राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं (Customs and Customs, Rituals, and Evil Practices of Rajasthan) MCQ – Part 6
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें मौसर, सामेला, जडूला, बढ़ार, औसर, कांधिया, बिखेर, अर्था, बैकुंठी, आधेटा आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं
- Question: 101 से 120
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101. फूल चुनने की क्रिया दाह संस्कार के बाद किस दिन की जाती है?
- (A) तीसरे दिन
- (B) बारहवें दिन
- (C) चौथे दिन
- (D) दूसरे दिन
दाह संस्कार के बाद ‘फूल चुनना’ एक महत्वपूर्ण मृत्यु संस्कार है, जो सामान्यतः तीसरे दिन किया जाता है। इस रस्म में चिता की राख से अस्थियाँ और फूल एकत्रित किए जाते हैं, जिन्हें बाद में पवित्र नदी या जल स्रोत में विसर्जित किया जाता है। यह मृतक की आत्मा की शांति और धार्मिक परंपरा से जुड़ी प्रक्रिया मानी जाती है।
102. संथारा प्रथा किस धर्म से सम्बन्धित है?
- (A) बौद्ध
- (B) मुस्लिम
- (C) जैन
- (D) हिन्दू
संथारा प्रथा जैन धर्म से संबंधित है। इसमें व्यक्ति जीवन के अंतिम चरण में स्वेच्छा से अन्न और जल का त्याग कर समभाव से मृत्यु का वरण करता है। जैन दर्शन में इसे आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति की प्रक्रिया माना जाता है। यह धार्मिक अनुशासन और तपस्या से जुड़ी विशेष परंपरा है।
103. पानीवाड़ा संस्कार किससे सम्बन्धित है?
- (A) विवाह
- (B) गृह प्रवेश
- (C) बच्चे के जन्म
- (D) मृत्यु
किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय जब लोग एकत्रित होकर स्नान करके मृतक के परिवार जनों को सांत्वना देते है, तो इस समय किया जाने वाला स्नान पानीवाड़ा कहलाता है।
104. जीवित रहते ही मृत्यु से पहले भोज दिया जाना कहलाता है?
- (A) मौसर
- (B) बढ़ार
- (C) औसर
- (D) कांधिया
कुछ क्षेत्रों में व्यक्ति द्वारा जीवित रहते हुए ही मृत्यु से पहले दिया जाने वाला भोज ‘औसर’ कहलाता है। इसका उद्देश्य समाज और रिश्तेदारों के साथ अंतिम बार मिलना तथा धार्मिक भावना के साथ दान और भोजन कराना होता है। राजस्थान की लोक परंपराओं में इसे विशेष सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व दिया जाता है।
105. मृत व्यक्ति को बैठाकर श्मशान ले जाने के लिए प्रयुक्त शैया क्या कहलाती है?
- (A) बिखेर
- (B) अर्था
- (C) बैकुंठी
- (D) आधेटा
मृत व्यक्ति को बैठी अवस्था में श्मशान ले जाने के लिए प्रयुक्त विशेष शैया को ‘बैकुंठी’ कहा जाता है। यह मृत्यु संस्कार से संबंधित पारंपरिक व्यवस्था है, जिसमें मृतक को सम्मानपूर्वक अंतिम यात्रा पर ले जाया जाता है। राजस्थान की लोक परंपराओं में इस शब्द का प्रयोग अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के संदर्भ में किया जाता है।
106. सागड़ी प्रथा से तात्पर्य है?
- (A) बंधुआ मजदूर प्रथा
- (B) मृत्यु के बारहवें दिन का भोज
- (C) विवाह पश्चात बारात को भेंट देना
- (D) मृत्यु के तीसरे दिन की शोक सभा
सागड़ी या बंधुआ मजदूर प्रथा उधार दी गई राशि के बदले उस व्यक्ति से नौकर की तरह कार्य करवाने से सम्बन्धित है। इनसे खेतों में काम करवाना 'हाली प्रथा' व घर में काम करवाना 'चाकर प्रथा' कहलाता था।
107. राजस्थान की वह परम्परा, जिसमें दूल्हे की बारात के घर से चले जाने के बाद घर की स्त्रियों द्वारा लोक नाट्य किया जाता है, कहलाता है?
- (A) टूटिया
- (B) रम्मत
- (C) स्वांग
- (D) ख्याल
टूटिया वह लोकनाट्य है जो दूल्हे की बारात जाने के बाद घर की महिलाओं द्वारा किया जाता है। इसमें हास्य, गीत और अभिनय के माध्यम से मनोरंजन किया जाता है। यह राजस्थान की पारंपरिक स्त्री-लोक संस्कृति का हिस्सा है और विवाह समारोह को आनंदमय बनाने के लिए किया जाता है।
108. राजस्थानी संस्कृति में 'औलंदी' क्या है?
- (A) विवाह का एक प्रकार
- (B) एक देशी खेल
- (C) नववधु के साथ जाने वाली लड़की या स्त्री
- (D) राजस्थानी लोक-गीत
औलंदी उस स्त्री या लड़की को कहा जाता है जो नववधू के साथ ससुराल जाती है। इसका उद्देश्य नई दुल्हन को नए वातावरण में सहयोग देना और उसे सहज महसूस कराना होता है। यह रस्म पारिवारिक सहयोग और सामाजिक सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है।
109. अप्रैल 1930 में बाल विवाह निरोधक कानून के प्रणेता कौन थे?
- (A) अर्जुनलाल सेठी
- (B) रायबहादुर हरविलास
- (C) हीरालाल शास्त्री
- (D) जमनालाल बजाज
हरविलास शारदा एक शिक्षाविद, न्यायाधीश और समाज सुधारक थे। उनके प्रयासों से बाल विवाह निरोधक अधिनियम (शारदा एक्ट) अस्तित्व में आया, जो बाल विवाह रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कानून था। यह कानून भारतीय समाज में सामाजिक सुधार का बड़ा कदम माना जाता है।
110. अनमेल विवाह और अलवर रियासत विवाह निषेध अधिनियम सबसे पहले कब निषेध किया गया?
- (A) 5 मार्च 1902
- (B) 10 दिसम्बर 1903
- (C) 10 मार्च 1901
- (D) 10 जनवरी 1904
अलवर रियासत के शासक सर जयसिंह प्रभाकर ने 10 दिसम्बर 1903 को बाल विवाह और अनमेल विवाह पर रोक लगाई। यह सामाजिक सुधार की दिशा में प्रारंभिक प्रयासों में से एक था। इस कदम ने राजस्थान में विवाह संबंधी सुधारों को बढ़ावा दिया।
111. कन्या वध को गैर कानूनी घोषित करने वाली राजस्थान की पहली रियासत कौनसी थी?
- (A) झालावाड़
- (B) जयपुर
- (C) शाहपुरा
- (D) कोटा
कन्यावध को सर्वप्रथम कोटा रियासत में राव रामसिंह के समय गैरकानूनी घोषित किया गया। इसके बाद अन्य रियासतों जैसे बूंदी, बीकानेर, जोधपुर और उदयपुर में भी इस प्रथा पर रोक लगाई गई। यह राजस्थान में सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।
112. राजस्थान के रीति-रिवाजों में 'आणो' क्या है?
- (A) विवाह के बाद दुल्हन को दूसरी बार ससुराल भेजना
- (B) जलझूलनी एकादशी पूजा
- (C) कुआ पूजन
- (D) बारात का डेरा देखने जाना
‘आणो’ विवाह के बाद की वह रस्म है जिसमें दुल्हन को दूसरी बार ससुराल भेजा जाता है। यह विवाह के बाद संबंधों की स्थिरता और सामाजिक स्वीकृति का प्रतीक माना जाता है। राजस्थान की पारंपरिक विवाह व्यवस्था में इसका विशेष महत्व है।
113. जयपुर राज्य ने कन्यावध को किस वर्ष गैर कानूनी घोषित किया?
- (A) 1840
- (B) 1842
- (C) 1844
- (D) 1846
जयपुर राज्य में 1844 में कन्या वध को गैरकानूनी घोषित किया गया। यह सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। इस निर्णय ने अन्य रियासतों को भी ऐसे सुधार लागू करने के लिए प्रेरित किया।
114. सती रोकथाम अधिनियम 1987 किस राज्य सरकार द्वारा लागू किया गया?
- (A) पश्चिम बंगाल
- (B) राजस्थान
- (C) बिहार
- (D) असम
1987 में दिवराला (सीकर) की रूपकंवर घटना के बाद राजस्थान सरकार ने सती निवारण अध्यादेश लागू किया। बाद में 3 जनवरी 1988 को इसे अधिनियम का रूप दिया गया। इसका उद्देश्य सती प्रथा और उसके महिमामंडन को रोकना था।
115. निम्नलिखित में से कौन सा संस्कार जन्म से संबंधित है?
- (A) सामेला
- (B) बान
- (C) मौसर
- (D) जडूला
जडूला (मुंडन संस्कार) बच्चे के जन्म से जुड़े संस्कारों में माना जाता है। जब बालक दो या तीन वर्ष का हो जाता है तब उसका प्रथम बार मुण्डन कराया जाता है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संस्कार है।
116. सती (रोकथाम) अधिनियम राजस्थान में कब लागू हुआ?
- (A) 1988
- (B) 1987
- (C) 1986
- (D) 1985
4 सितम्बर 1987 को दिवराला घटना के बाद राजस्थान में सती निवारण अध्यादेश लागू किया गया। बाद में 3 जनवरी 1988 को इसे विधिक रूप दिया गया। यह कानून सती प्रथा पर रोक लगाने और उसके समर्थन को दंडनीय बनाने के लिए लागू किया गया।
117. लॉर्ड बैंटिक द्वारा सती रोक आदेश में कौनसा युग्म सही नहीं है?
- (A) अलवर : 1830
- (B) जयपुर : 1844
- (C) डूंगरपुर : 1856
- (D) जोधपुर : 1848
राजस्थान की विभिन्न रियासतों में अलग-अलग वर्षों में सती प्रथा पर रोक लगाई गई। डूंगरपुर में यह रोक 1844 के आसपास लगाई गई थी, इसलिए 1856 वाला युग्म गलत माना जाता है। यह प्रश्न ऐतिहासिक वर्षों के ज्ञान से संबंधित है।
118. राजस्थान में किस रीति-रिवाज का संबंध विवाह से है?
- (A) जडूला
- (B) पनघट पूजा
- (C) पगड़ी दस्तूर
- (D) सामेला
सामेला विवाह से संबंधित रस्म है, जिसमें वधू पक्ष द्वारा बारात की अगवानी की जाती है। यह सम्मान और स्वागत का प्रतीक माना जाता है। राजस्थान की विवाह परंपराओं में सामेला एक महत्वपूर्ण सामाजिक रस्म है।
119. उदयपुर राज्य में डाकन प्रथा पर प्रतिबंध कब लगा?
- (A) 1850
- (B) 1853
- (C) 1855
- (D) 1858
मेवाड़ (उदयपुर) में डाकन प्रथा को अक्टूबर 1853 में महाराणा स्वरूप सिंह के समय गैरकानूनी घोषित किया गया। यह प्रथा अंधविश्वास से जुड़ी थी और सामाजिक सुधारों के तहत इसे समाप्त करने का प्रयास किया गया।
120. डाकन प्रथा को अवैध घोषित करने वाली पहली रियासत कौनसी थी?
- (A) जयपुर
- (B) जोधपुर
- (C) बीकानेर
- (D) उदयपुर
डाकन प्रथा को सर्वप्रथम उदयपुर (मेवाड़) रियासत में 1853 में गैरकानूनी घोषित किया गया। यह कदम भील और मीणा जनजातियों में प्रचलित अंधविश्वास को समाप्त करने के उद्देश्य से उठाया गया था।
राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं MCQ – सभी भाग:
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