राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ | Rajasthan Handicrafts Questions
राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ | Rajasthan Handicrafts Questions
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक
राजस्थान की हस्तकलाएँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण
MCQ
प्रश्न दिए गए हैं, जो राजस्थान की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी हैं।
इन प्रश्नों में तेरह ताली नृत्य, गवरी लोक नृत्य, कच्छीघोड़ी, बम नृत्य, घूमर आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ
RPSC,
RSMSSB,
RSSB,
REET, Patwar, Police, LDC, Teacher तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए
अत्यंत उपयोगी हैं। प्रत्येक प्रश्न के साथ सही उत्तर और explanation दिया गया है,
जिससे आपकी
Rajasthan GK
की तैयारी और मजबूत होगी।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की हस्तकलाएँ
- कुल प्रश्न: 20
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1. गवरी लोक नृत्य मूल से ……… जनजाति का लोकनृत्य है।
गवरी लोक नृत्य मुख्यतः भील जनजाति का पारंपरिक नृत्य है। यह नृत्य वास्तव में एक लोक नाट्य है, जिसमें भगवान शिव और पार्वती के प्रतीकात्मक रूपों की प्रस्तुति होती है। नृत्य के दौरान इसे राई गवरी कहा जाता है। इसे राजस्थान का सबसे प्राचीन लोकनाट्य माना जाता है और इसे “लोकनाट्य का मेरू नाट्य” भी कहते हैं। इसकी प्रस्तुति विशेष अवसरों पर की जाती है और दिनभर चलता है।
2. नृत्य शैली, जो गरासिया जनजाति से सम्बन्धित नहीं है?
गरासिया जनजाति के प्रमुख नृत्यों में मांदल, वालर (गरासिया घूमर) और लूर नृत्य शामिल हैं। ये नृत्य मुख्य रूप से उत्सव, मेले और विवाह अवसरों पर किए जाते हैं। गवरी नृत्य हालांकि राजस्थान का प्रसिद्ध लोकनाट्य है, लेकिन यह विशेष रूप से भील जनजाति से जुड़ा हुआ है, न कि गरासिया जनजाति से। इसी कारण विकल्प C सही उत्तर है।
3. भीलों द्वारा विवाह के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य क्या है?
हाथिमना नृत्य भील जनजाति का प्रमुख विवाह नृत्य है। इसे विवाह अवसरों पर पुरुष घुटनों के बल बैठकर प्रस्तुत करते हैं। यह नृत्य भीलों की संस्कृति और सामाजिक परंपरा को दर्शाता है। हाथिमना नृत्य में उनके जीवन की सरलता, उत्साह और सामूहिकता स्पष्ट झलकती है। इसी वजह से इसे भीलों का जातीय लोकनृत्य माना जाता है।
4. राजस्थान में निम्न में से कौन सा नृत्य केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है?
कच्छी घोड़ी नृत्य राजस्थान का एक विशेष पुरुष प्रधान नृत्य है। इसमें कलाकार नकली घोड़े के परिधान पहनकर वीर रस से भरपूर प्रस्तुति देते हैं। यह नृत्य शेखावटी, कुचामन, परबतसर और डीडवाना क्षेत्रों में विवाह अवसर पर अधिक लोकप्रिय है। इसमें ढोल, थाली और झांझ जैसे वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है और इसके गीतों में वीरता और हास्य का मिश्रण होता है।
5. घुड़ला नामक नृत्यशैली का सम्बन्ध निम्न में से राजस्थान के किस शहर में है?
घुड़ला नृत्य राजस्थान के जोधपुर क्षेत्र का स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला प्रमुख नृत्य है। इस नृत्य में महिलाएं सुंदर श्रृंगार कर मटकों को सिर पर रखकर गोल घेरे में नृत्य करती हैं। मटकों में छिद्र होते हैं जिनमें दीपक जलता है। इन मटकों को ही घुड़ला कहा जाता है। यह नृत्य विशेष रूप से उत्सव और तीज-त्योहारों पर किया जाता है और इसे स्त्री प्रधान नृत्य माना जाता है।
6. विभिन्न नृत्य रूपों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें, इनमें से कौन सा कथन असत्य है?
राई और बुढ़िया पात्र कालबेलिया नृत्य से नहीं, बल्कि गवरी नाट्य से जुड़े हुए हैं, जो भील जनजाति का नृत्य है। कालबेलिया नृत्य सपेरों की संस्कृति से संबंधित है और इसे 2010 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल किया गया। अन्य विकल्प सही हैं – गीदड़ नृत्य शेखावटी क्षेत्र से है, कच्छी घोड़ी नकली घोड़ों पर आधारित है, और तेरहताली कामड़ जनजाति की महिलाओं का प्रसिद्ध नृत्य है।
7. नारों का स्वांग प्रसिद्ध है?
नारों का स्वांग, जिसे नाहर नृत्य भी कहा जाता है, राजस्थान के भीलवाड़ा जिले (मांडल क्षेत्र) में प्रसिद्ध है। यह नृत्य होली के 13 दिन बाद किया जाता है। इसकी परंपरा मुगल सम्राट शाहजहाँ के काल से जुड़ी हुई है। इसमें लोकगाथाओं और ऐतिहासिक घटनाओं का चित्रण स्वांग और नृत्य के माध्यम से किया जाता है। यह भीलवाड़ा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।
8. निम्नलिखित में से कौन सा एक सहरिया जनजाति द्वारा नहीं किया जाता है?
सहरिया जनजाति के प्रमुख नृत्यों में झेला नृत्य, सांग नृत्य, लहंगी नृत्य, इंद्रपरी नृत्य और शिकारी नृत्य शामिल हैं। ये नृत्य प्रायः विवाह, उत्सव और धार्मिक अवसरों पर किए जाते हैं। लेकिन द्विचक्री नृत्य सहरिया जनजाति का नहीं, बल्कि भील जनजाति का पारंपरिक विवाह नृत्य है, जिसमें युगल घुटनों के बल बैठकर प्रस्तुति देते हैं। इसलिए विकल्प D सही है।
9. मुगल सम्राट शाहजहाँ के समय से ही प्रसिद्ध “नाहर नृत्य” की खेलने की परम्परा कहाँ प्रचलित है?
नाहर नृत्य की परंपरा राजस्थान के माण्डल (भीलवाड़ा) क्षेत्र में प्रचलित है। कहा जाता है कि मुगल सम्राट शाहजहाँ के मेवाड़ आगमन पर इस नृत्य की शुरुआत हुई। यह नृत्य मुख्य रूप से होली के समय किया जाता है और इसमें लोक कलाकार विशेष पात्रों का अभिनय कर इतिहास और समाज से जुड़े प्रसंग प्रस्तुत करते हैं। इसकी सांस्कृतिक जड़ें गहरी हैं।
10. ‘बिंदौरी’ कहां का प्रमुख लोक नृत्य है?
बिंदौरी नृत्य राजस्थान के झालावाड़ क्षेत्र का प्रसिद्ध लोकनृत्य है। इसे विशेष रूप से होली और विवाह अवसरों पर किया जाता है। यह सामूहिक नृत्य है जिसमें ग्रामीण जनजीवन और सामाजिक परंपराओं की झलक मिलती है। राजस्थान के अन्य क्षेत्रों में अलग-अलग नृत्य प्रसिद्ध हैं – किशनगढ़ में चरी नृत्य, जोधपुर में घुड़ला नृत्य, और जयपुर में तमाशा नृत्य।
11. निम्न कथनों पर विचार करें। नीचे दिए गए कथनों में से सत्य कथन का चयन करें।(i) गर्गीदड़ नृत्य शेखावाटी क्षेत्र में होली के अवसर पर किया जाता है।(ii) भवाई नृत्य के प्रवर्तक बाघा जी थे।(iii) गैर नृत्य शेखावाटी क्षेत्र का लोक नृत्य है।(iv) हरणी नृत्य दीपावली के अवसर पर बच्चों द्वारा किया जाता है।कूट :
गैर नृत्य शेखावाटी क्षेत्र का नहीं है, बल्कि यह मेवाड़ और बाड़मेर का प्रसिद्ध नृत्य है। यह नृत्य होली के दूसरे दिन से शुरू होकर लगभग 15 दिनों तक किया जाता है और इसमें पुरुष गोल घेरे में लकड़ी की छड़ियां लेकर नृत्य करते हैं। बाकी कथन – गर्गीदड़ नृत्य शेखावाटी का है, भवाई नृत्य के प्रवर्तक बाघा जी थे और हरणी नृत्य दीपावली पर बच्चों द्वारा किया जाता है – सही हैं।
12. कालबेलियों का सबसे अधिक आकर्षक प्रेम आधारित युगल नृत्य कौन सा है?
कालबेलियों का सबसे आकर्षक प्रेम आधारित युगल नृत्य “शंकरिया” कहलाता है। इसमें स्त्री–पुरुष जोड़े मिलकर प्रेम और श्रृंगार भावनाओं को प्रस्तुत करते हैं। इस नृत्य में लचकदार गतियों और लयबद्ध ताल का विशेष महत्व है। शंकरिया नृत्य कालबेलिया संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है और इसे राजस्थान में विशेष पहचान मिली है।
13. अलवर, डीग व भरतपुर जिलों में फाल्गुन की मस्ती में नगाड़ों के साथ किये जाने वाले नृत्य का नाम क्या है?
अलवर, डीग और भरतपुर जिलों में फाल्गुन माह की उमंग में किया जाने वाला प्रमुख नृत्य बम नृत्य है। यह नगाड़ों और ढोल की थाप पर किया जाता है। इस नृत्य में स्थानीय लोग उत्साह और उल्लास के साथ भाग लेते हैं। बम नृत्य राजस्थान की ब्रज संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है।
14. निम्न में से कौन-सा वाद्ययंत्र राजस्थान के तेरहताली नृत्य में प्रयोग में नहीं आता?
तेरहताली नृत्य में मुख्य रूप से मंजीरा, तानपुरा और चौतारा जैसे वाद्ययंत्र प्रयोग होते हैं। इसे कामड़ जनजाति की महिलाएं करती हैं। इस नृत्य की खासियत यह है कि नर्तकाएं अपने शरीर से मंजीरे बांधकर ताल के साथ नृत्य करती हैं। लेकिन डेरु वाद्ययंत्र इसमें प्रयोग नहीं किया जाता।
15. निम्नलिखित नृत्यों में से किस नृत्य में केवल स्त्रियाँ भाग लेती हैं?
लूम्बर नृत्य जालौर क्षेत्र का महिला प्रधान नृत्य है। यह नृत्य विशेष रूप से होली पर किया जाता है और इसमें केवल महिलाएं भाग लेती हैं। इसमें महिलाएं गोल घेरे में खड़ी होकर गीत गाते हुए सुंदर गतियों से नृत्य करती हैं। अन्य नृत्यों जैसे कच्छीघोड़ी और गैर नृत्य पुरुष प्रधान होते हैं, जबकि मोरिया नृत्य सामूहिक रूप से किया जाता है।
16. किस नृत्य के दौरान लसकरिया, बींद, रसाला व रंगमारिया गीत गाये जाते हैं?
कच्छी घोड़ी नृत्य के दौरान लसकरिया, बींद, रसाला और रंगमारिया जैसे गीत गाए जाते हैं। यह नृत्य शेखावटी और आसपास के क्षेत्रों में लोकप्रिय है और विशेष रूप से विवाह अवसर पर प्रस्तुत किया जाता है। पुरुष नकली घोड़े की वेशभूषा में वीर रस से भरपूर नृत्य करते हैं।
17. निम्न में से वह नृत्य, जो केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है?
राजस्थान का कच्छी घोड़ी नृत्य केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है। इसमें कलाकार नकली घोड़े का परिधान पहनकर वीरता से भरपूर नृत्य करते हैं। यह मुख्य रूप से विवाह और मेलों में प्रस्तुत होता है। इसमें ढोल और थाली जैसे वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है। घूमर और तेरहताली स्त्रियों द्वारा किए जाते हैं, जबकि कत्थक शास्त्रीय नृत्य है जिसमें दोनों भाग ले सकते हैं।
18. निम्नलिखित में से कौन सा लोकनृत्य गुर्जर समुदाय से संबंधित है?
चरी नृत्य गुर्जर समुदाय से संबंधित है। इसमें महिलाएं सिर पर कलश रखकर नृत्य करती हैं। इस कलश में कपास के बीज और तेल डालकर उसमें आग जलायी जाती है। इस अद्भुत दृश्य में स्त्रियां लयबद्ध ताल और गीतों के साथ नृत्य करती हैं। यह नृत्य विशेष अवसरों और पर्व-त्योहारों पर किया जाता है और राजस्थान की संस्कृति की पहचान है।
19. निम्न में से कौनसा युग्म सही सुमेलित है?लोक नृत्य – जाति
मावलिया नृत्य कथौड़ी जाति का प्रमुख नृत्य है। यह नवरात्रों में 9 दिनों तक किया जाता है। इसमें कथौड़ी समुदाय के लोग समूह बनाकर ढोलक और बांसुरी के साथ देवी-देवताओं के गीत गाते हैं और गोल घेरे में नृत्य करते हैं। अन्य युग्म गलत हैं क्योंकि नेजा नृत्य भीलों से, चरी नृत्य गुर्जरों से और वालर नृत्य गरासिया जनजाति से संबंधित है।
20. निम्न में से कौन-सा गरासिया जनजाति से सम्बन्धित नृत्य है?
वालर नृत्य गरासिया जनजाति से संबंधित है। इसे सिरोही जिले में स्त्री–पुरुष बिना वाद्ययंत्र के गोल घेरे में नृत्य करते हैं। इसे गरासिया घूमरभी कहा जाता है। यह नृत्य मेलों और विवाह अवसर पर किया जाता है। अन्य विकल्प – घुड़ला (जोधपुर), गैर (मेवाड़-बाड़मेर) और गवरी (भील जनजाति) से जुड़े हैं।
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