राजस्थान की जनजातियाँ (Tribes of Rajasthan) MCQ – Part 1
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की जनजातियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें भील, गरासिया, मीणा, सांसी, डामोर, कंजर, सहरिया जनजाति आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की जनजातियाँ
- Question: 1 से 20
- Last Updated:
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1. राजस्थान की कौनसी जनजाति भारत सरकार द्वारा आदिम जनजाति समूह में शामिल है?
- (A) भील
- (B) सहरिया
- (C) गरासिया
- (D) मीणा
सहरिया जनजाति राजस्थान की एकमात्र जनजाति है जिसे आदिम जनजाति समूह (PVTG) में शामिल किया गया है। यह समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर माना जाता है और इनके विकास के लिए विशेष योजनाएँ चलाई जाती हैं। सहरिया जनजाति मुख्य रूप से जंगल क्षेत्रों में निवास करती है।
2. राजस्थान के किस जिले में सहरिया जनजाति केन्द्रित है?
- (A) सिरोही
- (B) डूंगरपुर-बांसवाड़ा
- (C) उदयपुर-चित्तौड़गढ़
- (D) बारां
सहरिया जनजाति मुख्य रूप से बारां जिले में केंद्रित है, खासकर शाहबाद और किशनगंज तहसीलों में। यह राजस्थान की आदिम जनजाति मानी जाती है। कुछ आबादी कोटा और झालावाड़ जिलों में भी पाई जाती है। बारां क्षेत्र इनकी संस्कृति और सामाजिक जीवन का मुख्य केंद्र है।
3. राजस्थान में किस तहसील में सहरिया जनजाति का घनत्व अधिकतम है?
- (A) धरियाबाद
- (B) किशनगंज
- (C) छबरा
- (D) मांगरोल
सहरिया जनजाति का घनत्व बारां जिले की किशनगंज तहसील में सबसे अधिक पाया जाता है। यह क्षेत्र उनकी पारंपरिक बसावट का प्रमुख केंद्र है। सहरिया समुदाय वाल्मीकि को अपना आदि गुरु मानता है और सीताबाड़ी मेला इनके लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
4. डामोर जनजाति का मुख्य व्यवसाय क्या है?
- (A) खेती करना
- (B) शिकार
- (C) फल इकट्ठा करना
- (D) मछली पालन
डामोर जनजाति का मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन है। यह समुदाय मुख्य रूप से दक्षिणी राजस्थान में पाया जाता है। पुरुषों द्वारा आभूषण पहनना इसकी विशेष सांस्कृतिक पहचान है। खेती पर आधारित जीवनशैली के कारण ये लोग ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रूप से बसे हुए मिलते हैं।
5. धारी संस्कार राजस्थान की किस जनजाति में प्रचलित है?
- (A) गरासिया
- (B) मीणा
- (C) सहरिया
- (D) भील
धारी संस्कार सहरिया जनजाति में प्रचलित एक विशेष परंपरा है। इसमें मृतक की राख और अस्थियाँ आंगन में रखकर संकेत देखे जाते हैं और बाद में कपिलधारा में प्रवाहित की जाती हैं। यह संस्कार पुनर्जन्म की मान्यता और धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है।
6. हेलरू संस्था संबद्ध है –
- (A) गरासिया
- (B) सहरिया
- (C) भील
- (D) मीणा
हेलरू गरासिया जनजाति की सहकारी संस्था मानी जाती है। यह सामूहिक सहयोग और सामाजिक कार्यों से जुड़ी व्यवस्था है। गरासिया समाज में सामूहिक कृषि और सामाजिक सहयोग की परंपराएँ मजबूत हैं, जो उनकी सामुदायिक जीवनशैली को दर्शाती हैं।
7. ‘फाइरे-फाइरे’ किस जनजाति का रणघोष है?
- (A) भील
- (B) गरासिया
- (C) डामोर
- (D) मीणा
‘फाइरे-फाइरे’ भील जनजाति का रणघोष है। संकट या आपदा के समय यह पुकार देकर समुदाय के लोग तीर-कमान लेकर एकत्र हो जाते थे। यह उनकी एकता और सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का प्रतीक है, जो पारंपरिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
8. गरासिया जनजाति में गांव के मुखिया को क्या कहा जाता है?
- (A) तदवी
- (B) सहलोत
- (C) मुखी
- (D) पटेल
गरासिया जनजाति में गांव के मुखिया को सहलोत कहा जाता है। यह व्यक्ति सामाजिक निर्णय लेने और समुदाय का नेतृत्व करने का कार्य करता है। अलग-अलग जनजातियों में मुखिया के नाम अलग होते हैं, जैसे डामोर में मुखी और भील में गमेती।
9. कनजारा-खाड़लिया भूत लोकनाट्य किस जनजाति का प्रसिद्ध है?
- (A) गरासिया
- (B) भील
- (C) मीणा
- (D) सहरिया
कनजारा-खाड़लिया लोकनाट्य भील जनजाति की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। भील समुदाय में लोकनाट्य, नृत्य और गीतों के माध्यम से परंपराएं पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। यह लोकनाट्य धार्मिक विश्वास, लोककथाओं और सामाजिक संदेशों को प्रस्तुत करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इसे उत्सवों और विशेष अवसरों पर किया जाता है।
10. राजस्थान में सर्वाधिक मीणा जाति के लोग कहाँ निवास करते हैं?
- (A) जोधपुर
- (B) उदयपुर
- (C) जयपुर
- (D) बांरा
राजस्थान में मीणा जनजाति की आबादी सबसे अधिक उदयपुर जिले में पाई जाती है। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार उदयपुर के बाद जयपुर और प्रतापगढ़ में भी इनकी संख्या अधिक है। मीणा समाज कृषि और स्थानीय प्रशासनिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। उनकी सांस्कृतिक पहचान, लोकदेवताओं में आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाज राजस्थान की जनजातीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
11. मीणा जनजाति के प्रसिद्ध पाँच कबीलों को किस नाम से जाना जाता है?
- (A) पाँच सितारे
- (B) पंचलड़ा
- (C) पंचवाड़ा
- (D) पंचायत
मीणा जनजाति में कई उपसमूह या कबीले पाए जाते हैं, जिनमें पाँच प्रमुख कबीलों को सामूहिक रूप से पंचवाड़ा कहा जाता है। यह नाम उनके सामाजिक संगठन और पारंपरिक पहचान को दर्शाता है। इन कबीलों के माध्यम से विवाह, सामाजिक नियम और पारंपरिक व्यवस्थाएं तय की जाती हैं। मीणा समाज में यह व्यवस्था सामाजिक एकता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
12. ‘फला’ किसे कहते हैं?
- (A) भीलों के घरों का समूह
- (B) मीणाओं के घरों का समूह
- (C) आदिवासियों की महापंचायत
- (D) भीलों के कुल देवता
भील जनजाति में घरों के छोटे समूह को ‘फला’ कहा जाता है। यह सामान्यतः एक ही परिवार या रिश्तेदारी से जुड़े लोगों का निवास क्षेत्र होता है। फला सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण इकाई होती है, जहाँ लोग आपसी सहयोग और सामूहिक जीवन शैली का पालन करते हैं। ग्रामीण और वन क्षेत्रों में आज भी इस प्रकार की बसावट देखने को मिलती है।
13. मीणा का शाब्दिक अर्थ क्या है?
- (A) मछली
- (B) माँ
- (C) तीर चलाने वाला
- (D) जनजाति
‘मीणा’ शब्द का शाब्दिक अर्थ मछली माना जाता है। कई इतिहासकारों के अनुसार इसका संबंध प्राचीन मत्स्य जनपद से जोड़ा जाता है। इस जनजाति का इतिहास राजस्थान की प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ा हुआ है। मीणा समाज अपनी विशिष्ट संस्कृति, लोकदेवताओं और परंपराओं के कारण राजस्थान की प्रमुख जनजातियों में गिना जाता है।
14. भील जनजाति विवाह में मंडप की सजावट किस वृक्ष की पत्तियों से की जाती है?
- (A) नीम
- (B) अशोक
- (C) आम
- (D) बबूल
भील जनजाति विवाह के अवसर पर मंडप की सजावट आम के पत्तों से करती है। आम को शुभ माना जाता है और इसे मंगल कार्यों में उपयोग किया जाता है। विवाह समारोह में प्राकृतिक तत्वों का प्रयोग भील समाज की प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली को दर्शाता है।
15. भील जनजाति द्वारा पहाड़ी ढालों पर की जाने वाली स्थानांतरित कृषि कहलाती है?
- (A) दजिया
- (B) चिमाता
- (C) दिप्पा
- (D) दहिया
पहाड़ी ढालों पर की जाने वाली भीलों की स्थानांतरित कृषि को चिमाता कहा जाता है। इसमें जंगल साफ करके अस्थायी खेती की जाती है। यह पारंपरिक कृषि पद्धति प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार विकसित हुई है और जनजातीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
16. ‘बीजा’ व ‘माला’ किस जनजाति की शाखाएँ हैं?
- (A) सांसी
- (B) डामोर
- (C) सहरिया
- (D) कंजर
बीजा और माला सांसी जनजाति की दो प्रमुख उपशाखाएँ हैं। सांसी समुदाय को घुमक्कड़ और खानाबदोश प्रवृत्ति वाला माना जाता है। राजस्थान में यह समुदाय मुख्य रूप से भरतपुर और झुंझुनूं जिलों में पाया जाता है।
17. राजस्थान में सर्वाधिक प्रतिशत वाली जनजाति कौनसी है?
- (A) भील
- (B) मीणा
- (C) गरासिया
- (D) भील मीणा
मीणा जनजाति राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है और कुल जनजातीय आबादी में इसका प्रतिशत सबसे अधिक है। यह समुदाय मुख्य रूप से उदयपुर, जयपुर और प्रतापगढ़ क्षेत्रों में पाया जाता है। सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी मीणा जनजाति का महत्वपूर्ण स्थान है।
18. ‘धारी संस्कार’ किस आदिवासी जनजाति में प्रचलित है?
- (A) सहरिया
- (B) गरासिया
- (C) भील
- (D) मीणा
धारी या बेलपत्ती संस्कार सहरिया जनजाति की एक विशेष परंपरा है। इसमें मृतक की अस्थियाँ और राख कुछ समय तक आंगन में रखी जाती हैं और बनने वाले चिह्नों को अगले जन्म का संकेत माना जाता है। बाद में इन्हें पवित्र स्थान पर विसर्जित किया जाता है। यह संस्कार सहरिया समाज की धार्मिक मान्यताओं और पुनर्जन्म की आस्था को दर्शाता है।
19. निम्नलिखित में से कौनसा कथन राजस्थान की सहरिया जनजाति के बारे में सही नहीं है?
- (A) इनमें चौहान, डोडिया आदि गोत्र होते हैं।
- (B) सहरिया जादू-मंतर और देवी-देवताओं में विश्वास करते हैं।
- (C) सहरिया समुदाय में लट्ठमार होली की परंपरा प्रचलित है।
- (D) सहरिया जनजाति के मुखिया को तपाड़ा कहा जाता है।
सहरिया जनजाति राजस्थान की प्रमुख आदिम जनजातियों में से एक है। इनके समाज में गोत्र व्यवस्था, लोकदेवताओं में आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाज मिलते हैं। लेकिन “तपाड़ा” शब्द इनके मुखिया के लिए प्रचलित नहीं है, इसलिए यह कथन गलत माना जाता है। यह प्रश्न सहरिया जनजाति की सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक विशेषताओं की समझ को जांचता है।
20. ‘छेड़ा फाड़ना’ से संबंधित है?
- (A) आदिवासी जनजाति में तलाक की परम्परा
- (B) कपड़े का टुकड़ा करना
- (C) परिवार से अलग होना
- (D) युद्ध में मारे जाना
छेड़ा फाड़ना आदिवासी समाज में तलाक से जुड़ी एक पारंपरिक प्रथा है। इसमें पति-पत्नी के संबंध समाप्त होने का प्रतीकात्मक संकेत दिया जाता है। यह प्रक्रिया सामाजिक मान्यता के साथ की जाती है ताकि भविष्य में विवाद न हो। जनजातीय समाज में ऐसे रीति-रिवाज सामाजिक संतुलन और सामुदायिक सहमति बनाए रखने का माध्यम माने जाते हैं।
राजस्थान की जनजातियाँ MCQ – सभी भाग:
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