राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ Questions with Answers

राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ (Handicrafts of Rajasthan) – Part 8

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की हस्तकलाएँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में कावड़, थेवा कला, बगरू प्रिन्ट, बाजोट, खांडे, बेवाण, पिछवाई चित्रकला, पोकरण पॉटरी, कोटा डोरिया, जयपुर की ब्ल्यू पॉटरी आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान की हस्तकलाएँ
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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141. विभिन्न कपाटों में खुलने व बंद होने वाली छोटे मंदिरनुमा काष्ठ कलाकृति, जिस पर विभिन्न देवी-देवताओं के चित्र बने होते हैं, क्या कहलाती है?

  • (A) सांझी
  • (B) कावड़
  • (C) गणगौर
  • (D) भराड़ी

कावड़ राजस्थान की अनोखी काष्ठ कला है। यह एक चलता-फिरता देवघर/देवालय होता है, जिसके कपाट क्रमशः खुलते जाते हैं और उनमें देवी-देवताओं के चित्र अंकित रहते हैं। कावड़ वाचन के समय कावड़िया भाट इसे अपनी गोद में रखकर पद्यमय ढंग से भक्ति गीत गाते हैं। इसका उपयोग धार्मिक अवसरों और विशेष कथाओं में किया जाता है।

142. राजस्थान का वह एकमात्र परिवार, जिसे किसी हस्तकला के लिए एक ही परिवार के व्यक्तियों को 8 बार राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है?

  • (A) शाहपुरा का जोशी परिवार
  • (B) दुलमेरा का उस्ता परिवार
  • (C) प्रतापगढ़ का सोनी परिवार
  • (D) बस्सी का जांगीड़ परिवार

प्रतापगढ़ का सोनी परिवार 'थेवा कला' के लिए प्रसिद्ध है। इस परिवार के सदस्यों को उत्कृष्ट योगदान के लिए एक ही परिवार से 8 बार राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है। थेवा कला काँच पर सोने-चाँदी के सूक्ष्म चित्रांकन की अनोखी शैली है।

143. प्रतापगढ़ की थेवा कला को किस वर्ष 'भौगोलिक चिन्हीकरण' जीआई टैग प्राप्त हुआ है?

  • (A) 2011
  • (B) 2014
  • (C) 2008
  • (D) 2016

थेवा कला को वर्ष 2014 में जीआई टैग प्राप्त हुआ। यह कला प्रतापगढ़ की विशेष पहचान है, जिसमें रंगीन काँच पर सोने-चाँदी की महीन नक्काशी की जाती है। इस कला ने राजस्थान को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई है।

144. निम्न में से किस कलाकार का सम्बन्ध मोलेला की टेराकोटा कला से नहीं है?

  • (A) मोहनलाल कुम्हार
  • (B) खेमराज
  • (C) राजेन्द्र कुम्हार
  • (D) गोपाल सैनी

मोलेला (राजसमंद) की टेराकोटा कला से मोहनलाल कुम्हार, खेमराज और राजेन्द्र कुम्हार जुड़े रहे हैं। जबकि गोपाल सैनी ब्ल्यू पॉटरी के प्रसिद्ध कलाकार हैं, उनका संबंध टेराकोटा से नहीं है।

145. लकड़ी की वह लघु मंदिरनुमा कलाकृति, जिसमें जलझूलनी आदि अवसरों पर देवताओं के विग्रह को रखकर सवारी निकाली जाती है?

  • (A) बाजोट
  • (B) कावड़
  • (C) खांडे
  • (D) बेवाण

बेवाण एक लघु मंदिरनुमा लकड़ी की कलाकृति है। इसे जलझूलनी एकादशी और अन्य धार्मिक अवसरों पर देव प्रतिमाओं को रखकर शोभायात्रा में निकाला जाता है। यह चित्तौड़गढ़ जिले के बस्सी क्षेत्र की विशेष कला है।

146. पिछवाई का प्रयोग विशेष रूप से किस सम्प्रदाय के मंदिरों में होता है?

  • (A) वल्लभ सम्प्रदाय
  • (B) नाथ सम्प्रदाय
  • (C) गोड़ीय सम्प्रदाय
  • (D) रसिक सम्प्रदाय

पिछवाई चित्रकला का प्रयोग वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिरों में विशेष रूप से किया जाता है। नाथद्वारा मंदिर में श्रीनाथजी के पीछे सजाई जाने वाली चित्रित पिछवाई विश्व प्रसिद्ध है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों को दर्शाया जाता है।

147. राजस्थान में नाथद्वारा के अलावा पिछवाई निर्माण के अन्य केंद्र कौनसे हैं?

  • (A) डीग, धौलपुर, बूंदी
  • (B) बगरू, आकोला, उदयपुर
  • (C) कांकरोली, कोटा, अलवर
  • (D) चौहटन, रामसर, जालौर

नाथद्वारा के अलावा कांकरोली, कोटा और अलवर भी पिछवाई निर्माण के प्रमुख केंद्र हैं। यहाँ पिछवाई चित्रों में भगवान कृष्ण के जीवन से संबंधित दृश्य उकेरे जाते हैं।

148. भीलों की वह लोकदेवी, विवाह आदि मांगलिक अवसरों पर जिसका चित्र घर की दीवारों पर बनाया जाता है?

  • (A) खोडियाल माता
  • (B) भराड़ी
  • (C) होवण माता
  • (D) डाहल

भराड़ी भील समाज की प्रमुख लोकदेवी हैं। विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर घर की दीवारों पर उनका चित्र बनाया जाता है। यह परंपरा भील समाज की आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है।

149. लकड़ी के खिलौनों के लिए प्रसिद्ध स्थान है?

  • (A) हनुमानगढ़
  • (B) जोधपुर
  • (C) बीकानेर
  • (D) उदयपुर

उदयपुर लकड़ी के खिलौनों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कारीगर बारीक नक्काशी और रंगों का प्रयोग करके सुंदर खिलौने बनाते हैं। ये खिलौने राजस्थान की परंपरागत कला और संस्कृति को जीवंत करते हैं।

150. राजस्थान में काले पत्थर से मूर्ति निर्माण के लिए प्रसिद्ध स्थान है?

  • (A) सिकन्दरा (दौसा)
  • (B) तलवाड़ा (बांसवाड़ा)
  • (C) पोकरण (जैसलमेर)
  • (D) बगरू (जयपुर)

तलवाड़ा (बांसवाड़ा) काले पत्थर से मूर्तियाँ बनाने के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की मूर्तियाँ अपनी चिकनाई, मजबूती और कलात्मक नक्काशी के कारण पहचानी जाती हैं। इनका प्रयोग मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर किया जाता है।

151. राजस्थान की बनारसी साड़ी' कहलाने वाली कला है?

  • (A) फूल की साड़ी, जोबनेर
  • (B) से पेंटिंग की साड़ी, नाथद्वारा
  • (C) मूसरिया मलमल साड़ी, कोटा
  • (D) सुंठ की साड़ी, सवाईमाधोपुर

राजस्थान की मूसरिया मलमल साड़ी, जिसे कोटा डोरिया साड़ी भी कहा जाता है, को 'राजस्थान की बनारसी साड़ी' कहा जाता है। यह कोटा जिले की विशेष पहचान है। इसकी खासियत इसका हल्का वजन और जालीदार बुना हुआ कपड़ा है, जो गर्मियों के लिए बहुत उपयुक्त माना जाता है।

152. राजस्थान सरकार द्वारा हस्तशिल्प/कला के क्षेत्र में राज्य स्तरीय पुरस्कार विजेता को कितनी राशि का पुरस्कार दिया जाता है?

  • (A) 5000
  • (B) 25000
  • (C) 50000
  • (D) 20000

राजस्थान सरकार द्वारा कला एवं हस्तशिल्प के क्षेत्र में राज्य स्तरीय पुरस्कार विजेताओं को 25,000 रुपये की राशि प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त भारत सरकार भी राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार देती है जिसकी राशि 50,000 रुपये होती है। हाल ही में राज्य में "राजस्थान हस्तशिल्प रत्न पुरस्कार" की शुरुआत की गई है, जिसकी राशि 1 लाख रुपये तक बढ़ाई गई है।

153. उस्ता कला' के लिए 'उस्ता कैमल हाइड केन्द्र' की स्थापना 1975 में कहाँ की गई थी?

  • (A) जैसलमेर
  • (B) बीकानेर
  • (C) नागौर
  • (D) बाड़मेर

राजस्थान की प्रसिद्ध उस्ता कला विशेष रूप से बीकानेर से जुड़ी है। इस कला में ऊँट की खाल पर सोने और रंगों से नक्काशी एवं चित्रण किया जाता है। इसके विकास हेतु 1975 में राजस्थान लघु उद्योग निगम द्वारा बीकानेर में उस्ता कैमल हाइड ट्रेनिंग केन्द्र स्थापित किया गया। यह कला बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है।

154. लच्छीराम, घनश्याम, कैलाश शर्मा, नरोतम शर्मा व विठ्ठलदास शर्मा का सम्बन्ध किस हस्तकला से है?

  • (A) मसुरिया साड़ी
  • (B) पिछवाई निर्माण
  • (C) दाबू प्रिन्ट
  • (D) पोकरण पॉटरी

ये सभी कलाकार पिछवाई चित्रकला से जुड़े हुए हैं। पिछवाई विशेष रूप से नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर से जुड़ी है, जिसमें भगवान कृष्ण के जीवन से संबंधित प्रसंग चित्रित किए जाते हैं। इन कलाकारों ने इस कला को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

155. भौगोलिक चिन्हीकरण (GI Tag) प्राप्त करने वाली राजस्थान की प्रथम हस्तकला है?

  • (A) पोकरण पॉटरी
  • (B) बगरू प्रिन्ट
  • (C) कोटा डोरिया
  • (D) जयपुर की ब्ल्यू पॉटरी

कोटा डोरिया साड़ी राजस्थान की पहली हस्तकला है जिसे GI Tag प्राप्त हुआ। इसे वर्ष 2006 में उत्पाद के लिए और 2011 में लोगो के लिए GI Tag दिया गया। इसकी खासियत इसकी जालीदार बुनाई है, जो हल्की और आरामदायक होती है।

156. फड़ चित्रण में सिद्धहस्त है-

  • (A) शाहपुरा का जोशी परिवार
  • (B) प्रतापगढ़ का सोनी परिवार
  • (C) जयपुर का शेखावत परिवार
  • (D) नाथद्वारा का जांगिड़ परिवार

फड़ चित्रण में शाहपुरा का जोशी परिवार विशेष रूप से प्रसिद्ध है। फड़ एक चलित मंदिर के रूप में कपड़े पर पौराणिक कथाओं और देवताओं की झांकी प्रस्तुत करता है। यह कला धार्मिक अनुष्ठानों और मेलों में कहानी कहने की परंपरा से जुड़ी हुई है। जोशी परिवार ने पीढ़ियों तक इस कला को जीवित रखा और इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

157. प्रतापगढ़ का सोनी परिवार प्रसिद्ध है -

  • (A) मीनाकारी के लिए
  • (B) मुरादाबादी के कार्य के लिए
  • (C) थेवा कला के लिए
  • (D) कोफ्तगिरी के लिए

प्रतापगढ़ का सोनी परिवार विशेष रूप से थेवा कला के लिए प्रसिद्ध है। थेवा कला में रंगीन काँच पर सोने और चाँदी की नक्काशी करके सुंदर चित्र बनाए जाते हैं। इसमें बेल्जियम के रंगीन काँच का प्रयोग किया जाता है। यह कला मीनाकारी का ही एक प्रकार है लेकिन इसका स्वरूप अलग और अनूठा है। आज यह कला प्रतापगढ़ की पहचान बन चुकी है।

158. निम्न में से किस कलाकार का सम्बन्ध ब्ल्यू पॉटरी से नहीं है?

  • (A) कृपाल सिंह शेखावत
  • (B) नायी बाई
  • (C) गोपाल सैनी
  • (D) रामकिशोर छीपा

रामकिशोर छीपा बगरू प्रिन्ट के प्रसिद्ध कलाकार हैं। जबकि कृपाल सिंह शेखावत, नायी बाई और गोपाल सैनी का संबंध ब्ल्यू पॉटरी से है। इस प्रकार सही उत्तर रामकिशोर छीपा है।

159. मांगीलाल मिस्त्री व द्वारिका प्रसाद जाँगिड़ किस कला के प्रसिद्ध कलाकार हैं?

  • (A) कोटा डोरिया
  • (B) पिछवाई निर्माण
  • (C) कावड़ निर्माण
  • (D) थेवा कला

मांगीलाल मिस्त्री और द्वारिका प्रसाद जाँगिड़ कावड़ निर्माण के प्रसिद्ध कलाकार हैं। कावड़ लकड़ी से बनी चल-देवालय जैसी कलाकृति होती है, जिसमें देवी-देवताओं के चित्र अंकित रहते हैं। इसे धार्मिक अनुष्ठानों और कथाओं में प्रयोग किया जाता है।

160. महेशराज सोनी, राजेन्द्र कुमार सोनी व गिरीश कुमार सोनी का सम्बन्ध किस हस्तकला से है?

  • (A) थेवा कला
  • (B) फड़ निर्माण
  • (C) बगरू प्रिन्ट
  • (D) टेराकोटा कला

प्रतापगढ़ का सोनी परिवार थेवा कला के लिए प्रसिद्ध है। महेशराज सोनी, राजेन्द्र कुमार सोनी और गिरीश कुमार सोनी इसी परिवार से हैं, जिन्हें इस कला के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है।

राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7 | Part 8 | Part 9 | Part 10 | Part 11 | Part 12 | Part 13

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