राजस्थान की जनजातियाँ (Tribes of Rajasthan) MCQ – Part 10
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की जनजातियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें भील, मीणा, सांसी, गरासिया, सहरिया, कथौड़ी आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की जनजातियाँ
- Question: 181 से 200
- Last Updated:
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181. मीणा जनजाति में लड़की के जन्म पर सुप और लड़के के जन्म पर क्या बजाई जाती है?
- (A) ढोल
- (B) थाली
- (C) नगाड़ा
- (D) डेरू
मीणा जनजाति में जन्म के अवसर पर अलग-अलग परंपराएँ निभाई जाती हैं। लड़की के जन्म पर सुप बजाया जाता है, जबकि लड़के के जन्म पर थाली बजाने की परंपरा है। यह रीति सामाजिक खुशी और उत्सव व्यक्त करने का तरीका माना जाता है।
182. निम्न में से असंगत कथन है –
- (A) टॉड ने भीलों को वनपुत्र कहा
- (B) रोने ने भीलों को गुजराती बताया
- (C) रिजले-क्रुक ने द्रविड़ मूल माना
- (D) थॉमसन ने भीली व्याकरण लिखी
रोने ने भीलों का मूल स्थान मारवाड़ बताया था, जबकि उन्हें गुजराती बताने का उल्लेख थॉमसन से जुड़ा है। इसलिए दूसरा कथन असंगत है। भीलों की उत्पत्ति और इतिहास पर विभिन्न विद्वानों ने अलग-अलग विचार दिए हैं, जो इस विषय को रोचक बनाते हैं।
183. ताराभांत, लहरभांत, केरीभांत व ज्वारभांत की ओढ़नी किस जनजाति में प्रचलित है?
- (A) भील
- (B) मीणा
- (C) गरासिया
- (D) सहरिया
भील महिलाओं में अलग-अलग डिजाइन वाली ओढ़नियाँ जैसे ताराभांत, लहरभांत, केरीभांत और ज्वारभांत प्रचलित हैं। ये वस्त्र उनकी सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक वेशभूषा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विशेष अवसरों और उत्सवों में इन्हें पहनने की परंपरा है।
184. भीलों की लोक देवी जिसका चित्रण विवाह के अवसर पर दीवारों पर किया जाता है?
- (A) होवण माता
- (B) खोड़ीयाल माता
- (C) नारायणी माता
- (D) भराड़ी माता
भराड़ी माता भील जनजाति की लोकदेवी मानी जाती हैं। विवाह के अवसर पर इनका चित्र दीवारों पर बनाया जाता है। यह परंपरा शुभता और देवी के आशीर्वाद का प्रतीक है। जनजातीय समाज में लोकदेवियों का विशेष स्थान होता है।
185. किस जनजाति में विवाह खर्च बचाने के लिए दुल्हन को दूल्हे के घर छोड़ दिया जाता है?
- (A) मीणा
- (B) भील
- (C) गरासिया
- (D) कंजर
गरासिया जनजाति में विवाह खर्च कम करने के लिए दुल्हन को सीधे दूल्हे के घर छोड़ देने की परंपरा मिलती है, जिसे मेलेबो कहा जाता है। यह समाज की सरल विवाह व्यवस्था को दर्शाता है। जनजातीय समाज में ऐसे व्यावहारिक रीति-रिवाज आम हैं।
186. आदिवासियों का कुम्भ किस मेले को कहते हैं?
- (A) बेणेश्वर मेला
- (B) आसापुरी माता
- (C) वाल्मिकी मेला
- (D) दशहरा मेला
बेणेश्वर मेला आदिवासियों का कुम्भ कहलाता है। यह डूंगरपुर जिले में माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होता है। भील सहित कई जनजातियाँ इसमें भाग लेती हैं। धार्मिक अनुष्ठान, लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।
187. मैदानी भागों में की जाने वाली ‘दजिया’ कृषि कौनसी जनजाति द्वारा की जाती है?
- (A) मीणा
- (B) सांसी
- (C) भील
- (D) कथौड़ी
दजिया कृषि भील जनजाति द्वारा की जाने वाली पारंपरिक खेती की पद्धति है। इसमें जंगल साफ कर खेती की जाती है। यह स्थानांतरित कृषि का एक रूप माना जाता है। भीलों का जीवन लंबे समय तक जंगल और कृषि पर आधारित रहा है, इसलिए ऐसी पद्धतियाँ विकसित हुईं।
188. गरासिया जनजाति में ‘मोर बन्धिया’ रीति रिवाज किस अवसर से जुड़ा है?
- (A) विवाह
- (B) सगाई
- (C) जन्म
- (D) तलाक
मोर बन्धिया गरासिया जनजाति की विवाह से जुड़ी एक प्रमुख परंपरा है। इसमें दूल्हा-दुल्हन के मौड़ बांधकर फेरे लिए जाते हैं और विवाह को सामाजिक मान्यता दी जाती है। गरासिया समाज में विवाह के कई प्रकार प्रचलित हैं जैसे ताणना, मेलेबो, खेवणा, सेवा और आटा-साटा। यह उनकी सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक विवाह व्यवस्था को दर्शाता है।
189. कथौड़ी जनजाति मुख्यतः किस जिले में पायी जाती है?
- (A) बाँसवाड़ा
- (B) उदयपुर
- (C) कोटा
- (D) डूंगरपुर
कथौड़ी जनजाति मुख्य रूप से उदयपुर जिले में पाई जाती है, खासकर झाड़ोल, कोटड़ा और सराड़ा क्षेत्रों में। इसके अलावा डूंगरपुर, बारां और झालावाड़ में भी इनकी उपस्थिति मिलती है। यह जनजाति मूलतः महाराष्ट्र से आई मानी जाती है। जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में इनकी संख्या कम है और सर्वाधिक आबादी उदयपुर में दर्ज की गई है।
190. मक्का राजस्थान की किस जनजाति का मुख्य भोजन है?
- (A) सांसी
- (B) भील
- (C) मीणा
- (D) सहरिया
भील जनजाति का मुख्य भोजन मक्का और प्याज माना जाता है। इनका जीवन कृषि, पशुपालन और वन उपज पर आधारित है। महुआ से बनी शराब और ताड़ का रस भी इनके खान-पान का हिस्सा है। स्थानीय संसाधनों पर आधारित यह भोजन उनकी पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति से जुड़े रहने को दर्शाता है।
191. भीलों द्वारा लड़की के विवाह के समय दीवार पर बनाये जाने वाले लोक देवी के चित्र को क्या कहा जाता है?
- (A) मांडना
- (B) भराड़ी
- (C) फड़
- (D) तहनिशा
भील जनजाति में विवाह के अवसर पर दीवारों पर लोक देवी भराड़ी का चित्र बनाया जाता है। इसे शुभ माना जाता है और विवाह की सफलता तथा देवी के आशीर्वाद का प्रतीक समझा जाता है। जनजातीय समाज में ऐसी चित्रकला धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा को व्यक्त करने का माध्यम होती है।
192. जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में अनुसूचित जनजाति का प्रतिशत सबसे कम किन जिलों में है?
- (A) बीकानेर और नागौर
- (B) नागौर और चूरू
- (C) चूरू और गंगानगर
- (D) बीकानेर और अजमेर
राजस्थान में जनजातीय आबादी का प्रतिशत सबसे कम बीकानेर और नागौर जिलों में पाया जाता है। ये क्षेत्र मुख्य रूप से मरुस्थलीय हैं, जहाँ वन और पहाड़ी क्षेत्र कम हैं। जनजातियाँ सामान्यतः दक्षिणी और वन क्षेत्रों में अधिक रहती हैं, इसलिए उत्तरी और पश्चिमी जिलों में उनका प्रतिशत कम मिलता है।
193. आदिवासियों में लीला मोरिया संस्कार किससे संबंधित है?
- (A) कन्यादान
- (B) विवाह
- (C) जन्म
- (D) मृत्यु
लीला मोरिया आदिवासी समाज में विवाह से संबंधित एक संस्कार है। यह विवाह प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है और सामाजिक स्वीकृति के साथ निभाया जाता है। जनजातीय समाज में विवाह से जुड़े अलग-अलग रीति-रिवाज पाए जाते हैं, जो उनकी सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को दर्शाते हैं।
194. ताणना एवं मोर बंधिया विवाह किस जनजाति में प्रचलित है?
- (A) मीणा
- (B) सांसी
- (C) भील
- (D) गरासिया
ताणना और मोर बंधिया विवाह गरासिया जनजाति की प्रमुख विवाह परंपराएँ हैं। मोर बंधिया में फेरे लेकर विवाह किया जाता है, जबकि ताणना में बिना सगाई और फेरों के सामाजिक सहमति से विवाह होता है। गरासिया समाज में मेलेबो, सेवा, आटा-साटा और खेवणा जैसे अन्य विवाह प्रकार भी प्रचलित हैं।
195. कर्नल टॉड के अनुसार मीणाओं का मूल निवास स्थान कौन सा था?
- (A) काली घाटी पर्वतमाला
- (B) मुकुन्दरा पर्वत
- (C) आबू पर्वतमाला
- (D) काली खोह पर्वतमाला
कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार मीणा जनजाति का मूल निवास स्थान काली खोह पर्वतमाला माना गया है। यह क्षेत्र अजमेर और आगरा के बीच बताया जाता है। इतिहासकारों के ऐसे उल्लेख जनजातियों की प्राचीन पृष्ठभूमि और उनके प्रवास को समझने में मदद करते हैं।
196. विश्व आदिवासी दिवस कब मनाया जाता है?
- (A) 8 अगस्त
- (B) 9 अगस्त
- (C) 10 अगस्त
- (D) 7 अगस्त
विश्व आदिवासी दिवस हर वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों के अधिकार, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को सम्मान देना है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा इसे पहली बार 1994 में मनाया गया था। यह दिवस दुनिया भर में स्वदेशी समुदायों के योगदान को पहचान देने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
197. सांसी जनजाति के लोग राजस्थान के किस जिले में मुख्य रूप से पाए जाते हैं?
- (A) करौली
- (B) धौलपुर
- (C) अलवर
- (D) भरतपुर
सांसी समुदाय राजस्थान में मुख्य रूप से भरतपुर जिले में पाया जाता है। यह समुदाय अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल है और झुंझुनूं जैसे क्षेत्रों में भी इनकी उपस्थिति मिलती है। सांसी समाज पारंपरिक रूप से घुमंतू जीवनशैली से जुड़ा रहा है, लेकिन अब स्थायी निवास की प्रवृत्ति बढ़ी है।
198. भील जनजाति में पेय पदार्थ हेतु किस वृक्ष/पौधे का अधिक उपयोग किया जाता है?
- (A) अंगूर
- (B) आम
- (C) खेजड़ी
- (D) महुआ
भील जनजाति में महुआ वृक्ष का बहुत महत्व है। इसके फूलों से पारंपरिक पेय और देशी शराब बनाई जाती है। महुआ को आदिवासियों का कल्पवृक्ष भी कहा जाता है क्योंकि इसके फल, फूल और बीज कई तरह से उपयोग में आते हैं। दक्षिणी राजस्थान के जनजातीय क्षेत्रों में यह वृक्ष अधिक पाया जाता है और उनकी आजीविका तथा संस्कृति से गहराई से जुड़ा है।
199. डामोर जनजाति अधिकतर कहाँ पायी जाती है?
- (A) डूंगरपुर और बांसवाड़ा
- (B) कोटा और बारां
- (C) प्रतापगढ़
- (D) भीलवाड़ा
डामोर जनजाति मुख्य रूप से डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में पाई जाती है, खासकर गुजरात सीमा से लगे क्षेत्रों में। इनके मुखिया को ‘मुखी’ कहा जाता है और गांव की छोटी इकाई ‘फला’ कहलाती है। यह जनजाति कृषि और पशुपालन पर निर्भर रहती है तथा पुरुष भी आभूषण पहनते हैं, जो उनकी सांस्कृतिक विशेषता मानी जाती है।
200. ‘कू’ संबंधित है?
- (A) भील जनजाति के घर से
- (B) गरासिया के हथियार से
- (C) भील के कपड़ों से
- (D) मीणा के त्यौहार से
‘कू’ या ‘टापरा’ भील जनजाति के घर को कहा जाता है। भील समाज में बसावट की कई इकाइयाँ होती हैं जैसे फला (छोटा समूह) और पाल (बड़ा गाँव)। यह पारंपरिक आवास व्यवस्था जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों के अनुसार विकसित हुई है। इससे उनकी सामाजिक संरचना और सामूहिक जीवनशैली समझ में आती है।
राजस्थान की जनजातियाँ MCQ – सभी भाग:
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