राजस्थान में जल स्थापत्य (तालाब एवं बावड़ी) MCQ (Water Architecture (Ponds and Stepwells) in Rajasthan) – Part 3
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान में जल स्थापत्य (तालाब एवं बावड़ी) से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में सेठानी का जोहड़ा चुरू, रानी जी की बावड़ी बूंदी, लम्बी बावड़ी धौलपुर, झालरा बावड़ी सीकर, चाँद बावड़ी आभानेरी (दौसा), दूध बावड़ी माउंट आबू (सिरोही), त्रिमुखी बावड़ी देबारी (उदयपुर), झालीबाब बावड़ी कुंभलगढ़ आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान में जल स्थापत्य (तालाब एवं बावड़ी)
- कुल प्रश्न: 20
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(Since 2021)
41. राजस्थान के किस जिले में 'रानी जी की बावड़ी' स्थित है?
- (A) कोटा
- (B) बूंदी
- (C) झालावाड़
- (D) बारां
रानी जी की बावड़ी बूंदी जिले में स्थित है। इसे 1699 ई. में राव राजा अनिरुद्ध की विधवा रानी नाथावत ने बनवाया था। बूंदी को “बावड़ियों का शहर” और “छोटी काशी” भी कहा जाता है।
42. राजस्थान का कौन सा शहर 'बावड़ियों का शहर' कहा जाता है?
- (A) बूंदी
- (B) बाड़मेर
- (C) कोटा
- (D) टोंक
बूंदी को “बावड़ियों का शहर” कहा जाता है। यहाँ की प्रसिद्ध बावड़ियाँ हैं – रानी जी की बावड़ी, नागर सागर कुण्ड, काकाजी की बावड़ी, अनारकली की बावड़ी और भावल देवी की बावड़ी।
43. सेठानी का जोहड़ा कहाँ स्थित है?
- (A) चुरू
- (B) सीकर
- (C) जयपुर
- (D) झुंझुनूं
सेठानी का जोहड़ा चुरू जिले में स्थित है। यह पारंपरिक जल संरचना है और स्थानीय जल संरक्षण का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
44. राजस्थान में सर्वाधिक बावड़ियाँ किन जिलों में स्थित हैं?
- (A) बूंदी व अलवर
- (B) जोधपुर व जालौर
- (C) जयपुर व भरतपुर
- (D) जोधपुर व नागौर
राजस्थान में सबसे अधिक बावड़ियाँ जोधपुर और जालौर जिलों में पाई जाती हैं। यहाँ लगभग 700-800 बावड़ियाँ दर्ज की गई हैं।
45. चाँद बावड़ी में कितनी सीढ़ियाँ बनी हुई हैं?
- (A) 2500
- (B) 4500
- (C) 4000
- (D) 3500
चाँद बावड़ी आभानेरी (दौसा) में स्थित है और इसमें लगभग 3500 सीढ़ियाँ बनी हैं। यह लगभग 19.5 मीटर गहरी और स्थापत्य कला का अद्वितीय उदाहरण है।
46. प्रसिद्ध रानी जी की बावड़ी किस जिले में स्थित है?
- (A) दौसा
- (B) बूंदी
- (C) अलवर
- (D) टोंक
रानी जी की बावड़ी बूंदी जिले में स्थित है। इसका निर्माण राव राजा अनिरुद्ध सिंह की विधवा रानी नाथावत लाडकँवर ने 1699 ई. में अपने पुत्र बुद्धसिंह के शासनकाल में करवाया था। इसे “बावड़ियों का सिरमौर” कहा जाता है।
47. लम्बी बावड़ी कहाँ स्थित है?
- (A) धौलपुर
- (B) करौली
- (C) अलवर
- (D) कोटा
लम्बी बावड़ी धौलपुर जिले में स्थित है। यह जल संरचना स्थापत्य कला और जल संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
48. राजस्थान में बावड़ियों का शहर किसे कहा जाता है?
- (A) अलवर
- (B) जयपुर
- (C) बूंदी
- (D) भरतपुर
बूंदी को “बावड़ियों का शहर” कहा जाता है। यहाँ पर रानी जी की बावड़ी, नागर सागर कुण्ड, काकाजी की बावड़ी, अनारकली की बावड़ी जैसी प्रमुख बावड़ियाँ स्थित हैं।
49. निम्न में से दूध बावड़ी कहाँ स्थित है?
- (A) नाडोल
- (B) ओसियां
- (C) रूणिचा
- (D) माउंट आबू
दूध बावड़ी माउंट आबू (सिरोही) में अधर देवी मंदिर की तलहटी में स्थित है। इस बावड़ी का पानी देखने में दूध जैसा सफेद दिखाई देता है, इसलिए इसे दूध बावड़ी कहा जाता है।
50. निम्न में से कौनसा कथन सत्य है-
- (A) झालरा बावड़ी सीकर में स्थित है।
- (B) फूल बावड़ी छोटी खाटू (डीडवाना-कुचामन) में स्थित है।
- (C) तापी बावड़ी नागौर में स्थित है।
- (D) कथन 1 व 2 दोनों सत्य हैं।
झालरा बावड़ी सीकर में स्थित है और फूल बावड़ी छोटी खाटू (डीडवाना-कुचामन) में स्थित है। जबकि तापी बावड़ी जोधपुर में है, नागौर में नहीं। इसलिए सही उत्तर कथन 1 और 2 दोनों है।
51. राजस्थान की सबसे गहरी व कलात्मक बावड़ी कौनसी है?
- (A) त्रिमुखी बावड़ी
- (B) चाँद बावड़ी
- (C) नौलखा बावड़ी
- (D) घोसुण्डा बावड़ी
चाँद बावड़ी आभानेरी (दौसा) में स्थित है। इसका निर्माण प्रतिहार राजा चाँद ने 8वीं शताब्दी में करवाया था। यह लगभग 19.5 मीटर गहरीऔर 3500 सीढ़ियों वाली है। इसे राजस्थान की सबसे गहरी और कलात्मक बावड़ी माना जाता है।
52. दूध बावड़ी राजस्थान के किस मंदिर के पास स्थित है?
- (A) हर्षद माता मंदिर
- (B) अधर देवी मंदिर
- (C) शीतला माता मंदिर
- (D) चारभुजा मंदिर
दूध बावड़ी माउंट आबू (सिरोही) में स्थित है और यह अधर देवी मंदिर के पास स्थित है। कहा जाता है कि इस बावड़ी का जल दूध के समान श्वेत दिखाई देता है, इसलिए इसे “दूध बावड़ी” कहा जाता है। यह बावड़ी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और तीर्थयात्री अधर देवी मंदिर दर्शन के बाद यहाँ स्नान या जल ग्रहण करते हैं।
53. अधर देवी की बावड़ी (अन्य प्रसिद्ध बावड़ी) राजस्थान के किस जिले/स्थान से संबंधित है?
- (A) सिरोही
- (B) अलवर
- (C) बूंदी
- (D) उदयपुर
बूंदी राजस्थान का वह नगर है जिसे “बावड़ियों का नगर” कहा जाता है। यहाँ अनेक ऐतिहासिक बावड़ियाँ हैं जिनमें अधर देवी की बावड़ी भी प्रसिद्ध है। बूंदी की स्थापत्य कला में बनी ये बावड़ियाँ जल संरक्षण और वास्तुकला दोनों का सुंदर उदाहरण हैं, जो राजस्थानी संस्कृति और जल प्रबंधन की परंपरा को दर्शाती हैं।
54. त्रिमुखी बावड़ी राजस्थान में कहाँ स्थित है?
- (A) कुंभलगढ़
- (B) ओसियां
- (C) देबारी (उदयपुर)
- (D) नीमराणा
त्रिमुखी बावड़ी देबारी (उदयपुर) में स्थित है। इसका नाम “त्रिमुखी” इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें तीन दिशाओं में उतरने के मार्ग हैं। यह बावड़ी राजस्थानी स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और इसे स्थानीय लोगों द्वारा जल संग्रहण एवं पूजा-अर्चना के लिए उपयोग किया जाता था।
55. बाटाडू का कुआँ, जिसका निर्माण रावल गुलाबसिंह ने करवाया था, किस अकाल राहत कार्यों से जुड़ा हुआ है?
- (A) 1934
- (B) 1947
- (C) 1950
- (D) 1928
बाटाडू का कुआँ का निर्माण रावल गुलाबसिंह ने करवाया था और यह 1947 के अकाल राहत कार्यों से जुड़ा हुआ है। उस समय क्षेत्र में भयंकर अकाल पड़ा था, और इस कुएँ के निर्माण से स्थानीय लोगों को न केवल रोजगार मिला बल्कि जल की समस्या से भी राहत मिली।
56. बाटाडू कुआँ का निर्माण किस शासक ने करवाया था?
- (A) राव राजा अनिरुद्ध
- (B) महारावल आसकरण
- (C) टोडरमल
- (D) रावल गुलाबसिंह
बाटाडू कुआँ का निर्माण रावल गुलाबसिंह द्वारा करवाया गया था। उन्होंने इसे जनकल्याण और जल संकट निवारण के उद्देश्य से बनवाया। इस कुएँ को राजस्थान की पारंपरिक जल संरचनाओं में गिना जाता है, जो शिल्पकला और उपयोगिता दोनों में उत्कृष्ट है।
57. बाटाडू कुआँ में किसकी विशाल प्रतिमा स्थापित है?
- (A) नंदी (बैल)
- (B) हनुमान
- (C) संगमरमर की विशाल गरुड़ प्रतिमा
- (D) महारावल गुलाबसिंह की प्रतिमा
बाटाडू कुआँ में संगमरमर की विशाल गरुड़ प्रतिमा स्थापित है। गरुड़ भगवान विष्णु के वाहन माने जाते हैं, इसलिए इस कुएँ का धार्मिक महत्व भी है। इस प्रतिमा का आकार और सुंदरता इसे वास्तुकला का अद्भुत नमूना बनाती है। यह प्रतिमा न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि राजस्थानी पत्थरकला की श्रेष्ठता को भी दर्शाती है।
58. बाटाडू कुआँ के आकर्षक प्रवेश द्वार पर किसकी आकृति बनी हुई है?
- (A) घोड़े की
- (B) शेर की
- (C) हाथी की
- (D) गाय की
बाटाडू कुआँ अपने सुंदर और कलात्मक प्रवेश द्वार के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ गाय की आकृति बनी हुई है। गाय भारतीय संस्कृति में पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। यह आकृति उस समय की राजस्थानी पत्थरकला और धार्मिक भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
59. त्रिमुखी बावड़ी का निर्माण किसके द्वारा करवाया गया था?
- (A) राव राजा अनिरुद्ध
- (B) राजा चाँद
- (C) टोडरमल
- (D) राजसिंह
त्रिमुखी बावड़ी का निर्माण राजा राजसिंह द्वारा देबारी (उदयपुर) में करवाया गया था। इसका नाम “त्रिमुखी” इसलिए रखा गया क्योंकि इसमें तीन दिशाओं में सीढ़ियाँ उतरती हैं। यह बावड़ी राजपूताना स्थापत्य शैली का अद्भुत उदाहरण है और जल संरक्षण के साथ-साथ धार्मिक उपयोग के लिए भी प्रसिद्ध रही है।
60. झालीबाब बावड़ी राजस्थान के किस क्षेत्र में स्थित है?
- (A) आभानेरी
- (B) कुंभलगढ़ क्षेत्र
- (C) भाण्डारेज
- (D) ओसियां
झालीबाब बावड़ी कुंभलगढ़ क्षेत्र में स्थित है। यह बावड़ी अपनी अनूठी संरचना और ऐतिहासिक महत्त्व के कारण जानी जाती है। कुंभलगढ़ क्षेत्र में स्थित कई बावड़ियाँ न केवल जल स्रोत के रूप में बल्कि स्थापत्य कला के उदाहरण के रूप में भी प्रसिद्ध हैं।
राजस्थान में जल स्थापत्य (तालाब एवं बावड़ी) MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6
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