राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ Questions with Answers

राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ (Handicrafts of Rajasthan) – Part 9

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की हस्तकलाएँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में ब्ल्यू पॉटरी, सुनहरी पॉटरी, बगरू प्रिन्ट, लहरिया, पाव रजाई, कोटा डोरिया, मीनाकारी, सांगानेरी प्रिन्ट, कुन्दन कला आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान की हस्तकलाएँ
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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161. मिट्टी की कलाकृतियों के प्रसिद्ध कलाकार फतेहराम का सम्बन्ध किस जिले से है?

  • (A) जयपुर
  • (B) अलवर
  • (C) बीकानेर
  • (D) बाड़मेर

फतेहराम अलवर जिले के प्रसिद्ध कलाकार थे, जो मिट्टी की कलाकृतियों के लिए जाने जाते थे। उनकी बनाई मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ राजस्थान की पारंपरिक कला और संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती थीं।

162. बस्सी (चित्तौड़गढ़) की काष्ठ कला के जन्मदाता किसे माना जाता है?

  • (A) प्रभात जी सुथार
  • (B) लच्छीराम
  • (C) मोहनलाल कुम्हार
  • (D) नरोतम शर्मा

बस्सी (चित्तौड़गढ़) की काष्ठ कला के जन्मदाता प्रभात जी सुथार माने जाते हैं। उन्होंने इस कला को नई पहचान दी और इसे पारंपरिक धार्मिक एवं सामाजिक जीवन से जोड़ा। आज बस्सी काष्ठ कला के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।

163. डूंगरपुर का कौनसा गाँव अपनी काष्ठ कला के लिए प्रसिद्ध है?

  • (A) गलियाकोट
  • (B) जेठाना
  • (C) बेणेश्वर
  • (D) साबला

जेठाना गाँव (डूंगरपुर) अपनी काष्ठ कला के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ लकड़ी से बनी कलाकृतियाँ और सजावटी वस्तुएँ तैयार की जाती हैं। यह गाँव पारंपरिक शिल्प को संजोए हुए है और आज भी इसकी पहचान बनी हुई है।

164. राजस्थान का कौनसा मंदिर 'केले के पत्तों की सांझी' के लिए प्रसिद्ध है?

  • (A) रामदेव जी मंदिर (रूणेचा)
  • (B) महावीर जी मंदिर (करौली)
  • (C) श्रीनाथ जी मंदिर (नाथद्वारा)
  • (D) मेहन्दीपुर बालाजी (दौसा)

नाथद्वारा का श्रीनाथजी मंदिर 'केले के पत्तों की सांझी' के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की रात्रियों में सांझी पूजन का विशेष महत्व है। इसमें केले के पत्तों और फूलों से आकृतियाँ बनाकर सजावट की जाती है।

165. कृपालसिंह शेखावत को ब्ल्यू पॉटरी कला के लिए 'पद्मश्री' सम्मान किस वर्ष दिया गया था?

  • (A) 1982
  • (B) 1968
  • (C) 1979
  • (D) 1974

कृपालसिंह शेखावत को ब्ल्यू पॉटरी कला के लिए 1974 में पद्मश्री सम्मान दिया गया था। उन्होंने इस कला को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई। उनकी बनाई कलाकृतियाँ संग्रहालयों और प्रदर्शनियों में प्रदर्शित की गईं और आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

166. सुनहरी पॉटरी' के लिए प्रसिद्ध स्थान है?

  • (A) जैसलमेर
  • (B) बाड़मेर
  • (C) बीकानेर
  • (D) उदयपुर

बीकानेर सुनहरी पॉटरी के लिए प्रसिद्ध है। इसमें बर्तनों पर स्वर्णिम (गोल्डन) चित्रकारी की जाती है। यह कला उस्ता कला का ही विकसित रूप है, जिसे बाद में बर्तनों पर लागू किया गया। इसकी आकर्षक सजावट के कारण इसे विशेष पहचान मिली।

167. कोहनीदार, जालदार, खत, पंचलड़ी व पाटली आदि किसके प्रकार हैं?

  • (A) बगरू प्रिन्ट
  • (B) लहरिया
  • (C) पाव रजाई
  • (D) कोटा डोरिया

कोहनीदार, जालदार, खत, पंचलड़ी और पाटली लहरिया के विभिन्न प्रकार हैं। लहरिया राजस्थान की प्रसिद्ध बंधेज कला है, जिसमें कपड़े पर तिरछी या सीधी धारियाँ बनाई जाती हैं। यह विशेष रूप से सावन और भादो में महिलाओं द्वारा पहना जाता है।

168. कोटा डोरिया या मसूरिया मलमल साड़ी निर्माण का प्रमुख केन्द्र है?

  • (A) कैथून (कोटा)
  • (B) जोबनेर (जयपुर)
  • (C) नाथद्वारा (राजसमंद)
  • (D) सांगानेर (जयपुर)

कोटा डोरिया या मसूरिया मलमल साड़ी निर्माण का प्रमुख केंद्र कैथून (कोटा) है। यहाँ की महिलाएँ और कारीगर बारीक धागों से हल्की और मजबूत कपड़े की साड़ियाँ बनाते हैं। इसे ‘राजस्थान की बनारसी साड़ी’ भी कहा जाता है।

169. राजस्थान के किस क्षेत्र का 'पीला पोमचा' प्रसिद्ध है?

  • (A) मेवात
  • (B) मेवाड़
  • (C) मारवाड़
  • (D) शेखावाटी

शेखावाटी क्षेत्र का 'पीला पोमचा' विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह ओढ़नी महिलाओं द्वारा खास अवसरों पर पहनी जाती है। पीला रंग शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, इसलिए बेटे के जन्म जैसे मांगलिक अवसरों पर इसका उपयोग होता है।

170. जोधपुर के वे कलाकार, जो स्वर्णिम नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं?

  • (A) डूंगर सिंह भाटी
  • (B) लाल सिंह भाटी
  • (C) गोपाल सैनी
  • (D) अर्जुनलाल प्रजापति

जोधपुर के लाल सिंह भाटी स्वर्णिम नक्काशी के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। उन्होंने लकड़ी और धातु पर स्वर्णिम नक़्क़ाशी का बेहतरीन काम किया और राजस्थान की इस पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

171. जयपुर की मीनाकारी में मुख्यतः कौनसे रंगों का प्रयोग होता है?

  • (A) लाल व हरा
  • (B) पीला व नीला
  • (C) कत्थई व भूरा
  • (D) नीला व गुलाबी

जयपुर की मीनाकारी में मुख्यतः लाल और हरे रंग का प्रयोग होता है। यह कला सोने, चाँदी और ताँबे पर की जाती है। रंगीन मीनाकारी वाले आभूषण और सजावटी वस्तुएँ जयपुर की शिल्पकला की विशेष पहचान हैं।

172. पीतल पर मीनाकारी का कार्य मुख्यतः कहाँ पर होता है?

  • (A) उदयपुर व भीनमाल
  • (B) बीकानेर व बाड़मेर
  • (C) जयपुर व अलवर
  • (D) कोटा व भरतपुर

पीतल पर मीनाकारी का कार्य जयपुर और अलवर में प्रमुख रूप से होता है। यहाँ कारीगर पीतल के बर्तनों और आभूषणों पर रंगीन मीनाकारी करके उन्हें सुंदर रूप देते हैं। यह कला इन दोनों शहरों की विशेष पहचान है।

173. भीलवाड़ा

  • (A) 1234
  • (B) 4321
  • (C) 1243
  • (D) 3412

मीनाकारी के विभिन्न स्वरूप अलग-अलग स्थानों से जुड़े हैं –

174. सफेद चलवां, लाल जमीन, बूंद तिला / शबनम व तैयारी आदि किस हस्तकला के प्रकार हैं?

  • (A) ब्ल्यू पॉटरी
  • (B) मीनाकारी
  • (C) सांगानेरी प्रिन्ट
  • (D) कुन्दन कला

मीनाकारी के प्रमुख चार प्रकार माने जाते हैं – सफेद चलवां, लाल जमीन, बूंद तिला/शबनम और तैयारी। इनमें सफेद चलवां सबसे कठिन माना जाता है जबकि तैयारी अपेक्षाकृत सरल होती है। मीनाकारी की यह विविधता राजस्थान की शिल्पकला की सुंदरता को दर्शाती है।

175. सांगानेरी प्रिन्ट कला का सर्वाधिक विकास किस शासक के काल में हुआ?

  • (A) सवाई जयसिंह
  • (B) मानसिंह प्रथम
  • (C) माधोसिंह द्वितीय
  • (D) ईश्वरी सिंह

सांगानेरी प्रिन्ट कला का सर्वाधिक विकास सवाई जयसिंह के काल में हुआ। उनके संरक्षण में सांगानेर (जयपुर) के छींपा समाज के कलाकारों ने प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के ठप्पों से छपाई की कला को नई पहचान दी। इस काल में यह कला देश और विदेश तक पहुँची।

176. सांगानेरी हैन्डब्लॉक प्रिन्ट को भौगोलिक चिन्हीकरण (GI Tag) किस वर्ष दिया गया?

  • (A) 2008
  • (B) 2010
  • (C) 2012
  • (D) 2014

सांगानेरी हैंडब्लॉक प्रिन्ट को वर्ष 2010 में GI Tag प्रदान किया गया। यह प्रिंट प्राकृतिक रंगों और बारीक फूल-पत्तियों की आकृतियों के लिए प्रसिद्ध है। इस कला ने राजस्थान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

177. तबक या वर्क का निर्माण करने वाले कारीगर कहलाते हैं?

  • (A) लखारा
  • (B) खेरादी
  • (C) भिश्ती
  • (D) पन्नीगर

तबाक या वर्क का निर्माण करने वाले कारीगर पन्नीगर कहलाते हैं। यह चाँदी या सोने के वर्क को पतली परत में बदलने का कार्य करते हैं, जिसका प्रयोग मिठाइयों और अन्य वस्तुओं में सजावट हेतु होता है।

178. बगरू प्रिन्ट के किस प्रसिद्ध कलाकार को 2009 में 'पद्मश्री' सम्मान दिया गया?

  • (A) रामकिशोर छींपा
  • (B) मोहम्मद यासीन छौंपा
  • (C) पीरदान सिंह भाटी
  • (D) चौथमल

रामकिशोर छींपा को बगरू प्रिन्ट की परंपरा को जीवित रखने और इसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनका योगदान इस पारंपरिक कला के संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

179. पीतल के बर्तनों पर मुरादाबादी काम के लिए कौनसा स्थान प्रसिद्ध है?

  • (A) जोधपुर
  • (B) बीकानेर
  • (C) जयपुर
  • (D) भीलवाड़ा

जयपुर मुरादाबादी काम के लिए प्रसिद्ध है। इसमें पीतल के बर्तनों पर बारीक नक्काशी और डिज़ाइन बनाई जाती है। जयपुर के कलाकार इस कला के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुके हैं।

180. सांगानेरी प्रिन्ट को विश्व बाजार में पहुँचाने का श्रेय किसे दिया जाता है?

  • (A) अब्दुल रज्जाक कुरैशी
  • (B) मुन्नालाल गोयल
  • (C) देवीलाल सामर
  • (D) यासीन छींपा

सांगानेरी प्रिन्ट को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाने का श्रेय मुन्नालाल गोयल को दिया जाता है। उन्होंने इस कला के प्रोत्साहन के लिए कार्य किया और इसे विदेशों के बाजार में पहुँचाया। इससे सांगानेरी प्रिंट की ख्याति विश्वभर में फैली।

राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7 | Part 8 | Part 9 | Part 10 | Part 11 | Part 12 | Part 13

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