राजस्थान की जनजातियाँ (Tribes of Rajasthan) MCQ – Part 9
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की जनजातियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें भील, सहरिया, गरासिया, मीणा, कंजर, डामोर, रैडो, रेंकणौ, रैहळ, रैबारी आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की जनजातियाँ
- Question: 161 से 180
- Last Updated:
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161. राजस्थान में ‘ऊंदरिया पंथ’ किनमें प्रचलित है?
- (A) भील
- (B) मीणा
- (C) सहरिया
- (D) गरासिया
ऊंदरिया पंथ भील जनजाति में प्रचलित एक धार्मिक पंथ माना जाता है। यह विशेष रूप से उदयपुर के आसपास के क्षेत्रों में देखा जाता है। भील समाज में विभिन्न लोक मान्यताएँ और पंथ पाए जाते हैं, जो उनकी धार्मिक विविधता को दर्शाते हैं।
162. भेड़-बकरी व ऊंट पालन करने वाली जाति कौनसी है?
- (A) रैडो
- (B) रेंकणौ
- (C) रैहळ
- (D) रैबारी
रैबारी या राईका समुदाय पारंपरिक रूप से पशुपालन, खासकर भेड़, बकरी और ऊंट पालन के लिए जाना जाता है। ये लोग राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं। पशुपालन उनकी आजीविका और सांस्कृतिक पहचान का मुख्य आधार है।
163. भीलों में ‘छेड़ा फाड़ना’ क्या है?
- (A) त्योहार
- (B) तलाक
- (C) विवाह
- (D) पुत्र जन्म
भील जनजाति में छेड़ा फाड़ना तलाक की एक पारंपरिक प्रक्रिया है। इसमें सामाजिक पंचायत के सामने विशेष रीति से साड़ी फाड़कर संबंध विच्छेद की घोषणा की जाती है। यह परंपरा समाज की पारंपरिक न्याय व्यवस्था को दर्शाती है।
164. भील जनजाति में ‘कछाबू’ कौन पहनता है?
- (A) पुरुष
- (B) महिलाएँ
- (C) नवयुवक
- (D) बालक
कछाबू भील महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला पारंपरिक घाघरा है, जो आमतौर पर काले और लाल रंग का होता है। यह उनकी पारंपरिक वेशभूषा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जनजातीय समाज में वस्त्र सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक परंपराओं को दर्शाते हैं।
165. सहरिया जनजाति मृतक की अस्थियाँ कहाँ प्रवाहित करते हैं?
- (A) पुष्कर
- (B) कपिलधारा
- (C) गंगा
- (D) कोलायत
सहरिया जनजाति मृतक की अस्थियाँ कपिलधारा (बारां) में प्रवाहित करती है। यह स्थान इनके लिए धार्मिक महत्व रखता है। कपिलधारा में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मेला भी आयोजित होता है। इस प्रकार के संस्कार जनजातीय समाज की धार्मिक आस्था और परंपराओं को दर्शाते हैं।
166. सीमलवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र, जहाँ डामोर जनजाति का सर्वाधिक निवास है, किस जिले में है?
- (A) सवाई माधोपुर
- (B) बाँसवाड़ा
- (C) कोटा
- (D) डूंगरपुर
सीमलवाड़ा क्षेत्र डूंगरपुर जिले में स्थित है और यहाँ डामोर जनजाति का सर्वाधिक निवास पाया जाता है। यह क्षेत्र जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली के लिए जाना जाता है। डामोर समाज मुख्यतः दक्षिणी राजस्थान के इलाकों में केंद्रित है।
167. गरासियों के गाँव को क्या कहा जाता है?
- (A) पाल
- (B) पालवी
- (C) मांड
- (D) गमेती
गरासिया जनजाति के गाँव को पाल कहा जाता है। यह शब्द उनकी पारंपरिक बसावट और सामाजिक व्यवस्था को दर्शाता है। जनजातीय समाज में गाँव और घरों के लिए अलग-अलग स्थानीय शब्द प्रचलित हैं, जो उनकी सांस्कृतिक पहचान और जीवनशैली को समझने में मदद करते हैं।
168. सीताबाड़ी मेला (बारां) किस जनजाति का कुम्भ माना जाता है?
- (A) कथौड़ी
- (B) भील
- (C) सहरिया
- (D) गरासिया
सीताबाड़ी मेला सहरिया जनजाति का कुम्भ माना जाता है। यह मेला बारां जिले में ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर आयोजित होता है। सहरिया समुदाय बड़ी संख्या में यहाँ एकत्र होकर धार्मिक अनुष्ठान करता है। यह आयोजन उनकी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र है।
169. किस जनजाति में मकर संक्रांति पर ‘लेंगी’ खेला जाता है और दीपावली पर हीड़ गाया जाता है?
- (A) सहरिया
- (B) सांसी
- (C) गरासिया
- (D) कंजर
सहरिया जनजाति में मकर संक्रांति के अवसर पर लेंगी खेला जाता है और दीपावली पर हीड़ गाने की परंपरा है। ये सांस्कृतिक गतिविधियाँ सामूहिक उत्सव और लोक परंपराओं का हिस्सा हैं। जनजातीय समाज में त्योहारों के साथ नृत्य और गीतों का विशेष महत्व होता है।
170. किस जनजाति में दहेज प्रथा का प्रचलन नहीं है?
- (A) डामोर
- (B) सहरिया
- (C) भील
- (D) मीणा
सहरिया जनजाति में दहेज प्रथा का प्रचलन नहीं माना जाता। यह समाज अपेक्षाकृत सरल विवाह प्रणाली अपनाता है, जिसमें सामाजिक सहमति और परंपरा को अधिक महत्व दिया जाता है। जनजातीय समाजों में विवाह संबंधी रीति-रिवाज सामान्य समाज से अलग और अधिक लचीले होते हैं।
171. निम्न में से कौनसी वैवाहिक परंपरा भीलों से संबंधित नहीं है?
- (A) हरण
- (B) सेवा
- (C) खेवणा
- (D) हठ
खेवणा विवाह भील जनजाति से नहीं बल्कि गरासिया समाज से संबंधित है। भीलों में हरण, सेवा और हठ विवाह जैसी परंपराएँ प्रचलित हैं। जनजातीय समाज में विवाह के कई प्रकार पाए जाते हैं, जो सामाजिक परिस्थितियों और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार विकसित हुए हैं।
172. हाथीवैडो वैवाहिक परंपरा किस जनजाति से संबंधित है?
- (A) मीणा
- (B) भील
- (C) कंजर
- (D) गरासिया
हाथीवैडो भील जनजाति की एक वैवाहिक परंपरा है। इसमें देववृक्ष को साक्षी मानकर विवाह किया जाता है। यह परंपरा प्रकृति के प्रति सम्मान और धार्मिक आस्था को दर्शाती है। भील समाज में विवाह के कई पारंपरिक रूप देखने को मिलते हैं, जो उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं।
173. भील जनजाति में ‘मारू ढोल’ संकेतक है?
- (A) हमले का
- (B) मांगलिक अवसर
- (C) विपत्ति का
- (D) यशगान का
भील जनजाति में मारू ढोल विपत्ति या संकट का संकेत माना जाता है। इसे बजाकर समुदाय को किसी खतरे या आपात स्थिति की सूचना दी जाती थी। यह पारंपरिक संचार व्यवस्था का हिस्सा था, जिससे लोग तुरंत एकत्र होकर समस्या का सामना कर सकें। यह उनकी सामूहिक एकता और सुरक्षा व्यवस्था को दर्शाता है।
174. कोई गरासिया पुरुष यदि किसी भील स्त्री से विवाह करता है तो वह क्या कहलाता है?
- (A) भील गरासिया
- (B) गमेती गरासिया
- (C) मोटी नियात
- (D) नेनकी नियात
जब गरासिया पुरुष भील स्त्री से विवाह करता है तो उसे भील गरासिया कहा जाता है। जनजातीय समाज में विवाह के आधार पर अलग पहचान दी जाती है। यह नामकरण सामाजिक संबंधों को स्पष्ट करने और समुदाय के भीतर पहचान बनाए रखने के लिए किया जाता है।
175. भील किस देवता पर चढ़ी केसर का पानी पीकर झूठ नहीं बोलते?
- (A) भूरिया बाबा
- (B) हाकम राजा
- (C) अटक जी
- (D) केसरिया नाथ जी
भील जनजाति के लोग केसरिया नाथ जी (ऋषभदेव) पर चढ़ी केसर का पानी पीकर झूठ नहीं बोलते। यह उनके धार्मिक विश्वास और सत्य बोलने की परंपरा से जुड़ा है। भील इन्हें काला या काला बावजी भी कहते हैं। यह आस्था सामाजिक नैतिकता को मजबूत करने का माध्यम मानी जाती है।
176. भीलों को प्राकृतिक प्रकोप से बचाने वाली माता है?
- (A) होवण माता
- (B) खोड़ियाल माता
- (C) नारायणी माता
- (D) उपरोक्त सभी
भील जनजाति में होवण माता को प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। इस देवी की पूजा संकट से बचाव और सुरक्षा की भावना से की जाती है। जनजातीय समाज में प्रकृति से जुड़े देवी-देवताओं की पूजा का विशेष महत्व होता है।
177. अपंग व विकलांग भील किस माता की पूजा करते हैं?
- (A) होवण माता
- (B) खोड़ियाल माता
- (C) नारायणी माता
- (D) उपरोक्त सभी गलत
अपंग और विकलांग भील समुदाय में खोड़ियाल माता की विशेष पूजा की जाती है। इन्हें सहारा और रक्षा देने वाली देवी माना जाता है। जनजातीय समाज में ऐसी आस्थाएँ सामाजिक सहानुभूति और धार्मिक विश्वास का प्रतीक होती हैं।
178. कौनसी जनजाति में मक्का की रोटी, कांदे की सब्जी, महुआ की शराब और ताड़ का रस प्रिय है?
- (A) कंजर
- (B) सहरिया
- (C) भील
- (D) डामोर
भील जनजाति का भोजन मुख्यतः स्थानीय संसाधनों पर आधारित होता है। मक्का की रोटी, कांदे की सब्जी, महुआ से बने पेय और ताड़ का रस इनके पारंपरिक भोजन का हिस्सा हैं। यह खान-पान उनकी जंगल और कृषि आधारित जीवनशैली को दर्शाता है।
179. किस जनजाति में भूरिया बाबा की झूठी कसम नहीं खाते?
- (A) भील
- (B) मीणा
- (C) गरासिया
- (D) कंजर
मीणा जनजाति में भूरिया बाबा के नाम की झूठी कसम नहीं खाई जाती। यह उनके धार्मिक विश्वास और नैतिक मूल्यों से जुड़ी परंपरा है। लोकदेवताओं में आस्था जनजातीय समाज की सामाजिक व्यवस्था और विश्वास प्रणाली को मजबूत बनाती है।
180. चंबल, बनास और सीप नदियों के संगम पर मीणा जनजाति का प्रयागराज कहलाने वाला मेला है?
- (A) रामेश्वरम् मेला
- (B) पुष्कर मेला
- (C) मनखारो मेला
- (D) लक्खी मेला
चंबल, बनास और सीप नदियों के संगम पर लगने वाला रामेश्वरम् मेला मीणा जनजाति का प्रमुख धार्मिक आयोजन माना जाता है। इसे मीणाओं का प्रयागराज भी कहा जाता है। इस मेले में धार्मिक स्नान, पूजा और सामूहिक आयोजन होते हैं।
राजस्थान की जनजातियाँ MCQ – सभी भाग:
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