राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ (Handicrafts of Rajasthan) – Part 5
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की हस्तकलाएँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में लहरिया, ब्लैक पॉटरी, सुनहरी पॉटरी, ब्लू पॉटरी, लाख की पॉटरी बीकानेर, कठपुतली, हस्तशिल्प डिज़ाइन विकास एवं शोध केन्द्र जयपुर, जवाहरात उद्योग, कावड़ कला आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की हस्तकलाएँ
- कुल प्रश्न: 20
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81. राजस्थान का वह स्थान, जहाँ का 'लहरिया' प्रसिद्ध है-
- (A) जोधपुर
- (B) बीकानेर
- (C) जयपुर
- (D) कोटा
राजस्थान का लहरिया विशेष रूप से जयपुर का प्रसिद्ध है। इसमें कपड़े को मोड़कर रंगाई की जाती है, जिससे लहर जैसी तिरछी धारियाँ बनती हैं। सावन-भादो के त्यौहारों पर लहरिया पहनना विशेष शुभ माना जाता है। जयपुर का लहरिया देश-विदेश में प्रसिद्ध है।
82. नागौर का 'बू-नरावता गाँव' किसलिए प्रसिद्ध है?
- (A) मिट्टी के खिलौने के लिए
- (B) लोहे के औजार के लिए
- (C) जट-पट्टी उद्योग के लिए
- (D) रेशमी कंबल के लिए
नागौर का बू-नरावता गाँव विशेष रूप से मिट्टी के खिलौनों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कारीगर सुंदर खिलौने, गुलदस्ते, गमले और पक्षियों की आकृतियाँ मिट्टी से बनाते हैं। यह कला ग्रामीण जीवन का हिस्सा है और स्थानीय मेलों व त्योहारों में इनकी मांग अधिक रहती है।
83. राजस्थान के किस कलाकार को मूर्तिकला व मिट्टी के शिल्प के कारण 'क्लोनिंग का महारथी' कहा जाता है?
- (A) कृपाल सिंह शेखावत
- (B) भंवरलाल अंगीरा
- (C) मातुराम वर्मा
- (D) अर्जुनलाल प्रजापति
जयपुर निवासी अर्जुनलाल प्रजापति को उनकी मूर्तिकला और मिट्टी के शिल्प के कारण 'क्लोनिंग का महारथी' कहा जाता है। उन्होंने मिट्टी से जीवंत मूर्तियाँ बनाकर इस क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया। इनका नवंबर 2020 में कोरोना के कारण निधन हो गया।
84. कृपाल सिंह किस कार्य के लिए जाने जाते हैं?
- (A) ब्लैक पॉटरी
- (B) सुनहरी पॉटरी
- (C) ब्लू पॉटरी
- (D) लाख की पॉटरी
कृपाल सिंह शेखावत जयपुर की प्रसिद्ध ब्लू पॉटरी कला के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने इस कला को आधुनिक रूप देते हुए अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। ब्लू पॉटरी को पहले "कामचीनी" कहा जाता था। इसकी विशेषता क्वार्ट्ज पत्थर से बनी पारदर्शी नीले और हरे रंग की सुंदर वस्तुएँ हैं।
85. किस लोक कला के निर्माण का पुश्तैनी व्यवसाय केवल चितौड़गढ़ जिले के ग्राम बस्सी में ही देखा जाता है?
- (A) फड़
- (B) सांझी
- (C) वील
- (D) कांवड़
चितौड़गढ़ जिले के बस्सी गाँव में कांवड़ निर्माण का पुश्तैनी व्यवसाय विशेष रूप से खेराड़ी जाति के लोगों द्वारा किया जाता है। कांवड़ लकड़ी का बना हुआ चल मंदिर है, जिसमें देवी-देवताओं और धार्मिक कथाओं के चित्र बनाए जाते हैं। इसे भक्तजन यात्रा या धार्मिक अवसरों पर अपने साथ ले जाते हैं। यह कला राजस्थान की अनूठी धार्मिक परंपरा को दर्शाती है।
86. उस्ता कला क्या है-
- (A) पीतल पर की जाने वाली नक्काशी
- (B) ऊँट की खाल पर स्वर्णिम चित्रकारी
- (C) पानी ठंडा रखने के पात्र बादले निर्माण की कला
- (D) इनमें से कोई नहीं
उस्ता कला ऊँट की खाल पर की जाने वाली स्वर्णिम चित्रकारी है। यह कला विशेष रूप से बीकानेर में प्रसिद्ध है। इसमें सोने और रंगों से ऊँट की खाल पर नक्काशी और चित्र बनाए जाते हैं। उस्ता कला बीकानेर की अनूठी शिल्प परंपरा है।
87. राजस्थान का कौनसा शहर ब्लू पॉटरी के लिए प्रसिद्ध है-
- (A) जोधपुर
- (B) कोटा
- (C) जयपुर
- (D) बीकानेर
जयपुर शहर विशेष रूप से ब्लू पॉटरी के लिए प्रसिद्ध है। इसमें क्वार्ट्ज से बने बर्तनों पर नीले और हरे रंग की आकर्षक आकृतियाँ बनाई जाती हैं। जयपुर के कारीगरों ने इस कला को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। यह राजस्थान की सबसे लोकप्रिय हस्तकलाओं में से एक है।
88. डूंगरसिंह भाटी, ईश्वरसिंह व पीरदान सिंह भाटी किस कला के प्रसिद्ध कलाकार हैं-
- (A) ऊँट के शृंगार का सामान
- (B) कशीदे युक्त जूतियाँ
- (C) पत्थर पर नक्काशी
- (D) बंधेज कला
डूंगरसिंह भाटी, ईश्वरसिंह और पीरदान सिंह भाटी ऊँट के शृंगार का सामान बनाने की कला के लिए प्रसिद्ध हैं। राजस्थान में ऊँट को "रेगिस्तान का जहाज" कहा जाता है और मेलों व त्योहारों में ऊँटों को सजाने की परंपरा रही है। भाटी परिवार ने इस पारंपरिक कला को संरक्षित और लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
89. जयपुर की 'ब्लू पॉटरी' को किसने अंतर्राष्ट्रीय पहचान दी-
- (A) रामगोपाल विजयवर्गीय
- (B) मोहनलाल कुम्हार
- (C) कृपाल सिंह शेखावत
- (D) श्रीलाल जोशी
जयपुर की प्रसिद्ध ब्लू पॉटरी को अंतर्राष्ट्रीय पहचान कृपाल सिंह शेखावत ने दिलाई। इनका जन्म 1922 ई. में नीमकाथाना के मऊ गाँव में हुआ था। इन्होंने ब्लू पॉटरी कला को आधुनिकता दी और इसे देश-विदेश तक पहुँचाया। इन्हें “ब्लू पॉटरी का पिता” भी कहा जाता है।
90. लाख की पॉटरी कहाँ की प्रसिद्ध है?
- (A) बीकानेर
- (B) जोधपुर
- (C) अलवर
- (D) कोटा
लाख की पॉटरी बीकानेर की प्रसिद्ध कला है। इसमें मिट्टी के बर्तनों को लाख की परत से ढककर उन पर आकर्षक डिज़ाइन बनाए जाते हैं। यह कला बीकानेर की परंपरा का हिस्सा है और विशेष रूप से स्थानीय उपयोग और सजावट के लिए प्रसिद्ध है।
91. कठपुतलियों का निर्माण मुख्य रूप से कहाँ होता है-
- (A) चुरू
- (B) बूंदी
- (C) उदयपुर
- (D) कोटा
राजस्थान में कठपुतलियों का निर्माण मुख्यतः उदयपुर में होता है। इसके अलावा चित्तौड़गढ़ में भी इनका निर्माण किया जाता है। कठपुतली राजस्थान की लोककला का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे नाटक और कहानी कहने के लिए प्रयोग किया जाता है।
92. राजस्थान में कठपुतली कला को प्रसिद्धि दिलाने में महत्त्वपूर्ण योगदान किसका रहा है?
- (A) देवीलाल सामर
- (B) भंवरलाल अंगीरा
- (C) अर्जुनलाल प्रजापति
- (D) चौथमल जोशी
देवीलाल सामर ने राजस्थान की कठपुतली कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध किया। उन्होंने भारतीय लोक कला मंडल, उदयपुर की स्थापना की और लोककलाओं को मंच प्रदान किया। कठपुतली कला को बचाने और संरक्षित करने का श्रेय इन्हें ही जाता है।
93. हस्तशिल्प डिज़ाइन विकास एवं शोध केन्द्र स्थित है-
- (A) जोधपुर
- (B) बीकानेर
- (C) उदयपुर
- (D) जयपुर
राजस्थान का हस्तशिल्प डिज़ाइन विकास एवं शोध केन्द्र जयपुर में स्थित है। यह केंद्र हस्तशिल्पियों के डिज़ाइन को आधुनिक रूप देने, नए प्रयोग करने और पारंपरिक कलाओं को संरक्षित करने का कार्य करता है। इससे राज्य के कारीगरों को बाज़ार और पहचान दोनों मिलते हैं।
94. राजस्थान का कौनसा शहर विश्वभर में जवाहरात उद्योग के लिए प्रसिद्ध है?
- (A) चित्तौड़गढ़
- (B) उदयपुर
- (C) जयपुर
- (D) जोधपुर
राजस्थान की राजधानी जयपुर विश्वभर में जवाहरात उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ हीरे की कटाई, तराशना और उन्हें आभूषणों में जड़ने का कार्य अत्यंत कुशलता से किया जाता है। जयपुर का जौहरी बाज़ार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। इसी कारण इसे “पिंक सिटी” के साथ-साथ “जेम्स सिटी” भी कहा जाता है।
95. कावड़ कला किस वस्तु से संबंधित है-
- (A) कागज
- (B) कपड़ा
- (C) मिट्टी
- (D) लकड़ी
कावड़ कला लकड़ी से संबंधित है। कावड़ एक चल मंदिर की तरह होता है, जिसमें चित्रों के माध्यम से धार्मिक कथाएँ और चरित्र प्रस्तुत किए जाते हैं। इसे विशेष रूप से चित्तौड़गढ़ जिले के बस्सी गाँव में बनाया जाता है। यह राजस्थान की अनूठी लोककला है।
96. सूँघनी नसवार प्रसिद्ध है-
- (A) ब्यावर
- (B) बाँसवाड़ा
- (C) अलवर
- (D) उदयपुर
राजस्थान का ब्यावर शहर सूँघनी नसवार के लिए प्रसिद्ध है। यह एक प्रकार का तंबाकू उत्पाद है, जिसे लोग नाक से सूंघते हैं। ब्यावर की नसवार अपने तीखेपन और विशेष स्वाद के लिए जानी जाती है और इसे राजस्थान ही नहीं, बाहर के राज्यों में भी निर्यात किया जाता है।
97. राजस्थान की कशीदे युक्त जूतियाँ कहाँ की प्रसिद्ध हैं?
- (A) खंडेला व सीकर
- (B) भीनमाल व जालौर
- (C) बोरूंदा व मंडोर
- (D) बाड़मेर व चौहटन
राजस्थान में भीनमाल और जालौर कशीदे युक्त जूतियों के लिए प्रसिद्ध हैं। इन जूतियों पर धागों और गोटे से सुंदर कढ़ाई की जाती है। यह पारंपरिक हस्तकला इतनी लोकप्रिय है कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने USDP के तहत बडू गाँव (नागौर) में इस कला को बढ़ावा देने की योजना भी चलाई है।
98. राजस्थान में हाथ से कागज निर्माण का कार्य कहाँ किया जाता है-
- (A) शाहपुरा
- (B) मेड़ता
- (C) सांगानेर
- (D) टाँकला गाँव
राजस्थान में सांगानेर (जयपुर) हाथ से कागज बनाने के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पारंपरिक तकनीक से कपास और कपड़े के टुकड़ों से कागज तैयार किया जाता है। सांगानेर का कागज अपनी मजबूती और टिकाऊपन के कारण आज भी लोकप्रिय है। यह कला पर्यावरण अनुकूल होने के साथ-साथ राजस्थान की कारीगरी का अनूठा उदाहरण है।
99. जरी का काम सूरत से जयपुर किसके समय लाया गया?
- (A) महाराज राम सिंह द्वितीय
- (B) सवाई प्रतापसिंह
- (C) सवाई जयसिंह
- (D) सवाई ईश्वरी सिंह
जयपुर में जरी का काम विशेष रूप से सवाई जयसिंह के समय सूरत से लाया गया। जरी कार्य में सोने और चाँदी के तारों से सुंदर कढ़ाई की जाती है। यह कला विशेष रूप से राजसी परिधानों, शादी के वस्त्रों और धार्मिक कपड़ों में उपयोग की जाती थी। जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में जरी कला का आज भी महत्वपूर्ण स्थान है।
100. गलीचे निर्माण के लिए प्रसिद्ध है-
- (A) जयपुर, बीकानेर
- (B) जैसलमेर, बाड़मेर
- (C) टोंक, कोटा
- (D) भीलवाड़ा, अजमेर
राजस्थान में गलीचा निर्माण के लिए मुख्यतः जयपुर और बीकानेर प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा टोंक में भी गलीचे बनाने का कार्य होता है। रियासती काल में बीकानेर जेल में बनने वाले गलीचे अत्यधिक लोकप्रिय थे। जयपुर में बने गलीचे अपनी कलात्मकता और गुणवत्ता के कारण आज भी देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। यह कला हाथ से बुनाई और डिज़ाइन पर आधारित होती है।
राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ – सभी भाग:
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