राजस्थान की जनजातियाँ (Tribes of Rajasthan) MCQ – Part 2
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की जनजातियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें भील, मीणा, गरासिया, सहरिया, ढारिया, गमेती, हलमा, हांडा या हीड़ा, भील जनजाति, पिरिया, पुलाव आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की जनजातियाँ
- Question: 21 से 40
- Last Updated:
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21. आदिवासियों में सामूहिक सहयोग की परम्परा कहलाती है?
- (A) हीड़ा
- (B) हांडा
- (C) हलमा
- (D) उपर्युक्त सभी
आदिवासी समाज में सामूहिक सहयोग की परंपरा को हलमा, हांडा या हीड़ा जैसे नामों से जाना जाता है। जब किसी परिवार को घर बनाना हो, खेती का काम करना हो या अन्य सहायता की जरूरत हो, तब पूरा समुदाय मिलकर मदद करता है। यह परंपरा सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को मजबूत बनाती है और जनजातीय जीवन की खास पहचान मानी जाती है।
22. ‘काट्टा’ क्या है?
- (A) भीलों का अन्तिम संस्कार
- (B) भीलों का मृत्युभोज
- (C) मीणाओं का मृत्युभोज
- (D) सांसी जनजाति का शिकार
भील जनजाति में मृत्युभोज की परंपरा को ‘काट्टा’ कहा जाता है। यह आयोजन मृतक की स्मृति में किया जाता है, जिसमें रिश्तेदार और समुदाय के लोग शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य सामाजिक एकता बनाए रखना और परिवार को सांत्वना देना होता है। जनजातीय समाज में ऐसे आयोजन सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं।
23. आदिवासियों के कुम्भ के नाम से प्रसिद्ध बेणेश्वर मेला कब भरता है?
- (A) कार्तिक पूर्णिमा
- (B) माघ पूर्णिमा
- (C) चैत्र शुक्ल तृतीया
- (D) आश्विन पूर्णिमा
बेणेश्वर मेला राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों का सबसे बड़ा धार्मिक मेला माना जाता है और इसे आदिवासियों का कुम्भ भी कहा जाता है। यह मेला माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होता है। भील और अन्य जनजातियाँ यहाँ बड़ी संख्या में एकत्रित होकर धार्मिक अनुष्ठान, स्नान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेती हैं। यह मेला आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र है।
24. भील पुरुषों की तंग धोती को क्या कहा जाता है?
- (A) ढेपाड़ी
- (B) ढेपाड़ा
- (C) मिलाला
- (D) माट्टा
भील पुरुषों के पारंपरिक वस्त्रों में तंग धोती को ढेपाड़ा या टेपाड़ा कहा जाता है। यह पहनावा उनके दैनिक जीवन और कामकाज के अनुकूल होता है। इसके साथ फेंटा और अन्य वस्त्र भी पहने जाते हैं। पारंपरिक वेशभूषा भील संस्कृति की पहचान मानी जाती है और त्योहारों तथा सामाजिक आयोजनों में आज भी इसका उपयोग किया जाता है।
25. भील पुरुषों द्वारा सिर को ढकने का सफेद वस्त्र क्या कहलाता है?
- (A) पोत्या
- (B) पगड़ी
- (C) अंगोछा
- (D) ढेपाड़ा
भील पुरुषों द्वारा सिर ढकने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सफेद कपड़ा ‘पोत्या’ कहलाता है। यह गर्मी और धूल से बचाव के साथ-साथ सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में पारंपरिक पहनावे का अभी भी महत्व है। पोत्या पहनना सामाजिक पहचान और परंपरा को दर्शाने का एक तरीका माना जाता है।
26. भील स्त्रियों द्वारा शादी के अवसर पर पहना जाने वाला पीले रंग का लहंगा क्या कहलाता है?
- (A) ढारिया
- (B) पिरिया
- (C) पुलाव
- (D) बोलावा
भील महिलाओं का पारंपरिक पहनावा रंग-बिरंगा और आकर्षक होता है। शादी जैसे विशेष अवसरों पर वे पीले रंग का लहंगा पहनती हैं, जिसे पिरिया कहा जाता है। यह वस्त्र शुभता और उत्सव का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ चोली, ओढ़नी और अन्य आभूषण भी पहने जाते हैं, जो भील संस्कृति की सुंदरता और परंपरा को दर्शाते हैं।
27. ‘सिंदूरी’ है?
- (A) हरे रंग की साड़ी
- (B) लाल रंग की साड़ी
- (C) वृद्ध महिला
- (D) उच्च गोत्र
भील महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली लाल रंग की साड़ी को सिंदूरी कहा जाता है। यह विशेष रूप से पारंपरिक और सांस्कृतिक अवसरों पर पहनी जाती है। लाल रंग को शुभ और उत्सव का प्रतीक माना जाता है। भील समाज में वस्त्रों के अलग-अलग नाम उनकी संस्कृति और जीवनशैली की पहचान को दर्शाते हैं।
28. ‘ढालिया’ कहलाता है?
- (A) भीलों के घर का बाहरी बैठक बरामदा
- (B) मीणा जनजाति के घर
- (C) जानवर बांधने का स्थल
- (D) शादी का मंडप
भील घरों में बाहरी बैठक या बरामदे को ढालिया कहा जाता है। यह स्थान मेहमानों के बैठने और सामाजिक बातचीत के लिए उपयोग में आता है। ग्रामीण जीवन में ऐसे स्थान सामुदायिक संबंधों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। ढालिया पारंपरिक घरों की संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
29. होली के अवसर पर भील कौनसा नृत्य करते हैं?
- (A) हाथीमना
- (B) गैर
- (C) गवरी
- (D) राई
होली के अवसर पर भील जनजाति द्वारा गैर नृत्य किया जाता है। यह सामूहिक नृत्य होता है जिसमें पुरुष और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेते हैं। ढोल और लोकवाद्यों की धुन पर किया जाने वाला यह नृत्य उत्साह और सामाजिक एकता का प्रतीक है। राजस्थान की लोकसंस्कृति में गैर नृत्य का विशेष स्थान है।
30. राजस्थान में भीलों के गाँवों के समूह के मुखिया को क्या कहते हैं?
- (A) मुखिया
- (B) गमेती
- (C) फलावी
- (D) फला
भील समाज में प्रशासनिक व्यवस्था पारंपरिक रूप से संगठित होती है। गाँवों के समूह के मुखिया को गमेती कहा जाता है, जबकि एक गाँव के मुखिया को अलग नाम से जाना जाता है। गमेती सामाजिक विवादों का समाधान और समुदाय का नेतृत्व करता है। यह पद जनजातीय समाज में सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है।
31. भीलों द्वारा कन्या का मूल्य चुकाने की प्रथा कहलाती है?
- (A) दापा
- (B) ढारिया
- (C) गमेती
- (D) नतारा
भील जनजाति में विवाह के समय कन्या पक्ष को दिया जाने वाला मूल्य दापा कहलाता है। यह परंपरा सामाजिक स्वीकृति के साथ निभाई जाती है और विवाह संबंध को औपचारिक रूप देती है। इसका उद्देश्य आर्थिक सहयोग और सामाजिक मान्यता देना होता है। जनजातीय समाज में ऐसी परंपराएँ लंबे समय से चली आ रही हैं।
32. भीलों द्वारा पहाड़ी भाग में की जाने वाली कृषि क्या कहलाती है?
- (A) दजिया
- (B) वालरा
- (C) चिमाता
- (D) झूमिंग
भील जनजाति पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष प्रकार की कृषि करती है, जिसे चिमाता कहा जाता है। यह स्थानीय परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के अनुसार विकसित खेती की पद्धति है। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर खेती की जाती है। यह पद्धति जनजातीय जीवन और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने का उदाहरण है।
33. ऐसे विवाह जिनमें लड़का लड़की के माता-पिता के घर रहकर सेवा करता है?
- (A) सेवा विवाह
- (B) हरण विवाह
- (C) हठ विवाह
- (D) परीवीक्षा विवाह
सेवा विवाह जनजातीय क्षेत्रों में प्रचलित एक विशेष विवाह पद्धति है। इसमें लड़का विवाह से पहले या बाद में लड़की के परिवार के साथ रहकर उनकी सेवा करता है। यह परंपरा आपसी समझ और परिवार की सहमति पर आधारित होती है। इससे दोनों परिवारों के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ता है।
34. निम्नलिखित में से कौनसी राजस्थान की जनजाति नहीं है?
- (A) खटीक
- (B) भील
- (C) मीणा
- (D) डामोर
खटीक राजस्थान की जनजाति नहीं मानी जाती, जबकि भील, मीणा और डामोर प्रमुख जनजातियों में शामिल हैं। जनजातियों की पहचान उनके पारंपरिक जीवन, संस्कृति और सामाजिक ढांचे से होती है। राजस्थान में विभिन्न जनजातियाँ अपनी अलग संस्कृति और रीति-रिवाजों के लिए जानी जाती हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं।
35. ‘भाखर बावजी’ किस जनजाति के संरक्षक माने जाते हैं?
- (A) गरासिया
- (B) भील
- (C) मीणा
- (D) सहरिया
भाखर बावजी को गरासिया जनजाति का संरक्षक और आदिपुरुष माना जाता है। सिरोही क्षेत्र का भाखर इलाका गरासिया समाज का मूल क्षेत्र माना जाता है। इस समुदाय में भाखर बावजी के प्रति गहरी आस्था है और धार्मिक अवसरों पर उनकी पूजा की जाती है। यह परंपरा गरासिया समाज की सांस्कृतिक पहचान और इतिहास से जुड़ी हुई है।
36. राजस्थान में किस जनजाति की जनसंख्या सर्वाधिक है?
- (A) मीणा
- (B) भील
- (C) गरासिया
- (D) सहरिया
राजस्थान में जनसंख्या की दृष्टि से मीणा जनजाति सबसे बड़ी मानी जाती है। यह जनजाति मुख्य रूप से पूर्वी राजस्थान के जिलों में अधिक पाई जाती है। मीणा समाज कृषि, सामाजिक नेतृत्व और स्थानीय प्रशासनिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाता है। उनकी सांस्कृतिक परंपराएँ और लोकदेवताओं में आस्था राजस्थान की जनजातीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
37. निम्न में से कौनसा वृक्ष भील जनजाति का पवित्र वृक्ष है?
- (A) पीपल
- (B) खेजड़ी
- (C) महुआ
- (D) बरगद
महुआ वृक्ष भील जनजाति के लिए अत्यंत पवित्र और उपयोगी माना जाता है। इसके फूलों से पेय पदार्थ, भोजन और कई घरेलू चीजें तैयार की जाती हैं। भील समाज का जीवन जंगल और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा हुआ है, इसलिए महुआ का धार्मिक और आर्थिक दोनों महत्व है। त्योहारों और पारंपरिक अनुष्ठानों में भी इसका विशेष स्थान होता है।
38. निम्न में से असंगत है?
- (A) भील – बाँसवाड़ा
- (B) गरासिया – सिरोही
- (C) सहरिया – जयपुर
- (D) डामोर – डूंगरपुर
सहरिया जनजाति मुख्य रूप से बारां, कोटा और झालावाड़ क्षेत्रों में पाई जाती है, इसलिए सहरिया – जयपुर का संयोजन असंगत माना जाता है। अन्य विकल्प सही क्षेत्रीय संबंध दर्शाते हैं। राजस्थान की प्रत्येक जनजाति का अपना भौगोलिक क्षेत्र और सांस्कृतिक आधार होता है, जो उनकी पहचान और जीवनशैली को प्रभावित करता है।
39. राज्य में सर्वाधिक सहरिया जनजाति के लोग किस जिले में रहते हैं?
- (A) कोटा
- (B) बारां
- (C) झालावाड़
- (D) उदयपुर
सहरिया जनजाति राजस्थान में सबसे अधिक बारां जिले की शाहबाद और किशनगंज तहसीलों में निवास करती है। यह जनजाति आदिम जनजातियों में गिनी जाती है और जंगलों के निकट रहने वाली जीवनशैली अपनाती है। इनके अलावा कोटा और झालावाड़ जिलों में भी इनकी उपस्थिति मिलती है। बारां क्षेत्र इनके सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
40. किस जनजाति में मरे हुए व्यक्ति के मुँह में शराब की बूंदे डालने का रिवाज है?
- (A) भील
- (B) गरासिया
- (C) सहरिया
- (D) कंजर
कंजर जनजाति में मृत्यु से जुड़े कुछ विशेष पारंपरिक रीति-रिवाज पाए जाते हैं। इनमें मृतक के मुँह में शराब की बूंदें डालने की परंपरा भी शामिल है, जिसे धार्मिक आस्था और सम्मान से जोड़ा जाता है। जनजातीय समाजों में ऐसे संस्कार उनके विश्वासों और लोक परंपराओं को दर्शाते हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक मान्यताओं का हिस्सा है।
राजस्थान की जनजातियाँ MCQ – सभी भाग:
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