राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ (Handicrafts of Rajasthan) – Part 7
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की हस्तकलाएँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में मीनाकारी, जाजम छपाई चित्तौड़गढ़, थेवा कला प्रतापगढ़, पोमचा, ब्ल्यू पॉटरी, गोटा उद्योग, दाबू प्रिंट, पीला पोमचा, बंधेज कला, कढ़ाई और पैचवर्क आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की हस्तकलाएँ
- कुल प्रश्न: 20
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121. उदयपुर से 13 किलोमीटर दूर 'हवाला ग्राम' में हस्तशिल्पियों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से किसकी स्थापना की गई है-
- (A) राजस्थली
- (B) नेशनल हैण्डलूम
- (C) शिल्पग्राम
- (D) कलाग्राम
उदयपुर से 13 किलोमीटर दूर स्थित हवाला ग्राम में हस्तशिल्पियों और लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए शिल्पग्राम की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य ग्रामीण कला, शिल्प और लोकसंस्कृति का संरक्षण और प्रचार-प्रसार करना है। यहाँ हर वर्ष शिल्पग्राम उत्सव आयोजित होता है, जिसमें देश-विदेश से कारीगर और कलाकार भाग लेते हैं।
122. निम्न में से किस स्थान पर शिल्पग्राम की स्थापना नहीं की गई-
- (A) हवाला (उदयपुर)
- (B) पुष्कर (अजमेर)
- (C) मांगरोल (बांरा)
- (D) पाल (जोधपुर)
राजस्थान में शिल्पग्राम की स्थापना हवाला (उदयपुर), पुष्कर (अजमेर), पाल (जोधपुर) और रामसिंहपुरा (सवाई माधोपुर) में की गई है। इसका उद्देश्य हस्तशिल्प व्यवसाय और लोक कलाओं को बढ़ावा देना है। लेकिन मांगरोल (बांरा) में शिल्पग्राम नहीं है।
123. संगमरमर की मूर्तियाँ निर्माण के लिए प्रसिद्ध स्थान है?
- (A) जयपुर
- (B) कोटा
- (C) अलवर
- (D) नागौर
राजस्थान में संगमरमर की मूर्तियाँ बनाने के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थान जयपुर है। यहाँ के कारीगर सफेद और रंगीन संगमरमर पर बारीक नक्काशी करके आकर्षक मूर्तियाँ बनाते हैं। जयपुर के अलावा अलवर, थानागाजी और जोधपुर में भी संगमरमर की मूर्तियाँ बनाई जाती हैं, लेकिन जयपुर को सबसे अधिक ख्याति प्राप्त है।
124. राजस्थान में कहाँ पर प्रसिद्ध मीनाकारी गहने बनाए जाते हैं-
- (A) जोधपुर
- (B) सीकर
- (C) बीकानेर
- (D) जयपुर
राजस्थान में प्रसिद्ध मीनाकारी गहने जयपुर में बनाए जाते हैं। यह कला सोने, चाँदी और तांबे पर की जाती है, जिसमें रंगीन पच्चीकारी से आभूषणों को सजाया जाता है। जयपुर की मीनाकारी विश्व प्रसिद्ध है और यहाँ के शाही संरक्षण ने इसे नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
125. जाजम छपाई कहाँ की प्रसिद्ध है?
- (A) उदयपुर
- (B) राजसमंद
- (C) चित्तौड़गढ़
- (D) बांसवाड़ा
जाजम छपाई चित्तौड़गढ़ की प्रसिद्ध कला है। मोटे सूती धागों से बनी दरी को जाजम कहते हैं, जिस पर हाथ से रंगों की छपाई की जाती है। इसे मांगलिक और धार्मिक अवसरों पर जमीन पर बिछाया जाता है। जाजम में लाल और हरे रंग का प्रयोग सबसे अधिक किया जाता है।
126. राजस्थान में हाथी दाँत का काम होता है-
- (A) जोधपुर, जेठाना, बीकानेर
- (B) जयपुर, मेड़ता, उदयपुर
- (C) बाड़मेर, कुशलगढ़, टोंक
- (D) उदयपुर, पिलानी, सीकर
राजस्थान में जयपुर, मेड़ता और उदयपुर हाथीदाँत के काम के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ हाथीदाँत से सुंदर चूड़ियाँ, आभूषण और सजावटी वस्तुएँ बनाई जाती थीं। यह कला आज विलुप्तप्राय है, लेकिन पारंपरिक रूप से राजस्थान की शिल्पकला का गौरव रही है।
127. बगरू हैंडब्लॉक प्रिंट को भौगोलिक चिन्हीकरण (GI Tag) किस वर्ष दिया गया?
- (A) 2012
- (B) 2008
- (C) 2010
- (D) 2014
बगरू हैंडब्लॉक प्रिंट को वर्ष 2012 में भौगोलिक चिन्हीकरण (GI Tag) मिला। यह प्रिंट प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के ठप्पों से बनाया जाता है। बगरू (जयपुर) की यह कला विशेष रूप से लाल और काले रंगों के लिए प्रसिद्ध है।
128. सोपस्टोन/घीया पत्थर से मूर्तियाँ बनाने की कला किस नाम से जानी जाती है-
- (A) रमकड़ा कला
- (B) कोफ्तगिरी कला
- (C) मीनाकारी कला
- (D) कुंदन कला
सोपस्टोन/घीया पत्थर से मूर्तियाँ बनाने की कला 'रमकड़ा कला' कहलाती है। यह कला विशेष रूप से गलियाकोट (डूंगरपुर) में प्रसिद्ध है। यहाँ घीया पत्थर से देवी-देवताओं और अन्य आकृतियों की मूर्तियाँ बनाई जाती हैं।
129. थेवा कला से तात्पर्य है-
- (A) सफेद दीवार पर गोबर से आकृतियाँ बनाना
- (B) मिट्टी से लोक देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बनाना
- (C) काँच पर सोने/चाँदी के सूक्ष्म चित्रांकन की कला
- (D) कागज पर देवी-देवताओं के चित्र
थेवा कला प्रतापगढ़ की प्रसिद्ध कला है। इसमें काँच पर सोने और चाँदी के सूक्ष्म चित्रांकन किए जाते हैं। इस कला में बेल्जियम के रंगीन काँच का प्रयोग होता है। यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी सोनी परिवार द्वारा संरक्षित की गई है।
130. गोटे से बने फूल क्या कहलाते हैं?
- (A) किरण
- (B) बादला
- (C) बिजिया
- (D) मुकेश
राजस्थान में गोटे से बने फूलों को बिजिया कहा जाता है। गोटा एक प्रकार का सुनहरा या चांदी का फीता होता है, जिसका उपयोग विशेष रूप से महिलाओं के परिधानों, दुपट्टों और शादी-ब्याह के कपड़ों में किया जाता है। बिजिया गोटे का सुंदर और लोकप्रिय प्रकार है।
131. महिलाओं की ओढ़नी 'पोमचा' का रंग कैसा होता है?
- (A) हरा
- (B) गेरूआ
- (C) कत्थई
- (D) पीला
राजस्थान में पोमचा एक पारंपरिक ओढ़नी है, जिसे महिलाएँ विशेष अवसरों पर पहनती हैं। इसका रंग प्रायः पीला होता है और यह शुभता का प्रतीक माना जाता है। पोमचा विवाह, धार्मिक अनुष्ठानों और त्योहारों में विशेष रूप से पहना जाता है। यह महिलाओं के परिधान की गरिमा और संस्कृति को दर्शाता है।
132. राजस्थान के किस क्षेत्र के महाराजाओं ने ब्ल्यू पॉटरी को प्रश्रय दिया-
- (A) जोधपुर
- (B) बीकानेर
- (C) जयपुर
- (D) उदयपुर
ब्ल्यू पॉटरी को राजस्थान में सबसे अधिक जयपुर के महाराजाओं ने संरक्षण दिया। जयपुर दरबार के शासकों ने इस कला को लाहौर से लाकर अपने यहाँ स्थापित किया और इसे राजसी कला का दर्जा दिलाया। आज जयपुर की ब्ल्यू पॉटरी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है।
133. खण्डेला (सीकर) व भिनाय (अजमेर) प्रसिद्ध है?
- (A) पेचवर्क व चटापटी कार्य के लिए
- (B) गरासियों की फाग ओढ़नी
- (C) रेजी निर्माण के लिए
- (D) गोटा उद्योग के लिए
खण्डेला (सीकर) और भिनाय (अजमेर) गोटा उद्योग के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ गोटे की विभिन्न किस्में जैसे लप्पा, लप्पी, किरण, बिजिया आदि बनाई जाती हैं। गोटा का प्रयोग विशेष रूप से शादी-ब्याह के परिधानों और राजस्थानी महिलाओं की पारंपरिक पोशाकों को सजाने के लिए किया जाता है।
134. आकोला में 'दाबू प्रिन्ट' मुख्यतः किस जाति द्वारा किया जाता है-
- (A) छौंपा
- (B) माली
- (C) सोनी
- (D) बालदीया
चित्तौड़गढ़ जिले के आकोला में दाबू प्रिंट मुख्यतः छौंपा जाति के लोग करते हैं। दाबू प्रिंट में कपड़े के जिन हिस्सों पर रंग नहीं चढ़ाना होता, वहाँ गीली मिट्टी, गोंद और चूने का लेप किया जाता है। फिर प्राकृतिक रंगों से छपाई की जाती है। यह कला राजस्थान की प्राचीन परंपराओं का हिस्सा है।
135. निम्न में से असुमेलित युग्म है-
- (A) मोम का दाबू - सवाई माधोपुर
- (B) मिट्टी का दाबू - बालोतरा
- (C) अभ्रक का दाबू - सांगानेर (जयपुर), बगरू (जयपुर)
- (D) मिट्टी व गोंद का दाबू - आकोला
सांगानेर और बगरू की छपाई में गेहूँ के बीधण का दाबू प्रयोग किया जाता है, न कि अभ्रक का। इसलिए यह युग्म असुमेलित है। बाकी विकल्प सही हैं क्योंकि सवाई माधोपुर में मोम का दाबू, बालोतरा में मिट्टी का दाबू और आकोला में मिट्टी व गोंद का दाबू प्रयोग किया जाता है।
136. राजस्थान में 'पीला पोमचा' (एक प्रकार की ओढ़नी) कब पहना जाता है?
- (A) कुंवारी लड़कियों द्वारा
- (B) कन्या के विवाह पर
- (C) बेटे के जन्म पर
- (D) तीर्थ यात्रा पर जाते समय
राजस्थान में महिलाओं द्वारा 'पीला पोमचा' बेटे के जन्म पर पहना जाता है। यह विशेष परंपरा समाज में बेटे के जन्म को उत्सव और खुशी के रूप में दर्शाती है। पोमचा शुभता और समृद्धि का प्रतीक है, इसलिए इसका प्रयोग ऐसे अवसरों पर किया जाता है।
137. ब्ल्यू पॉटरी को राजस्थान में किस शासक द्वारा लाया गया-
- (A) सवाई जयसिंह
- (B) रामसिंह द्वितीय
- (C) माधोसिंह द्वितीय
- (D) भवानी सिंह
ब्ल्यू पॉटरी राजस्थान में रामसिंह द्वितीय के शासनकाल में लाहौर से जयपुर लाई गई थी। इसमें चीनी मिट्टी पर नीले रंग की आकर्षक चित्रकारी की जाती है। पहले इसे कामचीनी भी कहा जाता था। इस कला को जयपुर राजघराने ने विशेष संरक्षण दिया।
138. राजस्थान के कोटा और बाराँ जिले में बनाई जाने वाली 'चूंदडी' का कार्य प्रकार का है-
- (A) कुट्टी-मिट्टी कला
- (B) मिरर वर्क
- (C) टाई एवं डाई
- (D) चट्टा-पट्टी
चूंदड़ी बंधेज कला का ही एक रूप है, जिसे 'टाई एंड डाई' तकनीक कहा जाता है। इसमें कपड़े को धागों से बाँधकर रंगाई की जाती है, जिससे सुंदर डिजाइन उभरते हैं। कोटा, बूंदी और बारां जिले चूंदड़ी निर्माण के लिए प्रसिद्ध हैं।
139. भरत', 'सूफ', 'हुरम जी' व 'आरी' किससे सम्बंधित है-
- (A) हाथीदाँत की चूड़ीयाँ
- (B) कठपुतली कला
- (C) कढ़ाई व पैचवर्क
- (D) मुनव्वती कला
राजस्थान की पारंपरिक कढ़ाई और पैचवर्क में भरत, सूफ, हुरम जी और आरी प्रमुख शैलियाँ हैं। ये कढ़ाई विशेष रूप से दुपट्टों, घाघरों और ओढ़नियों पर की जाती है। बाड़मेर और बीकानेर क्षेत्र में इनका विशेष प्रचलन है।
140. राजस्थान में कढ़ाई की एक विशेष शैली 'हुरमुचो' कहाँ की प्रसिद्ध है?
- (A) बाड़मेर
- (B) जयपुर
- (C) उदयपुर
- (D) जोधपुर
हुरमुचो' कढ़ाई बाड़मेर की विशेष शैली है। इसमें बारीक और सुंदर कढ़ाई की जाती है, जो विशेष रूप से ओढ़नियों और महिलाओं के परिधानों पर देखने को मिलती है। यह कला बाड़मेर की कशीदाकारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा है और ग्रामीण महिलाएँ इसे पीढ़ियों से करती आ रही हैं।
राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ – सभी भाग:
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