
राजस्थान में मध्यकालीन प्रशासन व सामंती व्यवस्था MCQ | Latest Important Questions with Answers
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान में मध्यकालीन प्रशासन व सामंती व्यवस्था से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें राजवी हजुरथी देशरथी सरदार, राजवी गनायत सरदार खासचौकी, राजवी सरदार मुत्सद्दी गनायत, राजवी ताजीमी सरदार गनायत, भांभी या बलाई आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, Fireman, Woman Superwiser, REET तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान में मध्यकालीन प्रशासन व सामंती व्यवस्था
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- Content Type: Updated MCQ Practice Set
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1. जयपुर राज्य में प्रधानमंत्री के लिए किस शब्द का प्रयोग किया जाता था?
- (A) मुसाहिब
- (B) फौजदार
- (C) दीवान
- (D) कोतवाल
जयपुर राज्य में प्रधानमंत्री के लिए मुसाहिब शब्द का प्रयोग किया जाता था। मुसाहिब शासक का निकट सहयोगी होता था और प्रशासनिक कार्यों में प्रमुख भूमिका निभाता था। विभिन्न रियासतों में प्रधानमंत्री के लिए अलग-अलग पदनाम प्रचलित थे, जैसे कोटा में फौजदार कहा जाता था।
2. भाटों और चारणों को शासकों द्वारा दी गई जमीन जानी जाती थी?
- (A) चकरी
- (B) पुण्य-उदक
- (C) सनद
- (D) भोग
चारणों और भाटों को दी गई भूमि पुण्य-उदक कहलाती थी। यह दान स्वरूप दी जाती थी और सामान्यतः वापस नहीं ली जाती थी। उदक उथापै ताही उदक लागै नाही कहावत इसी परंपरा को दर्शाती है, जो राजस्थान की सामाजिक-धार्मिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण थी।
3. मध्य कालीन राजस्थानी समाज में शराब के एक प्रकार के लिए किस पद का प्रयोग किया जाता था?
- (A) इंडोर
- (B) मोफोर
- (C) दारू
- (D) आउटडोर
मध्यकालीन राजस्थानी समाज में मोफोर शब्द शराब के एक प्रकार के लिए प्रयुक्त होता था। उस समय विभिन्न प्रकार के स्थानीय शब्द प्रचलित थे जो सामाजिक जीवन और लोक संस्कृति को दर्शाते हैं। यह शब्द विशेष रूप से ग्रामीण एवं सामंती परिवेश में उपयोग में आता था।
4. भयाद अथवा भाईबंद की परंपरा का संबंध निम्न में से किससे है?
- (A) कर व्यवस्था
- (B) मनसबदारी
- (C) जागीर प्रणाली
- (D) भू-राजस्व
भयाद या भाईबंद परंपरा का संबंध जागीर प्रणाली से था। इसमें एक ही वंश या परिवार के सदस्यों को जागीरें प्रदान की जाती थीं। इससे सत्ता और संपत्ति परिवार के भीतर ही बनी रहती थी और प्रशासनिक नियंत्रण भी सुदृढ़ रहता था।
5. मारवाड़ में जागीरदारों की चार मुख्य श्रेणियाँ
- (A) राजवी, हजुरथी, देशरथी, सरदार
- (B) राजवी, गनायत, सरदार, खासचौकी
- (C) राजवी, सरदार, मुत्सद्दी, गनायत
- (D) राजवी, ताजीमी, सरदार, गनायत
मारवाड़ में जागीरदारों को चार मुख्य श्रेणियों—राजवी, सरदार, मुत्सद्दी और गनायत—में विभाजित किया गया था। यह वर्गीकरण उनके पद, अधिकार और प्रशासनिक भूमिका के आधार पर किया जाता था, जिससे शासन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।
6. निम्न में से कौन गाँव के चाकर होते थे, जो जागीरदार के लिए संदेश वाहक का कार्य करते थे?
- (A) भांभी या बलाई
- (B) कणवारिया
- (C) मीना / बावरी
- (D) दरोगा
भांभी या बलाई गाँव के चाकर होते थे जो संदेश वाहक का कार्य करते थे। ये लोग सफाई जैसे कार्य भी करते थे और ग्रामीण प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। जागीरदार और जनता के बीच संचार में इनकी विशेष भूमिका होती थी।
7. मारवाड़ में मृत पशुओं की कच्ची खालों पर लगने वाली एक प्रमुख लाग थी-
- (A) भावां लाग
- (B) तिवारा लाग
- (C) अखराई लाग
- (D) न्यौता लाग
मारवाड़ में मृत पशुओं की कच्ची खालों पर भावां लाग नामक कर लगाया जाता था। यह स्थानीय कर व्यवस्था का हिस्सा था, जिससे राज्य को आय प्राप्त होती थी। विभिन्न वस्तुओं पर अलग-अलग प्रकार की लागें लगाई जाती थीं।
8. लाटा अथवा लाटाई क्या था?
- (A) पट्टा में लिखा हुआ निर्धारित कर
- (B) भू-राजस्व व्यवस्था, जिसमें भुगतान फसल के रूप में होता था।
- (C) अनाज तैयार होने के बाद का बंटवारा
- (D) इनमें से कोई नहीं
लाटा या लाटाई एक प्रकार की भू-राजस्व व्यवस्था थी जिसमें कर का भुगतान नकद के बजाय फसल के रूप में किया जाता था। यह प्रणाली कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में प्रचलित थी और किसानों के लिए सुविधाजनक मानी जाती थी।
9. मेवाड़ में नए महाराणा का सिंहासनारोहण किस ठिकाने की सहमति से होता था?
- (A) बनेड़ा
- (B) शाहपुरा
- (C) सलूम्बर
- (D) बेदला
मेवाड़ में नए महाराणा के सिंहासनारोहण के लिए सलूम्बर ठिकाने की सहमति आवश्यक होती थी। सलूम्बर के सरदारों का विशेष महत्व था और वे उत्तराधिकार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
10. जयपुर राज्य में भूमि संबंधी रिकॉर्ड किस नाम से जाता था?
- (A) खसरा
- (B) तजकीरा
- (C) अड़सट्टा
- (D) छूट के कागद
जयपुर राज्य में भूमि संबंधी रिकॉर्ड को अड़सट्टा कहा जाता था। इसमें परगनों के गाँवों, भूमि, पैदावार आदि का विस्तृत विवरण होता था। यह राजस्व प्रशासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज था।
11. मुगल बादशाह द्वारा जारी शाही आदेश..... कहलाता था।
- (A) फरमान
- (B) परवाना
- (C) निशान
- (D) रूक्का
मुगल बादशाह द्वारा जारी आधिकारिक आदेश को फरमान कहा जाता था। यह सर्वोच्च स्तर का शाही आदेश होता था और पूरे साम्राज्य में इसका पालन अनिवार्य होता था।
12. राजा द्वारा अपने अधीनस्थ को जारी किया जाने वाला आदेश कहलाता था।
- (A) फरमान
- (B) मन्सूर
- (C) सनद
- (D) परवाना
राजा द्वारा अपने अधीनस्थ अधिकारियों को जारी आदेश को परवाना कहा जाता था। यह प्रशासनिक आदेश होता था, जो स्थानीय स्तर पर कार्यों के संचालन के लिए जारी किया जाता था।
13. खाती, लुहार, नाई, धोबी आदि को धान की ढेरी में से कुछ मुट्ठियों अनाज देने का रिवाज किस रियासत में था?
- (A) बीकानेर
- (B) मारवाड़
- (C) कोटा
- (D) जयपुर
मारवाड़ में यह प्रथा प्रचलित थी कि खाती, लुहार, नाई, धोबी आदि को धान की ढेरी से कुछ अनाज दिया जाता था। इसके साथ ही मंदिरों को भी भेंट स्वरूप अनाज देना निर्धारित था, जो सामाजिक सहयोग की परंपरा को दर्शाता है।
14. बादशाह की मौजूदगी में शहजादे द्वारा जारी किया गया शाही आदेश कहलाता था।
- (A) निशान
- (B) मन्सूर
- (C) रूक्का
- (D) खरीता
बादशाह की उपस्थिति में शहजादे द्वारा जारी आदेश को मन्सूर कहा जाता था। यह आदेश शाही अधिकार का प्रतीक होता था और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता था।
15. जब तब बंटाई नहीं होती थी, तब तक खलिहान में रखे धान की चौकीदारी का कार्य किसका होता था?
- (A) मीणा व बावरी
- (B) पटवारी व कामदार
- (C) बलाई व सहणा
- (D) पटरवारी व हवालदार
बंटाई होने तक खलिहान में रखे धान की चौकीदारी का कार्य बलाई व सहणा करते थे। सामान्य परिस्थितियों में चौकीदारी मीणा व बावरी करते थे, लेकिन विशेष स्थिति में यह जिम्मेदारी बलाई व सहणा को दी जाती थी।
16. मुगल बादशाह द्वारा अपने अधीनस्थ को जागीर प्रदान करने की लिखित स्वीकृति क्या कहलाती थी?
- (A) सनद
- (B) रूक्का
- (C) वाकया
- (D) निशान
मुगल शासन में जागीर प्रदान करने की लिखित स्वीकृति को सनद कहा जाता था। यह आधिकारिक दस्तावेज होता था जो जागीरदार के अधिकारों को प्रमाणित करता था और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण था।
17. परगना प्रशासन में शासकीय व न्याय सम्बन्धी कार्यों के लिए नियुक्त सर्वोच्च अधिकारी था-
- (A) ओहदेदार
- (B) हाकिम
- (C) पोतदार
- (D) आमील
परगना स्तर पर प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों के लिए हाकिम सर्वोच्च अधिकारी होता था। इसकी नियुक्ति सीधे महाराजा द्वारा की जाती थी और यह प्रशासन का प्रमुख प्रतिनिधि होता था।
18. प्रशासन की सबसे छोटी इकाई गाँव थी, जिसे कहा जाता था-
- (A) चीरा
- (B) तपो
- (C) मौजा
- (D) जागीर
प्रशासन की सबसे छोटी इकाई गाँव को मौजा कहा जाता था। राजस्व वसूली की सुविधा के लिए परगनों को तपो में विभाजित किया जाता था, जो गाँवों का समूह होता था।
19. राज्य/राजा के सीधे स्वामित्व की भूमि कहलाती थी-
- (A) खालसा
- (B) हवाला
- (C) जागीर
- (D) भोम
राज्य या राजा के सीधे स्वामित्व वाली भूमि को खालसा कहा जाता था। यह भूमि अधिक उपजाऊ होती थी और इसका नियंत्रण सीधे राज्य के पास रहता था, जिसका प्रबंधन दीवान द्वारा किया जाता था।
20. किसी मन्दिर, मठ या धार्मिक स्थान को दान में दी गई भूमि कहलाती थी?
- (A) इनाम
- (B) भोम
- (C) डोहली
- (D) मजारा
मंदिर, मठ या अन्य धार्मिक संस्थानों को दान में दी गई भूमि डोहली कहलाती थी। यह धार्मिक उद्देश्यों के लिए दी जाती थी और सामान्यतः इस पर कर नहीं लगाया जाता था, जिससे धार्मिक संस्थानों का संचालन सुचारु रूप से हो सके।
21. लगान वसूल करने की वह प्रणाली जिसमें खेत में खड़ी फसल का अनुमान लगाकर राज्य का हिस्सा तय किया जाता था?
- (A) लाटा
- (B) कुंता
- (C) बंटाई
- (D) जब्ती
कुंता प्रणाली में खेत में खड़ी फसल का अनुमान लगाकर लगान निर्धारित किया जाता था। इसे कांकड़ कुंता भी कहा जाता था। इस पद्धति में वास्तविक उत्पादन से पहले ही राज्य का हिस्सा तय कर लिया जाता था, जिससे प्रशासन को अनुमानित राजस्व प्राप्त हो सके।
22. मेवाड़ क्षेत्र के किसानों से लगान या अदायगी के लिए राज्य द्वारा स्थानीय महाजन से आश्वासन लिया जाता था यह प्रथा कहलाती थी?
- (A) इजारा प्रणाली
- (B) घुघरी
- (C) साद प्रथा
- (D) मुकाता
मेवाड़ में साद प्रथा के अंतर्गत राज्य किसानों से लगान वसूली के लिए स्थानीय महाजन से आश्वासन लेता था। महाजन किसानों की ओर से भुगतान की गारंटी देता था, जिससे राज्य को राजस्व सुनिश्चित रूप से प्राप्त हो सके।
23. महाराजा तख्त सिंह द्वारा किस वर्ष अध्यादेश जारी कर सामंतों द्वारा भूमिदान में देना अवैध घोषित किया गया-
- (A) 1850
- (B) 1750
- (C) 1845
- (D) 1745
महाराजा तख्त सिंह ने 30 मई, 1850 को एक अध्यादेश जारी किया, जिसमें सामंतों द्वारा भूमिदान देना अवैध घोषित किया गया। इस निर्णय का उद्देश्य भूमि व्यवस्था को नियंत्रित करना और अनियंत्रित दान को रोकना था।
24. बीकानेर राज्य में सामन्त कितने भागों में विभाजित थे?
- (A) 4
- (B) 2
- (C) 3
- (D) 1
बीकानेर राज्य में सामंतों को तीन भागों में विभाजित किया गया था। यह विभाजन उनके अधिकार, कर्तव्यों और प्रशासनिक स्थिति के आधार पर किया जाता था, जिससे शासन व्यवस्था को व्यवस्थित रखा जा सके।
25. निम्न में से कौनसा कूट (रियासत - शासक) सुमेलित नहीं है?
- (A) मारवाड़ राज्य में गृहकर कहलाता था - घर गिनती
- (B) जयपुर राज्य में गृहकर कहलाता था- घर की बिछीती
- (C) बीकानेर राज्य में गृहकर कहलाता था- धुँआ भाछ
- (D) मेवाड़ राज्य में गृहकर कहलाता था- घर बराड़
मेवाड़ राज्य में गृहकर घर गिनती बराड़ कहलाता था, न कि केवल घर बराड़। जबकि घर बराड़ शब्द कोटा राज्य में प्रचलित था। इसलिए दिया गया संयोजन असंगत है।
26. जोधपुर राज्य में विधवा के पुनर्विवाह पर लिया जाने वाला कर था?
- (A) नाता बराड़
- (B) नाता कागली
- (C) कागली
- (D) जेली राशि
जोधपुर राज्य में विधवा के पुनर्विवाह पर कागली नामक कर लिया जाता था। इसे नाता कर भी कहा जाता था और प्रति विवाह एक रुपये की दर से लिया जाता था, जो सामाजिक प्रथाओं से जुड़ा हुआ था।
27. मेवाड़ और जैसलमेर राज्यों में माल के आयात व निर्यात पर लगाया जाने वाला कर था?
- (A) राहदारी
- (B) गनीम बराड़
- (C) दाण
- (D) राली लाग
मेवाड़ और जैसलमेर में आयात-निर्यात पर दाण नामक कर लगाया जाता था। यह व्यापारिक कर था, जिससे राज्य को राजस्व प्राप्त होता था और व्यापारिक गतिविधियों को नियंत्रित किया जाता था।
28. पशुओं की बिक्री के समय वसूली जाने वाली लाग थी?
- (A) सिंगोटी
- (B) अखराई लाग
- (C) कांसा लाग
- (D) जाजम लाग
पशुओं की खरीद-बिक्री के समय सिंगोटी नामक लाग वसूली जाती थी। यह स्थानीय कर प्रणाली का हिस्सा था और पशु व्यापार से राज्य को आय प्राप्त करने का एक प्रमुख साधन था।
29. राजस्थान की सामंती व्यवस्था की तुलना किस विद्वान ने मध्ययुगीन युरोपीय सामंती पद्धति से की है?
- (A) कर्नल जेम्स टॉड
- (B) गोपीनाथ शर्मा
- (C) डी. डी. कौशाम्बी
- (D) कोवालस्की
कर्नल जेम्स टॉड ने राजस्थान की सामंती व्यवस्था की तुलना यूरोप की मध्ययुगीन सामंती प्रणाली से की थी। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कृति में राजस्थान की सामाजिक-राजनीतिक संरचना का विस्तृत वर्णन किया है।
30. जयपुर राज्य में उत्तराधिकार शुल्क को किस नाम से जाना जाता था?
- (A) पेशकशी
- (B) नजराना
- (C) कैदखालसा
- (D) हुक्मनामा
जयपुर राज्य में उत्तराधिकार शुल्क को नजराना कहा जाता था। यह शुल्क उत्तराधिकारी द्वारा गद्दी संभालते समय दिया जाता था। अन्य रियासतों में इसके अलग नाम थे, जैसे जोधपुर में पेशकशी और बाद में हुक्मनामा।
31. राजस्थान की वह एकमात्र रियासत जहाँ उत्तराधिकार शुल्क नहीं लिया जाता था ?
- (A) बीकानेर
- (B) कोटा
- (C) जैसलमेर
- (D) किशनगढ़
जैसलमेर वह एकमात्र रियासत थी जहाँ उत्तराधिकार शुल्क नहीं लिया जाता था। यह इसकी विशिष्ट प्रशासनिक परंपरा को दर्शाता है, जो अन्य राज्यों से भिन्न थी।
32. मेवाड़ में द्वितीय श्रेणी के सामन्त क्या कहलाते थे?
- (A) उमराव
- (B) बत्तीस के सरदार
- (C) गोल
- (D) गनायत
मेवाड़ में सामंतों को विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया था, जिसमें द्वितीय श्रेणी के सामंत बत्तीस के सरदार कहलाते थे। यह वर्गीकरण उनके पद और महत्व के अनुसार किया गया था।
33. किस राज्य में सामंतों का विभाजन बारह कोटड़ी पर आधारित वा?
- (A) जयपुर
- (B) मेवाड़
- (C) मारवाड़
- (D) कोटा
जयपुर राज्य में सामंतों का विभाजन बारह कोटड़ी के आधार पर किया गया था। यह व्यवस्था कच्छवाहा शासक पृथ्वीराज के 12 पुत्रों से संबंधित थी, जिनके नाम पर स्थायी जागीरें स्थापित की गई थीं।
34. उमराव किस रियासत के सामंत थे?
- (A) जयपुर
- (B) मेवाड़
- (C) मारवाड़
- (D) कोटा
उमराव मेवाड़ राज्य के प्रथम श्रेणी के सामंत थे। इनकी संख्या सोलह थी और ये राज्य के सबसे प्रतिष्ठित सरदार माने जाते थे, जो प्रशासन और युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
35. कोटा राज्य में सामंत कितनी श्रेणियों में विभाजित थे?
- (A) 4
- (B) 3
- (C) 2
- (D) 5
कोटा राज्य में सामंत दो श्रेणियों—देशथी और हजूरथी—में विभाजित थे। यह वर्गीकरण उनके कार्य और राज्य से संबंध के आधार पर किया गया था, जिससे प्रशासनिक कार्यों का संचालन सुचारु रूप से हो सके।
36. 19 वीं सदी के प्रथम इतिहासकार जिन्होंने राजस्थान की सामंतवादी व्यवस्था के बारे में लिखा, वह थे-
- (A) डॉ. ओझा
- (B) कर्नल टॉड
- (C) टेस्सीटोरी
- (D) दशरथ शर्मा
19वीं सदी में कर्नल टॉड पहले इतिहासकार थे जिन्होंने राजस्थान की सामंतवादी व्यवस्था का विस्तृत वर्णन किया। उनकी कृति Annals and Antiquities of Rajasthan ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
37. मुगल परिपाटी के अनुसार सामन्तों की जागीर की वार्षिक उपज का अनुमान क्या कहलाता था?
- (A) उत्तराधिकारी शुल्क
- (B) न्योता शुल्क
- (C) रेख
- (D) तलवार बंधाई
मुगल प्रशासन में जागीर की वार्षिक आय के अनुमान को रेख कहा जाता था। यह अनुमान राजस्व निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण होता था और जागीरदार की आय एवं दायित्व तय करने में सहायक था।
38. राजस्थान की रियासतों में प्रशासन का संचालन करने वाला अधिकारी क्या कहलाता था?
- (A) पालाध्यक्ष
- (B) मुत्सद्दी
- (C) खानसामान
- (D) प्याद बख्शी
राजस्थान की रियासतों में प्रशासनिक कार्यों का संचालन मुत्सद्दी द्वारा किया जाता था। यह अधिकारी विभिन्न विभागों का प्रबंधन करता था और शासन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
39. मारवाड़ व बीकानेर राज्यों में परगने का मुख्य अधिकारी हाकिम होता था, इसी प्रकार कोटा राज्य में परगने का प्रधान अधिकारी क्या कहलाता था?
- (A) पोतदार
- (B) फौजदार
- (C) हवालगिर
- (D) हवलदार
कोटा राज्य में परगने के मुख्य अधिकारी को हवालगिर कहा जाता था। यह अधिकारी प्रशासनिक और राजस्व कार्यों का संचालन करता था, जबकि अन्य राज्यों में इसी पद को हाकिम या फौजदार कहा जाता था।
40. राज्य प्रशासन में राजा के बाद निम्न में से किसकी सर्वाधिक महत्ता वी व उसको राज्य की रीढ़ की हड्डी माना जाता था?
- (A) फौजदार
- (B) सेनापति
- (C) सामन्त
- (D) किलेदार
राज्य प्रशासन में राजा के बाद सामंत सबसे महत्वपूर्ण माने जाते थे। उन्हें राज्य की रीढ़ की हड्डी कहा जाता था क्योंकि वे प्रशासन, सैन्य सहायता और राजस्व व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते थे।
41. निम्नलिखित में से कौनसा कथन असत्य है-
- (A) मेवाड़ में नगर प्रशासन का अधिकारी शिकदार होता था।
- (B) जोधपुर में नगर प्रशासन का अधिकारी शिकदार होता था जिसे कालांतर में कोतवाल के नाम से जाना जाने लगा।
- (C) धर्म तथा दान संबंधी कार्यों के लिए एक पृथक विभाग होता था जिसे धर्मार्थ विभाग कहा जाता था।
- (D) उदयपुर में धर्मार्थ विभाग के अध्यक्ष को 'दानाध्यक्ष' कहा जाता था।
मेवाड़ राज्य में शिकदार पद का उल्लेख नहीं मिलता। वहाँ नगर प्रशासन का मुख्य अधिकारी कोतवाल होता था। अन्य कथन सही हैं, क्योंकि जोधपुर में शिकदार बाद में कोतवाल कहलाने लगा तथा धर्मार्थ विभाग और दानाध्यक्ष का उल्लेख भी ऐतिहासिक रूप से सही है।
42. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिये तथा नीचे दिये गये कूटों में से सही उत्तर का चुनाव कीजिए: 4 परगना में शासकीय तथा न्याय संबंधी अधिकारी - i. दरोगा-ए-फरासरखाना B. डाक प्रबंध के कार्य का अधिकारी - ii. दरोगा-ए-डाकचौकी C. सामान के विभाग का अध्यक्ष - iii. हाकिम D. चूंगी वसूली के कार्य का अधिकारी - iv. दरोगा-ए-सायर
- (A) i, ii, iii, iv
- (B) ii, i, iv, iii
- (C) iii, ii, i, iv
- (D) iii, ii, iv, i
सही सुमेल इस प्रकार है—परगना का शासकीय व न्याय अधिकारी हाकिम (iii), डाक प्रबंध अधिकारी दरोगा-ए-डाकचौकी (ii), सामान विभाग का अध्यक्ष दरोगा-ए-फरासरखाना (i) तथा चूंगी वसूली अधिकारी दरोगा-ए-सायर (iv) होता था। इसलिए सही कूट (iii, ii, iv, i) है।
43. मध्यकालीन प्रशासन व्यवस्था में वित्त विभाग का सचिव किस नाम से जाना जाता था?
- (A) दरोगा-ए-आबदार
- (B) दरोगा-ए-सायर
- (C) मुशरीफ
- (D) शिकदार
मध्यकालीन प्रशासन में मुशरीफ वित्त विभाग का सचिव होता था। यह अधिकारी आय-व्यय का लेखा-जोखा रखता था तथा राजस्व व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
44. राजा की अनुपस्थिति में राज्य प्रशासन की बागडोर दीवान के हाथों में रहती थी तब उसे क्या कहा जाता था?
- (A) अमीन
- (B) देश दीवान
- (C) दरोगा मुशरिफ
- (D) आमिल
जब राजा अनुपस्थित होता था, तब दीवान को पूर्ण प्रशासनिक अधिकार मिल जाते थे और उसे दरोगा मुशरिफ कहा जाता था। वह राज्य के वित्त और प्रशासन दोनों का संचालन करता था।
45. मेवाड़ में प्रत्येक बड़े नगर में एक 'नगर सेठ' होता था जिसे किस पद पर मनोनीत किया जाता था?
- (A) साहूकार
- (B) पटवारी
- (C) न्यायाधीश
- (D) चौधरी या पटेल
मेवाड़ में नगर सेठ को न्यायाधीश के पद पर नियुक्त किया जाता था। वह व्यापारिक विवादों और स्थानीय मामलों का निपटारा करता था, जिससे नगर प्रशासन में संतुलन बना रहता था।
46. निम्न में से किस प्रणाली के तहत् अधिक बोली लगाने वाले किसान को भूमि ठेके पर दी जाती थी, जिससे राज्य को अधिक राजस्व की प्राप्ति होती थी?
- (A) मुकाता प्रणाली
- (B) बीज घुघरी
- (C) लाटा प्रणाली
- (D) इजारा प्रणाली
इजारा प्रणाली में भूमि ठेके पर उस किसान को दी जाती थी जो अधिक बोली लगाता था। इससे राज्य को अधिक राजस्व प्राप्त होता था, लेकिन किसानों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता था, जिससे उनकी स्थिति प्रभावित होती थी।
47. अधिकारियों के पशुओं की चराई के लिए कौनसा कर लिया जाता था?
- (A) नाली
- (B) सिराणा
- (C) खूंटा
- (D) हुजदार
अधिकारियों के पशुओं की चराई के लिए खूंटा कर लिया जाता था। यह कर पशुओं को बांधने या चराने के अधिकार के बदले लिया जाता था और यह स्थानीय कर व्यवस्था का हिस्सा था।
48. खानवा युद्ध के बाद राजपुताना में भी तोपखाने खोले गए। यहाँ तोपे मुख्यतः कितने प्रकार की होती थी?
- (A) 4
- (B) 3
- (C) 5
- (D) 2
खानवा युद्ध के बाद राजपूताना में तोपखानों का विकास हुआ। यहाँ मुख्यतः दो प्रकार की तोपें होती थीं—जिन्सी और दस्ती। जिन्सी भारी तोपें होती थीं, जबकि दस्ती हल्की और चलाने में आसान होती थीं।
49. निम्न कथनों पर विचार करें- (1) 'खेड़ खर्च' सेना के नाम से लिया जाने वाला कर था। (2) जयपुर में 'दस्तुर-उल-अमल' में राजस्व दरें दर्ज होती थीं। (3) मेवाड़ में जागीरदार अपनी आय का 1/6 भाग 'छटूंद' के रूप में देता था। (4) बंटाई तक धान की चौकीदारी बलाई व सहणा करते थे। सही कूट का चयन करें-
- (A) Fri Jan 02 2026 00:00:00 GMT+0530 (India Standard Time)
- (B) 2,3,4
- (C) Wed Mar 04 2026 00:00:00 GMT+0530 (India Standard Time)
- (D) 1, 2, 3, 4
सभी कथन सही हैं। खेड़ खर्च सेना हेतु कर था, दस्तुर-उल-अमल में राजस्व दरें दर्ज होती थीं, मेवाड़ में छटूंद के रूप में 1/6 आय दी जाती थी तथा बंटाई तक धान की चौकीदारी बलाई और सहणा करते थे।
50. राजस्थान में विभिन्न रियासतों में कवियों, दरबारियों व अन्य श्रेष्ठ व्यक्तियों को राजपरिवार की तरफ से सम्मान / पुरस्कार दिया जाता था जिसे 'सिरोपाव' कहा जाता था, मारवाड़ का सर्वोच्च सिरोपाव था?
- (A) घोड़ा सिरोपाव
- (B) हाथी सिरोपाव
- (C) कड़ा दुशाला सिरोपाव
- (D) मदील सिरोपाव
मारवाड़ में हाथी सिरोपाव सर्वोच्च सम्मान माना जाता था। यह विशेष अवसरों पर उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दिया जाता था और यह राजकीय सम्मान का उच्चतम प्रतीक था, जो प्राप्तकर्ता की प्रतिष्ठा को दर्शाता था।
51. किस राज्य में प्रथम व द्वितीय श्रेणी के सामन्त 'आसामीदार चाकर पट्टायत' कहलाते थे, इन्हें ये जागीरे वंशानुगत प्राप्त थी ?
- (A) जोधपुर
- (B) बीकानेर
- (C) जयपुर
- (D) मेवाड़
बीकानेर राज्य में प्रथम व द्वितीय श्रेणी के सामन्त आसामीदार चाकर पट्टायत कहलाते थे। इन्हें जागीरें वंशानुगत रूप से प्राप्त होती थीं, जिससे उनका राज्य के प्रति स्थायी संबंध बना रहता था और प्रशासनिक स्थिरता बनी रहती थी।
52. राजपूत सरदार महल या झाँपड़ी के बदले कोटड़ी शब्द को अधिक सम्मान सूचक मानते थे। जयपुर राज्य के किस शासक के समय से ही जागीरदारों को 'कोटड़ी' कहा जाने लगा था?
- (A) मानसिंह
- (B) भारमल
- (C) जयसिंह
- (D) प्रतापसिंह
जयपुर राज्य में भारमल के समय से जागीरदारों को कोटड़ी कहा जाने लगा। कोटड़ी शब्द को सम्मानजनक माना जाता था और यह जागीरदारों की प्रतिष्ठा को दर्शाता था।
53. कोटा राज्य में 'हजूरथी' सामन्त किस श्रेणी के जागीरदार थे?
- (A) देश के जागीरदार
- (B) दरबार के जागीरदार
- (C) सामन्तों के चाकर
- (D) मुसलमान जागीरदार
कोटा राज्य में हजूरथी सामन्त दरबार से संबंधित जागीरदार होते थे। इनमें महाराव के निकट व दूर के संबंधी शामिल होते थे, जो सीधे दरबार से जुड़े रहते थे और विशेष महत्व रखते थे।
54. जब कोई जागीरदार / सरदार राजा के समक्ष उपस्थित होता था तब उसके आने व जाने के समय राजा खड़ा होकर उसका अभिवादन करता था, यह अभिवादन क्या कहलाता था?
- (A) ताजीम
- (B) बांह पसाव
- (C) इकहरी ताजीम
- (D) दोहरी ताजीम
जब राजा सरदार के आने और जाने दोनों समय खड़ा होकर अभिवादन करता था, तो इसे दोहरी ताजीम कहा जाता था। जबकि इकहरी ताजीम में केवल आने पर ही सम्मान दिया जाता था। यह परंपरा सामन्तों के सम्मान को दर्शाती थी।
55. वे घुड़सवार जो अपने अस्त्र-शस्त्र, घोड़ा व अन्य साजो-सामान की व्यवस्था स्वयं ही करते थे तथा इन्हें युद्ध के समय ही भर्ती किया जाता था, उन्हें क्या कहते थे?
- (A) शुरतनाल
- (B) जमीयत
- (C) सिलेदार
- (D) अहदी
सिलेदार वे घुड़सवार सैनिक होते थे जो अपने हथियार, घोड़ा और अन्य साजो-सामान स्वयं रखते थे। इन्हें आवश्यकता अनुसार युद्ध के समय भर्ती किया जाता था और ये सैनिक स्वतंत्र रूप से सेवा देते थे।
56. गांव में राज्य द्वारा वसूले जाने वाले राजस्व का हिसाब रखने वाले कर्मचारी को क्या कहा जाता था?
- (A) कणवारिया
- (B) तफेदार
- (C) सहणा
- (D) तजकीरा
गांव स्तर पर राजस्व का हिसाब रखने वाला कर्मचारी तफेदार कहलाता था। यह व्यक्ति आय-व्यय का लेखा रखता था और राज्य के राजस्व प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
57. मेवाड़ राज्य में जागीरदार अपनी आय का एक बट्टा छह भाग शासक को देता था, इसे किस नाम से जाना जाता था?
- (A) खरड़ा
- (B) सिराणा
- (C) खारखार
- (D) छटूंद
मेवाड़ में जागीरदार अपनी आय का 1/6 भाग शासक को देते थे, जिसे छटूंद कहा जाता था। यह राजस्व प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा था और इससे राज्य को नियमित आय प्राप्त होती थी।
58. मध्यकाल में वह कौनसी लाग की प्रथा थी, जिसमें प्रायः उपज का एक बट्टे तीन भाग पर राज्य का अधिकार होता था, जिसे 'भाओली' भी कहा जाता था?
- (A) बीघोड़ी
- (B) जब्ती
- (C) लाटा
- (D) गल्ला बक्शी
गल्ला बक्शी प्रणाली को भाओली भी कहा जाता था। इसमें उपज का लगभग एक-तिहाई भाग राज्य को दिया जाता था। इसे बंटाई या दानाबंदी भी कहा जाता था और इसमें खेत, लंक व रास बंटाई के आधार पर राजस्व तय होता था।
59. निम्नलिखित युग्मों को सुमेलित कीजिए- सत्य कूट का चयन करें- (A) शाही परिवार के किसी सदस्य द्वारा किसी मनसबदार को अपनी मुहर के साथ जारी किया जाने वाला आदेश - (i) फरमान (B) मुगल बादशाह द्वारा जारी शाही आदेश - (ii) परवाना (C) राजा द्वारा अपने अधीनस्थ को जारी किया जाने वाला आदेश - (iii) रूक्का (D) राज्य के अधिकारियों के मध्य होने वाला पत्र व्यवहार - (iv) निशान
- (A) iv, i, ii, iii
- (B) iii, ii, iii, iv
- (C) ii, i, iv, iii
- (D) iv, i, ii, iii
सही मिलान इस प्रकार है—शाही सदस्य का आदेश निशान (iv), मुगल बादशाह का आदेश फरमान (i), राजा का आदेश परवाना (ii) तथा अधिकारियों के बीच पत्र व्यवहार रूक्का (iii) कहलाता था। इसलिए सही कूट (iv, i, ii, iii) है।
60. राज्य के खजाने में जमा व खर्च की रकम का ब्यौरा रखने वाले अधिकारी को क्या कहा जाता था?
- (A) मीर मुंशी
- (B) खजांची
- (C) पुरोहित
- (D) खानसामां
राज्य के खजाने से संबंधित आय-व्यय का हिसाब रखने वाले अधिकारी को खजांची कहा जाता था। यह वित्तीय प्रबंधन का प्रमुख अधिकारी होता था और राज्य की आर्थिक व्यवस्था को नियंत्रित करता था।
61. निम्नलिखित में से असत्य कथन नहीं है?
- (A) एक राजा का दूसरे राजा के साथ किया जाने वाला पत्र व्यवहार रूक्का कहलाता था ।
- (B) बादशाह की मौजूदगी में शहजादे द्वारा जारी किया गया शाही आदेश- मन्सूर कहलाता था।
- (C) मुगल बादशाह द्वारा अपने अधीनस्थ को जागीर प्रदान करने की लिखित स्वीकृति वाकया कहलाती थी।
- (D) राजा द्वारा अपने अधीनस्थ को जारी किया जाने वाला आदेश फरमान कहलाता था ।
सही कथन विकल्प (2) है। शहजादे द्वारा बादशाह की उपस्थिति में जारी आदेश मन्सूर कहलाता था। अन्य कथन गलत हैं क्योंकि राजा-राजा के बीच पत्र व्यवहार खरीता, जागीर स्वीकृति सनद तथा राजा का आदेश परवाना कहलाता था।
62. गाँव की फसल की देखरेख करने वाला कर्मचारी क्या कहलाता था?
- (A) बलाई
- (B) भांभी
- (C) कणवारिया
- (D) याद्दाश्त
गाँव में फसल की सुरक्षा और देखरेख करने वाला कर्मचारी कणवारिया कहलाता था। यह खेतों की निगरानी करता था और फसल की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था, जिससे उत्पादन सुरक्षित रहे।
63. बंटाई प्रथा या गल्ला बक्शी प्रणाली में राजस्व निर्धारण तीन प्रकार से होता था, निम्न में से कौनसा एक प्रकार इसके अन्तर्गत नहीं आता ?
- (A) बिघोडी
- (B) खेत बंटाई
- (C) लंक बंटाई
- (D) रास बंटाई
बंटाई या गल्ला बक्शी प्रणाली में खेत बंटाई, लंक बंटाई और रास बंटाई तीन प्रमुख प्रकार थे। बिघोडी इस प्रणाली का हिस्सा नहीं था, इसलिए यह सही उत्तर है।
64. मध्यकालीन शासन व्यवस्था में मारवाड़ में बापीदार व गैर-वापीदार किसके प्रकार थे?
- (A) सामन्त
- (B) जागीरदार
- (C) कास्तकार
- (D) घुड़सवार
मारवाड़ में बापीदार और गैर-वापीदार किसान (कास्तकार) के प्रकार थे। यह वर्गीकरण उनके भूमि अधिकारों और खेती की स्थिति के आधार पर किया जाता था।
65. किसान को अपनी भूमि को गिरवी रखने या बेचने का अधिकार नहीं था, उस भूमि को क्या कहा जाता था?
- (A) बपौती
- (B) मजारा
- (C) जूनी जागीर
- (D) असली
जिस भूमि को किसान गिरवी या बेच नहीं सकता था, उसे मजारा कहा जाता था। इस प्रकार की भूमि पर किसान का पूर्ण स्वामित्व नहीं होता था और उस पर राज्य का नियंत्रण रहता था।
66. भूमि का एक प्रकार 'पसातिया' के बारे में कौनसा कथन सत्य नहीं है?
- (A) यह भूमि सभी प्रकार के लगानों से मुक्त होती थी।
- (B) यह भूमि राजा या जागीरदार द्वारा राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों को दी जाती थी।
- (C) सेवक की मृत्यु के पश्चात् इस भूमि पर उनकी संतान का पैतृक अधिकार रहता था ।
- (D) सेवा समाप्ति पर इस भूमि पर पुनः राज्य का अधिकार हो जाता था।
पसातिया भूमि सेवा के बदले दी जाती थी और सेवा समाप्ति या मृत्यु के बाद यह भूमि राज्य या जागीरदार के पास वापस चली जाती थी। इसलिए संतान का पैतृक अधिकार नहीं होता था, यही कथन असत्य है।
67. उच्च वर्ग के लोगों या विद्वानों को राजस्व मुक्त भूमि अनुदान के रूप में दी जाती थी, यह भूमि क्या कहलाती थी?
- (A) माफी
- (B) जीविका
- (C) जूनी जागीर
- (D) मदद-ए-माश
विद्वानों और उच्च वर्ग को दी जाने वाली करमुक्त भूमि मदद-ए-माश कहलाती थी। इसे मुगल काल में सयूरगल भी कहा जाता था और यह सम्मान व जीविका के लिए दी जाती थी।
68. रानि यों और राजा के निकट संबंधियों को अपनी जीविका चलाने हेतु व उनके सम्मान को बनाए रखने के लिए दी गई भूमि क्या कहलाती थी?
- (A) मदद-ए-न्याश
- (B) भोम
- (C) सासण
- (D) जीविका
रानियों और राजपरिवार के निकट संबंधियों को दी गई भूमि जीविका कहलाती थी। इसका उद्देश्य उनके जीवन-यापन और सामाजिक सम्मान को बनाए रखना था।
69. बड़े परगनों में हाकिम को शासन संचालन में सहायता करने वाले सहायक को किस नाम से जाना जाता था?
- (A) अमलगुजार
- (B) थानेदार
- (C) ओहदेदार
- (D) खुफिया नवीस
बड़े परगनों में ओहदेदार हाकिम का सहायक होता था। यह प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करता था और शासन व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने में मदद करता था।
70. मेवाड़ में नगर प्रशासन का मुख्य अधिकारी क्या कहलाता था?
- (A) शिकदार
- (B) कोतवाल
- (C) खानसमान
- (D) पाकाध्यक्ष
मेवाड़ में नगर प्रशासन का मुख्य अधिकारी कोतवाल होता था। वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने, सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिए जिम्मेदार होता था।
71. मुगल दरबार में राजा द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि, जो वहाँ की गतिविधियों से निरंतर राजा को अवगत करवाता रहता था वह क्या कहलाता था?
- (A) खुफिया नवीस
- (B) वकील
- (C) हाकिम खैरात
- (D) पोतदार
मुगल दरबार में राजा का प्रतिनिधि वकील कहलाता था। यह दरबार की गतिविधियों की जानकारी राजा तक पहुंचाता था और कूटनीतिक संबंध बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
72. दयालदास री ख्यात से ज्ञात होता है कि जोधपुर में.. प्रधान सेनापति होता था। सेना का
- (A) फौजदार
- (B) अमात्य
- (C) मुसाहिब
- (D) मुत्सद्दी
दयालदास री ख्यात के अनुसार जोधपुर में मुसाहिब सेना का प्रधान सेनापति होता था। यह पद अत्यंत महत्वपूर्ण था और सैन्य संचालन की जिम्मेदारी इसी के पास होती थी।
73. निम्नलिखित में से असत्य विकल्प का चयन करें।
- (A) अमात्य - मुख्यमंत्री
- (B) बंदीपति- मुख्य भाट
- (C) भीषगाधिराज - प्रधानमंत्री
- (D) संधिविग्रहिक - संधि और युद्ध का मंत्री
भीषगाधिराज का अर्थ प्रधानमंत्री नहीं बल्कि मुख्य वैद्य होता है। अन्य सभी युग्म सही हैं—अमात्य मुख्यमंत्री, बंदीपति मुख्य भाट और संधिविग्रहिक संधि एवं युद्ध का मंत्री होता था।
74. सामन्ती व्यवस्था में कौनसा पद दीवान के अधीन था, जो निर्माण, वस्तुओं के क्रय, राजकीय विभागों के सामान की खरीद व संग्रह से संबंधी आदि का कार्य करता था?
- (A) खारिददार
- (B) शिकादार
- (C) खानसामा
- (D) बख्शी जागीर
खानसामा दीवान के अधीन कार्य करता था और राजकीय वस्तुओं की खरीद, संग्रह तथा निर्माण संबंधी कार्यों का प्रबंधन करता था। यह प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
75. नगर की सुरक्षा एवं शांति का दायित्व का होता था।
- (A) किलेदार
- (B) शिकदार
- (C) बख्शी
- (D) मीर मुंशी
नगर की सुरक्षा और शांति का दायित्व शिकदार के पास होता था। बाद में कई स्थानों पर यह पद कोतवाल के नाम से जाना जाने लगा, जो नगर प्रशासन का प्रमुख अधिकारी था।
76. मुकाता, डोरी व घुघरी किस प्रकार के कर थे?
- (A) पैदावार पर लिया जाने वाला कर।
- (B) गाँव के घरों की गिनती का उस पर लिया जाने वाला कर।
- (C) शादी या गमी के अवसर पर लिया जाने वाला कर
- (D) सेना के पड़ाव हेतु लिया जाने वाला कर
मुकाता, डोरी और घुघरी पैदावार पर आधारित कर थे। ये राजस्व निर्धारण के तरीके थे जिनसे कृषि उत्पादन के आधार पर कर वसूला जाता था।
77. दीवान के पद पर सामान्यतः गैर राजपूत जाति के व्यक्तियों को नियुक्त किया जाता था। दीवान को निम्न में से किस पदाधिकारी को नियुक्त करने का अधिकार प्राप्त नहीं था?
- (A) कोतवाल
- (B) आमिल
- (C) पोतदार
- (D) फौजदार
दीवान को कोतवाल, आमिल, फौजदार आदि अधिकारियों को नियुक्त करने का अधिकार था, लेकिन पोतदार की नियुक्ति का अधिकार उसे नहीं था। पोतदार वित्तीय कार्यों से जुड़ा विशेष पद था।
78. महाराजा जसवंतसिह II (जोधपुर) के काल में उनके छोटे भाई सर प्रताप सिंह को कौनसा पद प्राप्त था ?
- (A) मुत्सदी
- (B) मुसाहिब आला
- (C) दीवान-ए-खास
- (D) देश दीवान
महाराजा जसवंतसिंह द्वितीय के समय सर प्रताप सिंह को मुसाहिब आला का पद प्राप्त था। यह अत्यंत प्रतिष्ठित पद था और शासक का प्रमुख सहयोगी माना जाता था।
79. मेवाड़ में किस ठिकाणे के रावत को प्रधान का पद वंशानुगत प्राप्त था, जिसे 'भांजगड' कहते थे?
- (A) सलूम्बर
- (B) शाहपुरा
- (C) बनेड़ा
- (D) बेदला
मेवाड़ में सलूम्बर ठिकाने के रावत को भांजगड कहा जाता था और उसे प्रधान का पद वंशानुगत रूप से प्राप्त था। यह पद अत्यंत महत्वपूर्ण था और शासन में विशेष भूमिका निभाता था।
80. निम्न में से किस विकल्प में सही युग्म नहीं है?
- (A) कनवारिया - खेतरक्षक
- (B) साहने- प्रबंधक (जो राज्य का भाग निश्चित करता था)
- (C) तोलावाटी राज्य के भाग का लेखा-जोखा रखने वाला।
- (D) चौकीदार- मीणा या वावरी
तोलावाटी का कार्य उपज को तौलना होता था, न कि राज्य के भाग का लेखा-जोखा रखना। अन्य सभी युग्म सही हैं, इसलिए यह विकल्प असंगत है।
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