राजस्थान की लोकदेवियाँ MCQ (Folk Goddesses of Rajasthan) – Part 10
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की लोकदेवियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में कैवाय माता मंदिर (किणसरिया, परबतसर, नागौर), शीला देवी का मंदिर आमेर (जयपुर), तुरताई माता का मंदिर तलवाड़ा (बांसवाड़ा), कुशाला माता का भव्य मंदिर बदनोर (भीलवाड़ा), आई माता का मंदिर बिलाड़ा (जोधपुर), धौलागढ़ देवी का मंदिर अलवर, सुसवाणी माता का मंदिर मोरखाणा (बीकानेर) आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की लोकदेवियाँ
- कुल प्रश्न: 11
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181. शांकभरी के शासक वाक्यपतिराज प्रथम के पुत्र महाराव लाखणसी (लक्ष्मण) ने नाडोल में किस देवी का मंदिर बनवाया था?
- (A) आशापुरा माता
- (B) शाकम्भरी माता
- (C) आवड़ माता
- (D) हिंगलाज देवी
नाडोल (जालौर) में आशापुरा माता का मंदिर महाराव लाखणसी ने बनवाया था। आशापुरा माता का एक मंदिर पोकरण (जैसलमेर) में भी स्थित है।
182. कैवाय माता मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?
- (A) देवदत्त ने
- (B) चच्च ने
- (C) भीमदेव ने
- (D) शालिवाहन ने
कैवाय माता मंदिर (किणसरिया, परबतसर, नागौर) का निर्माण वि.स. 1056 (999 ई.) में दधीचिक वंशीय शासक चच्चदेव ने करवाया। यह मंदिर दहिया वंश की कुलदेवी और प्रतिहारकालीन स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है।
183. शीला देवी का मंदिर निम्नलिखित में से किस किले में अवस्थित है?
- (A) अचलगढ़
- (B) कुंभलगढ़
- (C) आमेर
- (D) मेहरानगढ़
शीला देवी का मंदिर आमेर (जयपुर) किले में स्थित है। यह कच्छवाहा वंश की इष्ट देवी मानी जाती हैं। राजा मानसिंह प्रथम इसे 1604 ई. में पूर्वी बंगाल से लाए थे। यहाँ पहले नरबलि और छागबलि की परंपरा थी, जो अब समाप्त हो चुकी है।
184. तुरताई माता का मंदिर कहाँ स्थित है?
- (A) तिलवाड़ा (बाड़मेर)
- (B) तलवाड़ा (बांसवाड़ा)
- (C) नाडोल (पाली)
- (D) आमेर (जयपुर)
तुरताई माता का मंदिर तलवाड़ा (बांसवाड़ा) में स्थित है। यह पांचाल जाति की कुलदेवी और प्राचीन शक्तिपीठ है। यहाँ की प्रतिमा अठारह भुजी है। मंदिर में कनिष्क काल का शिवलिंग भी है और यह सोलंकी राजा सिद्धराज जयसिंह की इष्ट देवी मानी जाती हैं।
185. कुशाला माता का भव्य मंदिर, जिसका निर्माण महाराणा कुम्भा ने करवाया, कहाँ स्थित है?
- (A) उदयपुर
- (B) कुम्भलगढ़
- (C) बदनोर
- (D) ओसियां
कुशाला माता का भव्य मंदिर बदनोर (भीलवाड़ा) में स्थित है। इसका निर्माण महाराणा कुम्भा ने 1457 ई. में महमूद खिलजी को हराने के उपलक्ष्य में करवाया था। यह मंदिर उनकी विजय की याद में आज भी प्रसिद्ध है।
186. निम्न में से किस देवी को 'शिशु-रक्षक लोकदेवी' माना जाता है?
- (A) चौथ माता
- (B) छींछ माता
- (C) घेवर माता
- (D) महामाया माता
महामाया माता (सेढ़ल माता) को शिशु रक्षक देवी कहा जाता है। इन्हें चेचक निवारक देवी भी माना जाता है। इनका मेला चैत्र कृष्ण सप्तमी-अष्टमी को भरता है। इनका वाहन गधा है और कुम्हार जाति इनके पुजारी होते हैं।
187. कनफटे जोगी' डमरू एवं सारंगी वाद्ययंत्रों के साथ किस देवी के गीत गाते हैं?
- (A) नागणेची माता
- (B) शीतला माता
- (C) सकराय माता
- (D) जीण माता
जीण माता का गीत राजस्थानी लोकसाहित्य का सबसे लंबा गीत है। इसे कनफटे जोगी डमरू और सारंगी की संगत में गाते हैं। जीण माता का मुख्य मंदिर रेवासा (सीकर) में स्थित है और यह मंदिर राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर है।
188. बडेर' पद का प्रयोग कौन करता है?
- (A) अहीर
- (B) बंजारा
- (C) सीरवी
- (D) देवासी
सीरवी समाज की कुलदेवी आई माता का मंदिर बिलाड़ा (जोधपुर) में स्थित है। यहाँ मंदिर परिसर को ‘बडेर’ कहा जाता है। मान्यता है कि इनके दीपक की ज्योति से केसर टपकती है। आई माता के उपासक 11 नियमों का पालन करते हैं।
189. बिलाड़ा का संबंध किस लोकदेवी से है?
- (A) सकराय माता
- (B) करणी माता
- (C) आई माता
- (D) जीण माता
बिलाड़ा (जोधपुर) में आई माता का मंदिर स्थित है। इनके अन्य मंदिर नारलाई, डायलाणा, भैसाणा और पतालियावास में भी बने हैं। आई माता को सिरवी जाति की कुलदेवी माना जाता है।
190. धौलागढ़ देवी का मंदिर किस जिले में स्थित है?
- (A) करौली
- (B) भरतपुर
- (C) बूंदी
- (D) अलवर
धौलागढ़ देवी का मंदिर अलवर जिले में स्थित है। यह मंदिर 9वीं शताब्दी का है और इसका पुनर्निर्माण भरतपुर के शासक महाराजा सूरजमल ने करवाया था। यहाँ वैशाख पंचमी से एकादशी तक बड़ा मेला लगता है।
191. सुसवाणी माता का मंदिर कहाँ स्थित है?
- (A) पल्लू (हनुमानगढ़)
- (B) मोरखाणा (बीकानेर)
- (C) भीनमाल (जालौर)
- (D) रावतसर (हनुमानगढ़)
सुसवाणी माता का मंदिर मोरखाणा (बीकानेर) में स्थित है। इन्हें सुराणा व दुग्गड़ जाति की कुलदेवी माना जाता है। यहाँ हर वर्ष श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन करने आते हैं।
राजस्थान की लोकदेवियाँ MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7 | Part 8 | Part 9 | Part 10
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