिद्ध है। इसमें लोहे, फौलाद या स्टील की बनी वस्तुओं पर सोने-चाँदी के पतले तारों की जड़ाई की जाती है। यह कला मूल रूप से दमिश्क (सीरिया) से भारत आई, फिर पंजाब और गुजरात से होते हुए राजस्थान पहुँची। यहाँ इसने शाही संरक्षण में विशेष पहचान बनाई।
65. निम्नलिखित में से कौनसा सुमेलित नहीं है-
- (A) थेवा कला – प्रतापगढ़
- (B) मीनाकारी – जयपुर
- (C) अजरख प्रिन्ट – सांगानेर
- (D) टेराकोटा शिल्प – मोलेला
अजरख प्रिंट का संबंध बाड़मेर से है, न कि सांगानेर से। सांगानेर वस्त्र प्रिंटिंग के लिए जरूर प्रसिद्ध है, लेकिन वह अलग शैली है। सही युग्म हैं – थेवा कला- प्रतापगढ़, मीनाकारी- जयपुर और टेराकोटा शिल्प- मोलेला (राजसमंद)।
66. राजसीको (राजस्थान लघु उद्योग निगम) अपनी हस्तकलाओं के सामान की बिक्री किस शोरूम के माध्यम से करता है-
- (A) राजस्थली
- (B) राजपूताना इम्पोरियम
- (C) राजस्थान हैण्डलूम
- (D) उपरोक्त सभी
राजस्थान लघु उद्योग निगम (राजसीको) अपनी हस्तकलाओं की बिक्री राजस्थली नामक शोरूम के माध्यम से करता है। ये शोरूम जयपुर सहित राजस्थान और अन्य बड़े शहरों में स्थित हैं। यहाँ राजस्थान की पारंपरिक हस्तकलाएँ और शिल्प वस्तुएँ सीधे ग्राहकों तक पहुँचाई जाती हैं।
67. राजस्थान की कौनसी जगह दाबू प्रिंट के लिए प्रसिद्ध है-
- (A) शाहपुरा
- (B) खंडेला
- (C) आकोला
- (D) जसोल
दाबू प्रिंट के कपड़े विशेष रूप से आकोला (चित्तौड़गढ़) में बनाए जाते हैं। यह कार्य छौंपा जाति द्वारा किया जाता है। दाबू का अर्थ है "दबाना" – रंगाई में जिन हिस्सों पर रंग नहीं चढ़ाना होता, वहाँ लेई/लुगदी लगाकर उन्हें दबा दिया जाता है। यही प्रक्रिया दाबू कहलाती है। यह तकनीक आकोला की पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग की विशेष पहचान है।
68. राजस्थान में बंधेज की सबसे बड़ी मंडी है-
- (A) बीकानेर
- (B) जयपुर
- (C) जोधपुर
- (D) बाड़मेर
राजस्थान में बंधेज (टाई एंड डाई) की सबसे बड़ी मंडी जोधपुर में है। यहाँ बंधेज की साड़ियाँ, चुनरियाँ और लुगड़े बड़ी मात्रा में बिकते हैं। बंधेज कपड़ों पर बारीक बिंदु और डिज़ाइन बनाने की पारंपरिक कला है। जोधपुर के साथ-साथ जयपुर और उदयपुर भी बंधेज के लिए प्रसिद्ध हैं।
69. ब्लू पॉटरी' की प्रसिद्ध कला इससे पूर्व किस नाम से जानी जाती थी?
- (A) कामचीनी
- (B) कोफ्तगिरी
- (C) चम्पाकली
- (D) पेपरमेशी
राजस्थान की विश्वप्रसिद्ध ब्लू पॉटरी पहले कामचीनी के नाम से जानी जाती थी। इस कला में क्वार्ट्ज पत्थर और खास तकनीक से नीले व हरे रंग के सुंदर बर्तन और सजावटी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। जयपुर में इसे विशेष पहचान मिली और यहाँ के कारीगरों ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कर दिया।
70. समुद्र लहर' नाम का लहरिया कहाँ रंगा जाता है?
- (A) जोधपुर
- (B) जैसलमेर
- (C) सीकर
- (D) जयपुर
समुद्र लहर नामक लहरिया विशेष रूप से जयपुर में रंगा जाता है। इसे रंगरेज तैयार करते हैं। इसमें चौड़ी-चौड़ी आड़ी धारियाँ बनती हैं, जो समुद्र की लहरों जैसी प्रतीत होती हैं। यह लहरिया दो, तीन, पाँच और सात रंगों में बनाया जाता है। इसे विशेष रूप से सावन-भादो के त्यौहारों पर महिलाएँ पहनती हैं।
71. नागौर का 'टांकला गाँव' किस हस्तकला के लिए प्रसिद्ध है-
- (A) दरी निर्माण
- (B) फड़ कला
- (C) लोहे के औजार
- (D) मिरर वर्क
नागौर जिले का टांकला गाँव दरी निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के कारीगर हाथ से सुंदर और टिकाऊ दरियाँ बुनते हैं। इन दरियों पर ज्यामितीय आकृतियाँ और पारंपरिक डिज़ाइन बनाए जाते हैं। यह कला नागौर की ग्रामीण संस्कृति और कारीगरी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
72. तिल पापड़ी उद्योग के लिए प्रसिद्ध स्थान है-
- (A) भुसावर (भरतपुर)
- (B) सांभर (जयपुर)
- (C) पाली
- (D) ब्यावर
राजस्थान में तिल पापड़ी उद्योग के लिए भुसावर (भरतपुर) प्रसिद्ध है। यहाँ तिल और गुड़ से बनी पापड़ी पारंपरिक रूप से तैयार की जाती है। यह पापड़ी स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है। विशेष रूप से मकर संक्रांति और शीतकालीन त्योहारों पर इसका उपयोग अधिक किया जाता है।
73. निम्नलिखित में से दौसा जिले का कौन सा स्थान दरी निर्माण के केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध है-
- (A) लवाण
- (B) आलूदा
- (C) बसवा
- (D) लालसोट
दौसा जिले का लवाण गाँव दरी निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कारीगर हाथ से बनी दरियों में आकर्षक डिज़ाइन और रंग भरते हैं। ये दरियाँ राजस्थान की ग्रामीण कारीगरी और हस्तशिल्प परंपरा का हिस्सा हैं।
74. जिरोही, भाकला, गंदहा किस उद्योग के उत्पादों के नाम हैं?
- (A) पेचवर्क
- (B) जटपट्टी
- (C) मीनाकारी
- (D) ब्लू पॉटरी
जिरोही, भाकला और गंदहा जटपट्टी उद्योग के उत्पादों के नाम हैं। जटपट्टी ऊन और बकरी के बालों से बनाई जाने वाली वस्तु है, जो मजबूत और टिकाऊ होती है। इनका उपयोग विशेष रूप से ग्रामीण जीवन में रस्सियाँ, दरियाँ और मोटे वस्त्र बनाने के लिए किया जाता है।
75. कौनसा कूट सुमेलित नहीं है-(हस्तकला) – (स्थान)
- (A) मामाजी के घोड़े – बसन्तगढ़
- (B) दाबू प्रिन्ट – आकोला
- (C) लाख का काम – लक्ष्मणगढ़, फतेहपुर
- (D) अजरक प्रिन्ट – बाड़मेर
मामाजी के घोड़े बसंतगढ़ के नहीं बल्कि जालौर जिले के हरजी गाँव में बनाए जाते हैं। अन्य युग्म सही हैं – दाबू प्रिंट (आकोला), लाख का काम (लक्ष्मणगढ़-फतेहपुर), अजरख प्रिंट (बाड़मेर)।
76. राजस्थान में स्त्रियों द्वारा किस मास में 'लहरिया' ओढ़ा जाता है?
- (A) भाद्रपद
- (B) ज्येष्ठ
- (C) माघ
- (D) श्रावण
राजस्थान में स्त्रियाँ विशेष रूप से श्रावण मास में लहरिया ओढ़नी पहनती हैं। यह कपड़ा तिरछी धारियों के डिजाइन में रंगा जाता है, जो लहरों जैसा प्रतीत होता है। सावन-भादो के त्यौहारों पर लहरिया पहनना शुभ माना जाता है और यह राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।
77. बाड़मेर
- (A) 1234
- (B) 4321
- (C) 1243
- (D) 4312
सही सुमेल है – (क) अजरख प्रिंट – बाड़मेर, (ख) पावरलूम कपड़ों पर छपाई – बालोतरा, (ग) मोठड़ा – जोधपुर और (घ) मसूरिया – कैथून। इस आधार पर सही क्रम 4321 है। अजरख प्रिंट बाड़मेर में, मोठड़ा (लकड़ी का खिलौना) जोधपुर में, पावरलूम छपाई बालोतरा में और मसूरिया साड़ी कैथून (कोटा) में प्रसिद्ध है।
78. तुड़िया कला' किस स्थान की प्रसिद्ध है?
- (A) सांगानेर (जयपुर)
- (B) कैथून (कोटा)
- (C) बगरू (जयपुर)
- (D) राजाखेड़ा (धौलपुर)
तुड़िया कला नकली आभूषण बनाने की कला है, जो विशेष रूप से राजाखेड़ा (धौलपुर) में प्रसिद्ध है। इसमें धातु और अन्य सस्ते पदार्थों से आभूषण तैयार किए जाते हैं। यह कला ग्रामीण और मध्यम वर्गीय लोगों में लोकप्रिय रही है, क्योंकि इसमें दिखने में आकर्षक और सस्ते आभूषण बनाए जाते हैं।
79. मारवाड़ में 'दामणी' क्या था-
- (A) एक प्रकार का गहना
- (B) ओढ़नी का एक प्रकार
- (C) पशु बांधने की रस्सी
- (D) पगड़ी का एक प्रकार
मारवाड़ क्षेत्र में दामणी महिलाओं द्वारा ओढ़ी जाने वाली ओढ़नी का एक प्रकार था। यह पारंपरिक परिधान विशेष अवसरों और त्योहारों पर प्रयोग किया जाता था। राजस्थान की ओढ़नियाँ जैसे लहरिया, पोमचा और दामणी महिलाओं की वेशभूषा की पहचान हैं।
80. राजस्थान में 'पाव रजाई' कहाँ की प्रसिद्ध है?
- (A) जयपुर
- (B) जोधपुर
- (C) कोटा
- (D) उदयपुर
राजस्थान की प्रसिद्ध पाव रजाई विशेष रूप से जयपुर की है। यह हल्की और पतली रजाई होती है, जो गर्मी और सर्दी दोनों में आरामदायक होती है। पाव रजाई की खासियत इसकी महीन कारीगरी और हल्कापन है। जयपुर में यह परंपरागत घरेलू उद्योग के रूप में विकसित हुई।
राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ – सभी भाग:
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