राजस्थान में जल स्थापत्य (तालाब एवं बावड़ी) MCQ Questions with Answers

राजस्थान में जल स्थापत्य (तालाब एवं बावड़ी) MCQ (Water Architecture (Ponds and Stepwells) in Rajasthan) – Part 4

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान में जल स्थापत्य (तालाब एवं बावड़ी) से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं।

इन प्रश्नों में भाण्डारेज बावड़ी दौसा, नौलखा बावड़ी डूंगरपुर, ख्वाजा बावड़ी टोंक, एंजन बावड़ी जोधपुर, पन्ना मीणा की बावड़ी जयपुर, खाटन बावड़ी चित्तौड़गढ़ दुर्ग, बड़गाँव की बावड़ी कोटा, पर्चा बावड़ी रूणेचा (जैसलमेर), डाकणिया बावड़ी लवाण (दौसा), सुगदा की बावड़ी जोधपुर आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान में जल स्थापत्य (तालाब एवं बावड़ी)
  • कुल प्रश्न: 20
  • Last Updated:

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61. नीमराणा की 9 मंजिला बावड़ी पर ₹5 का डाक टिकट कब जारी किया गया था?

  • (A) 29 दिसम्बर 2017
  • (B) 15 अगस्त 1947
  • (C) 26 जनवरी 1950
  • (D) 1 जनवरी 2017

नीमराणा (अलवर) की 9 मंजिला बावड़ी राजस्थान की सबसे सुंदर बावड़ियों में से एक है। इसके ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्त्व को ध्यान में रखते हुए 29 दिसम्बर 2017 को इस पर ₹5 का डाक टिकट जारी किया गया। यह बावड़ी राजस्थानी जल स्थापत्य का अद्भुत नमूना मानी जाती है।

62. भाण्डारेज बावड़ी (दौसा) का निर्माण किसने करवाया था?

  • (A) टोडरमल
  • (B) दीप सिंह
  • (C) चाँद राजा
  • (D) राव रूपाल

भाण्डारेज बावड़ी दौसा जिले में स्थित है, का निर्माण दीप सिंह ने करवाया था। यह बावड़ी स्थापत्य कला की दृष्टि से अत्यंत सुंदर है और आज भी स्थानीय जल संग्रहण प्रणाली में उपयोगी मानी जाती है। इसका निर्माण उस समय के जल संरक्षण के उत्कृष्ट ज्ञान को दर्शाता है।

63. नौलखा बावड़ी का निर्माण डूंगरपुर में किस वर्ष (ई.वी.) में करवाया गया था?

  • (A) 1587 ई.
  • (B) 1643 ई.
  • (C) 1699 ई.
  • (D) 1748 ई.

नौलखा बावड़ी डूंगरपुर का निर्माण महारावल आसकरण की रानी प्रेमल देवी ने वि.सं. 1643 (1587 ई.) में करवाया था। यह बावड़ी डूंगरपुर की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। इसकी बनावट राजस्थानी स्थापत्य शैली पर आधारित है और यह जल संचयन के साथ-साथ धार्मिक महत्त्व भी रखती है।

64. नौलखा बावड़ी में अंकित प्रशस्ति किस क्षेत्र के चौहान इतिहास का ज्ञान कराती है?

  • (A) मेवाड़
  • (B) मारवाड़
  • (C) वागड़
  • (D) ढूंढाड़

नौलखा बावड़ी में अंकित प्रशस्ति वागड़ क्षेत्र के चौहान इतिहास की जानकारी देती है। यह लेख उस समय के शासकों, स्थापत्य कार्यों और स्थानीय इतिहास पर प्रकाश डालता है। इस प्रशस्ति से वागड़ के राजवंशों और उनकी सांस्कृतिक विरासत का भी पता चलता है।

65. बड़े बांधों और नदियों की परियोजनाओं के कारण राजस्थान की कौनसी जल संरक्षण विधियाँ उपेक्षित हो गई हैं?

  • (A) नहरें
  • (B) परंपरागत प्रणालियाँ जैसे नाड़ी, टाँका, बावड़ी
  • (C) लिफ्ट परियोजनाएँ
  • (D) सिंचाई प्रणालियाँ

राजस्थान में पहले नाड़ी, टाँका, बावड़ी, टोबा और खड़ीन जैसी परंपरागत जल संरक्षण प्रणालियाँ प्रचलित थीं। लेकिन बड़े बांधों और नदी परियोजनाओं के आने के बाद ये प्रणालियाँ उपेक्षित हो गईं। ये पारंपरिक विधियाँ पर्यावरण के अनुकूल थीं और स्थानीय जरूरतों को पूरा करती थीं।

66. निम्नलिखित में से कौनसा जल संरक्षण की पारंपरिक प्रणाली नहीं है?

  • (A) टाँका
  • (B) खड़ीन
  • (C) जोहड़
  • (D) नाली

टाँका, खड़ीन, जोहड़, बावड़ी, तालाब आदि पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियाँ हैं जो राजस्थान में सदियों से प्रचलित हैं। लेकिन नालीआधुनिक जल निकासी प्रणाली है, जिसे जल संग्रहण के लिए नहीं, बल्कि जल निकास के लिए उपयोग किया जाता है। इसलिए यह पारंपरिक प्रणाली नहीं मानी जाती।

67. खड़ीन जल संरक्षण प्रणाली विशेषकर किसके द्वारा जैसलमेर में विकसित की गई थी?

  • (A) चौहानों द्वारा
  • (B) हाड़ा राजाओं द्वारा
  • (C) पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा
  • (D) भीलों द्वारा

खड़ीन प्रणाली राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र में पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा विकसित की गई थी। यह जल संचयन की एक उत्कृष्ट तकनीक है, जिसमें वर्षा का पानी खेतों में रोककर मिट्टी में समाया जाता है। इस विधि से खेती योग्य भूमि में नमी बनी रहती है और सूखे क्षेत्रों में फसल उगाने में सहायता मिलती है।

68. हाड़ी रानी की बावड़ी, टोडारायसिंह (टोंक) में, किसने बनवाई थी?

  • (A) रानी नाथावती
  • (B) रानी प्रेमल देवी
  • (C) टोडा नरेश राव रूपाल की पत्नी (हाड़ी रानी)
  • (D) अनारकली दासी

हाड़ी रानी की बावड़ी का निर्माण टोडा नरेश राव रूपाल की पत्नी हाड़ी रानी द्वारा करवाया गया था, जो देवा हाड़ा की राजकुमारी थीं। यह बावड़ी टोंक जिले के टोडारायसिंह में स्थित है। यह स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है और हाड़ी रानी के बलिदान और साहस की याद दिलाती है, जिन्होंने देशभक्ति की मिसाल पेश की थी।

69. चाँद बावड़ी का निर्माण प्रतिहार राजा चाँद ने किस शताब्दी में करवाया था?

  • (A) 12वीं शताब्दी
  • (B) 8वीं शताब्दी
  • (C) 10वीं शताब्दी
  • (D) 15वीं शताब्दी

चाँद बावड़ी का निर्माण प्रतिहार राजा चाँद ने 8वीं शताब्दी में करवाया था। यह बावड़ी आभानेरी (दौसा) में स्थित है और भारत की सबसे बड़ी तथा गहरी बावड़ियों में से एक मानी जाती है। इसके चारों ओर लगभग 3500 सीढ़ियाँ हैं, जो इसे स्थापत्य दृष्टि से अत्यंत आकर्षक बनाती हैं।

70. ख्वाजा बावड़ी राजस्थान के किस जिले में स्थित है?

  • (A) जोधपुर
  • (B) दौसा
  • (C) टोंक
  • (D) भीलवाड़ा

ख्वाजा बावड़ी टोंक जिले में स्थित है। यह बावड़ी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसका नाम “ख्वाजा” सूफी परंपरा से जुड़ा है। टोंक में यह बावड़ी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्त्व रखती है।

71. निम्नलिखित में से कौनसी बावड़ी जोधपुर जिले में स्थित है?

  • (A) ख्वाजा बावड़ी
  • (B) उदय बावड़ी
  • (C) एंजन बावड़ी
  • (D) बड़गाँव की बावड़ी

एंजन बावड़ी जोधपुर जिले में स्थित है। यह और कांतन बावड़ी दोनों ही जोधपुर की प्रमुख बावड़ियाँ हैं, जो जल संरक्षण और वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। जबकि ख्वाजा बावड़ी टोंक में स्थित है।

72. उदय बावड़ी का निर्माण किस शासक ने करवाया था?

  • (A) राव रूपाल
  • (B) महारावल उदयसिंह
  • (C) राव राजा अनिरुद्ध
  • (D) टोडरमल

उदय बावड़ी का निर्माण महारावल उदयसिंह द्वारा डूंगरपुर में करवाया गया था। यह बावड़ी स्थानीय निवासियों के लिए जल स्रोत के रूप में उपयोग की जाती थी। इसकी संरचना राजस्थानी स्थापत्य शैली का सुंदर उदाहरण है और यह डूंगरपुर की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है।

73. पन्ना मीणा की बावड़ी राजस्थान के किस जिले में स्थित है?

  • (A) उदयपुर
  • (B) दौसा
  • (C) बूंदी
  • (D) जयपुर

पन्ना मीणा की बावड़ी जयपुर के आमेर क्षेत्र में स्थित है। यह बावड़ी अपनी समानांतर सीढ़ियों और जल स्तर के संतुलन के लिए प्रसिद्ध है। इसे स्थानीय लोग “पन्ना मीणा का कुंड” भी कहते हैं और यह आज एक प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।

74. खातन बावड़ी राजस्थान के किस दुर्ग में स्थित है?

  • (A) जयगढ़ दुर्ग
  • (B) चित्तौड़गढ़ दुर्ग
  • (C) कुंभलगढ़ दुर्ग
  • (D) गागरोन दुर्ग

खाटन बावड़ी चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित है। यह दुर्ग के अंदर स्थित ऐतिहासिक बावड़ियों में से एक है, जो जल संरक्षण और सुरक्षा के लिए बनाई गई थी। चित्तौड़गढ़ दुर्ग की ये बावड़ियाँ राजपूत काल की वास्तुकला और जल प्रबंधन प्रणाली का श्रेष्ठ उदाहरण हैं।

75. बड़गाँव की बावड़ी राजस्थान के किस जिले में स्थित है?

  • (A) बूंदी
  • (B) झालावाड़
  • (C) कोटा
  • (D) बारां

बड़गाँव की बावड़ी कोटा जिले में स्थित है। यह प्राचीन जल संरचना अपने गहरे जलकुंड और सीढ़ियों के सुंदर डिजाइन के लिए प्रसिद्ध है। कोटा क्षेत्र में यह बावड़ी स्थानीय लोगों के लिए पेयजल स्रोत रही है और इसका ऐतिहासिक महत्व भी है।

76. पर्चा बावड़ी राजस्थान में कहाँ स्थित है?

  • (A) नाडोल
  • (B) रूणेचा (जैसलमेर)
  • (C) बाड़मेर
  • (D) लवाण (दौसा)

पर्चा बावड़ी रूणेचा (जैसलमेर) में स्थित है। यह स्थान बाबा रामदेवजी से जुड़ा होने के कारण अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस बावड़ी का उपयोग पहले तीर्थयात्रियों द्वारा स्नान और जल ग्रहण के लिए किया जाता था, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

77. डाकणिया बावड़ी राजस्थान में कहाँ स्थित है?

  • (A) अलवर
  • (B) लवाण (दौसा)
  • (C) बूंदी
  • (D) टोंक

डाकणिया बावड़ी लवाण (दौसा) में स्थित है। यह ऐतिहासिक बावड़ी अपने स्थापत्य सौंदर्य और जल संचयन की दृष्टि से प्रसिद्ध है। दौसा जिले की बावड़ियाँ राजस्थान की पारंपरिक जल संरक्षण प्रणाली का प्रतीक हैं, जो आज भी स्थानीय संस्कृति का हिस्सा बनी हुई हैं।

78. निम्नलिखित में से कौनसी बावड़ी जोधपुर में स्थित है?

  • (A) उदय बावड़ी
  • (B) बाई राज की बावड़ी
  • (C) सुगदा की बावड़ी
  • (D) चमना बावड़ी

सुगदा की बावड़ी जोधपुर जिले की एक प्रसिद्ध बावड़ी है। यह स्थान अपनी ऐतिहासिक संरचनाओं और पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों के लिए जाना जाता है। जोधपुर में कई बावड़ियाँ थीं जो लोगों के दैनिक जल उपयोग का प्रमुख स्रोत रही हैं। सुगदा की बावड़ी आज भी राजस्थान की प्राचीन स्थापत्य कला का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।

79. बाई राज की बावड़ी राजस्थान के किस स्थान पर स्थित है?

  • (A) नाडोल
  • (B) बनेड़ा (भीलवाड़ा)
  • (C) मांडलगढ़
  • (D) ओसियां

बाई राज की बावड़ी बनेड़ा (भीलवाड़ा) में स्थित है। यह बावड़ी भीलवाड़ा जिले की प्रमुख ऐतिहासिक बावड़ियों में से एक है। पुराने समय में यह बावड़ी न केवल जल स्रोत के रूप में बल्कि लोगों के मिलने-जुलने का भी प्रमुख स्थान थी। आज भी यह राजस्थान की प्राचीन जल संरचनाओं की समृद्ध परंपरा को दर्शाती है।

80. मेड़तणी की बावड़ी किस जिले में स्थित है?

  • (A) सीकर
  • (B) चुरू
  • (C) झुंझुनूं
  • (D) नागौर

मेड़तणी की बावड़ी झुंझुनूं जिले में स्थित है। यह बावड़ी राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में पारंपरिक जल संचयन तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण है। झुंझुनूं की इस बावड़ी ने लंबे समय तक स्थानीय निवासियों की जल आवश्यकता पूरी की। आज भी यह क्षेत्र की स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है।

राजस्थान में जल स्थापत्य (तालाब एवं बावड़ी) MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6

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