
राजस्थान मे मराठा हस्तक्षेप एव उसका प्रभाव Important MCQ | Top Questions for Competitive Exams
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान मे मराठा हस्तक्षेप एव उसका प्रभाव से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें माधोसिंह प्रथम, सवाई प्रतापसिंह, ईश्वरीसिंह, सवाई जयसिंह, महाराणा जवानसिंह आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, Fireman, Woman Superwiser, REET तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान मे मराठा हस्तक्षेप एव उसका प्रभाव
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1. बगरू के युद्ध के संबंध में असत्य कथन है-
- (A) इस युद्ध में जवाहर सिंह ने ईश्वरी सिंह का साथ दिया।
- (B) ईश्वरी सिंह ने माधोसिंह को 5 परगने देने का वादा किया।
- (C) उम्मेद सिंह को बूंदी राज्य देने का वचन दिया।
- (D) इस युद्ध में सूरजमल ने ईश्वरी सिंह का साथ दिया।
बगरू के युद्ध में भरतपुर के राजा सूरजमल ने ईश्वरी सिंह का साथ दिया था, न कि जवाहर सिंह ने। जवाहर सिंह उस समय प्रमुख भूमिका में नहीं था। अतः पहला कथन असत्य है, जबकि अन्य कथन ऐतिहासिक रूप से सही माने जाते हैं।
2. तुंगा का युद्ध, जो 28 जुलाई, 1787 को हुआ, वर्तमान में यह स्थल किस जिले में स्थित है?
- (A) जयपुर
- (B) उदयपुर
- (C) सवाईमाधोपुर
- (D) कोटा
तुंगा का युद्ध 1787 में मराठों और राजपूतों के बीच हुआ था। यह स्थान वर्तमान में जयपुर जिले में स्थित है। इस युद्ध में सवाई प्रताप सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और यह राजस्थान के इतिहास का महत्वपूर्ण सैन्य संघर्ष माना जाता है।
3. मई 1810 ई. में जयपुर और जोधपुर राज्यों के बीच हुई मित्रता संधि की शर्तों के संबंध में असत्य कथन है.
- (A) जयपुर महाराजा, अमीर खां को फौज के खर्च के लिए कुछ धन राशि देगा।
- (B) अंग्रेजों और मराठों से राजनीतिक व्यवहार में दोनों राज्य एक ही नीति का अनुसरण करेंगे।
- (C) जगत सिंह गिंगोली के लूट का सामान जोधपुर को वापस लोटाएगा।
- (D) मानसिंह कृष्णाकुमारी के साथ विवाह करेंगे।
मानसिंह और जगतसिंह दोनों ही इस मित्रता संधि के बाद कृष्णाकुमारी के साथ विवाह का विचार त्याग दें।
4. मराठा सरदार जयप्पा सिंधिया को किस शासक ने राजस्थान में मारा था?
- (A) गजसिंह
- (B) विजय सिंह
- (C) बहादुरसिंह
- (D) बख्त सिंह
जयप्पा ने विजयसिंह का पीछा करते हुए नागौर दुर्ग पर घेरा डाल दिया। विजयसिंह ने जयप्पा से संधि का प्रयास किया, मगर असफल रहा। तब उसने धोखे से ताऊसर (नागौर) में 24 जुलाई, 1755 को जयप्पा की हत्या करवा दी।
5. किस वर्ष राणोजी सिंधिया व मल्हार राव होल्कर ने जोधपुर राज्य पर आक्रमण कर मेड़ता में लूटमार की व दुर्ग को घेर लिया?
- (A) 1730
- (B) 1735
- (C) 1755
- (D) 1790
जोधपुर शासक अभयसिंह के शासनकाल में उसका भाई बख्तसिंह जोधपुर का राज्य पाने को लालायित था। दोनों भाईयों के तनावपूर्ण सम्बन्धों का फायदा उठाकर 1735 ई, मराठों ने जोधपुर राज्य पर आक्रमण कर मेड़ता में लूटमार की व दुर्ग को घेर लिया। मगर इन्हे ज्यादा सफलता नहीं मिली।
6. सवाई जयसिंह ने मालवा में मराठों को रोकने के लिए मेवाड़ के किस शासक के साथ एक समझौता किया था?
- (A) जगतसिंह द्वितीय
- (B) संग्राम सिंह द्वितीय
- (C) राजसिंह द्वितीय
- (D) अरिसिहं द्वितीय
सवाई जयसिंह ने मराठों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए मेवाड़ के महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय के साथ समझौता किया था। यह समझौता क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और मराठों के विस्तार को रोकने की रणनीति का हिस्सा था।
7. बूंदी के शासक बुद्धसिंह की रानी व सवाई जयसिंह की बहन अमर कुँवरी ने किस मराठा सरदार को राखीबंध भाई बनाया?
- (A) खाण्डेराव होल्कर
- (B) जयप्पा सिंधिया
- (C) मल्हार राव होल्कर
- (D) गंगाधर तांतिया
अमर कुँवरी ने मराठा सरदार मल्हार राव होल्कर को राखी बांधकर भाई बनाया था। इसका उद्देश्य मराठों से राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करना था। यह घटना उस समय की कूटनीति और संबंधों को दर्शाती है।
8. मारवाड़ में रामसिंह व बख्त सिंह के मध्य गृहयुद्ध (अप्रैल 1750) के चलते ईश्वरी सिंह (जयपुर) ने किसका साथ दिया ?
- (A) रामसिंह
- (B) बख्तसिंह
- (C) पहले रामसिंह के साथ व युद्ध के बीच में ही बख्त सिंह की तरफ मिल गए।
- (D) इनमें से किसी का नहीं
बख्त सिंह के साथ मुगल सेनापति मीरबख्शी सलावत खाँ, गजसिंह (बीकानेर) व बहादुर सिंह (किशनगढ़) की संयुक्त सेना व दूसरी तरफ रामसिंह के साथ ईश्वरी सिंह व मराठों की सेना थी। काफी दिन बाद सलावत खाँ ने 7 लाख रुपये लेकर मानसिंह से संधि कर दिल्ली की ओर चला गया।
9. हुरड़ा सम्मेलन की अध्यक्षता किसने की?
- (A) सवाई जयसिंह
- (B) महाराव दुर्जनशाल
- (C) महाराणा जगतसिंह द्वितीय
- (D) अमरसिंह द्वितीय
हुरड़ा सम्मेलन की अध्यक्षता मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह द्वितीय ने की थी। यह सम्मेलन मराठों के विरुद्ध संयुक्त रणनीति बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इसमें कई राजपूत शासकों ने भाग लिया था।
10. मराठों ने राजस्थान की किस को लेकर हस्तक्षेप किया? रियासत में सर्वप्रथम उत्तराधिकार
- (A) मेवाड़
- (B) कोटा
- (C) डूंगरपुर
- (D) बूंदी
होल्कर व राणोजी सिंधिया ने 18 अप्रैल, 1734 ई. को बूंदी पर आक्रमण किया।
11. हुरड़ा सम्मेलन किस वर्ष हुआ था?
- (A) 1732
- (B) 1734
- (C) 1736
- (D) 1738
हुरड़ा सम्मेलन 17 जुलाई, 1734 ई. को आयोजित हुआ ।
12. मेवाड़ का 'कृष्णा कुमारी विवाद' जो जोधपुर व जयपुर के मध्य हुआ, महाराणा ने किसके कहने पर कृष्णा कुमारी की हत्या करवा दी थी?
- (A) जगतसिंह
- (B) अमीर खाँ पिण्डारी
- (C) मानसिंह
- (D) रसकपुर
अमीर खाँ ने महाराणा भीमसिंह को कहलवाया कि वह कृष्णा कुमारी का विवाह मानसिंह से कर दे या उसकी हत्या कर दे नहीं तो वह मेवाड़ को उजाड़ देगा। भीमसिंह में अमीर खाँ के प्रतिरोध का साहस नहीं था, 21 जुलाई, 1810 को कृष्णा कुमारी ने जहर पीकर आत्महत्या कर ली।
13. मेवाड़ महाराणा भीमसिंह व महादजी सिंधिया के मध्य एक समझौते के तहत् महादजी ने अपने किस सेनापति को भेजकर चुण्डावत सरदारों को भीमसिंह का आदेश मानने पर बाध्य किया व रतनसिंह को वहाँ से निकाल दिया गया?
- (A) मल्हारराव होल्कर
- (B) राणोजी सिंधिया
- (C) जयप्पा सिंधिया
- (D) अम्बाजी इंगले
महाराणा भीमसिंह सामन्तों की आपसी कलह के सामने असहाय था, उसने महादजी सिंधिया से सहायता मांगी। महादजी व महाराणा के मध्य 16 अप्रैल, 1791 को एक समझौता हुआ, जिसके तहत् महादजी सामन्तों का दमन कर महाराणा के अधिकारों की रक्षा करेगा।
14. मराठों के खिलाफ संयुक्त कार्य योजना बनाने के लिए राजपूत राजाओं. का एक सम्मेलन 'हुरड़ा' नामक स्थान पर हुआ था। यह स्थान वर्तमान में किस जिले में है?
- (A) भीलवाड़ा
- (B) बूंदी
- (C) उदयपुर
- (D) कोटा
हुरड़ा सम्मेलन का आयोजन वर्तमान भीलवाड़ा जिले में हुआ था। यह स्थान राजपूत शासकों के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था। यहाँ मराठों के विरुद्ध संयुक्त योजना बनाने के लिए कई राजाओं ने एकत्रित होकर विचार-विमर्श किया।
15. कृष्णा कुमारी विवाद को लेकर जगतसिंह व मानसिंह के दो दीवानों के मध्य वार्ता के अनुसार यह तय हुआ था कि कृष्णा कुमारी से दोनों में से कोई विवाह नहीं करेगा। उन दीवानों के नाम थे?
- (A) दीवान रामचन्द्र (जयपुर) व गुमानसिंह (जोधपुर)
- (B) इन्द्रराज सिघंवी (जोधपुर) व धॉकलसिंह (जयपुर)
- (C) दीवान रामचन्द्र (जयपुर) व इन्द्रराज सिघंवी (जोधपुर)
- (D) धॉकल सिंह (जयपुर) व खिंवराज राठी (जोधपुर)
कृष्णा कुमारी विवाद के दौरान दोनों राज्यों के दीवानों ने समझौता किया कि कोई भी उससे विवाह नहीं करेगा। जयपुर के दीवान रामचन्द्र और जोधपुर के दीवान इन्द्रराज सिघंवी इस वार्ता के प्रमुख प्रतिनिधि थे।
16. किस वर्ष कोटा के महाराव दुर्जनशाल के साथ मिलकर महाराणा जगत सिंह ने ईश्वरी सिंह के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की थी?
- (A) 1741
- (B) 1742
- (C) 1743
- (D) 1744
महाराव दुर्जनशाल बूंदी में जयपुर समर्थित दलेल सिंह को हटाकर उम्मेद सिंह को शासक बनाना चाहता था।
17. हुरड़ा सम्मेलन में निम्न में से किस शासक ने भाग नहीं लिया था?
- (A) सुजानसिंह (बीकानेर)
- (B) दुर्जनशाल (कोटा)
- (C) बख्तसिंह (जोधपुर)
- (D) राजसिंह (किशनगढ़)
हुरड़ा सम्मेलन में जगतसिंह द्वितीय (मेवाड), सवाई जयसिंह (जयपुर), अभयसिंह (जोधपुर), दुर्जनशाल (कोटा), सुजानसिंह (बीकानेर), बख्तसिंह (नागौर), दलेलसिंह (बूंदी), गोपालसिंह (करौली), राजसिंह (किशनगढ़) आदि शासकों ने भाग लिया।
18. पेशवा बाजीराव प्रथम पहली बार राजस्थान में किस वर्ष आया वा?
- (A) 1734
- (B) 1736
- (C) 1738
- (D) 1740
सवाई जयसिंह के निमंत्रण पर पेशवा बाजीराव प्रथम पहली बार जनवरी, 1736 ई. में उदयपुर आया था। 4 मार्च, 1736 को पेशवा व सवाई जयसिंह के मध्य भंभोला नामक स्थान पर मुलाकात हुई।
19. पेशवा बाजीराव व मुगल बादशाह मुहम्मदशाह के मध्य हुए धौलपुर समझौते में राजस्थान के किस शासक ने मध्यस्था की थी?
- (A) सवाई जयसिंह
- (B) दलेलसिंह
- (C) माधोसिंह
- (D) ईश्वरीसिंह
पेशवा बाजीराव व सवाई जयसिंह के मध्य 1741 ई. में धौलपुर में मुलाकात हुई। मराठा भी सवाई जयसिंह के माध्यम से मुगल बादशाह से समझौता करना चाहते थे। यह वार्ता ही धौलपुर समझौते के नाम से जानी जाती है।
20. जयपुर के किस शासक ने सर्वप्रथम मराठों को जयपुर के आन्तरिक मामलों में सैनिक सहायता के लिए आमंत्रित किया?
- (A) सवाई जयसिंह
- (B) ईश्वरीसिंह
- (C) माधोसिंह प्रथम
- (D) सवाई प्रतापसिंह
जामोली समझौते से माधोसिंह संतुष्ट नहीं थे। माधोसिंह इस संघर्ष में मराठों की सहायता लेना चाहता था। उसने मल्हारराव होल्कर को 20 लाख रुपये देने का वचन देकर सैनिक सहायता प्राप्त कर ली। इस प्रकार मराठों ने जयपुर की राजनीति में हस्तक्षेप किया।
21. जयपुर रियासत के माधोसिंह व ईश्वरीसिंह के झगड़े को सुलझाने के लिए पेशवा की मध्यस्था से हुआ निवाई समझौता किस वर्ष हुआ था?
- (A) 1747
- (B) 1748
- (C) 1750
- (D) 1752
पेशवा 1748 ई. में दक्षिण से लौटते समय माधोसिंह और ईश्वरी सिंह के झगड़े को सुलझाने का प्रयास किया। निवाई में माधोसिंह पेशवा से मिला, ईश्वरी सिंह ने भी अपने वकील केशवदास को पेशवा के पास भेजा। निवाई समझौते के तहत् फागी, बरवाड़ा, टॉक, टोडा व मालपुरा के परगने माधोसिंह को दिए गए।
22. माधोसिंह प्रथम व ईश्वरीसिंह के मध्य बगरू का युद्ध किस वर्ष हुआ था?
- (A) 1748
- (B) 1747
- (C) 1752
- (D) 1787
बगरू का युद्ध 1 अगस्त, 1748 को हुआ। इस युद्ध में माधोसिंह, मल्हार राव होल्कर, गंगाधर तांतिया, उम्मेद सिंह हाड़ा व कोटा राज्य की संयुक्त सेना ने जयपुर पर आक्रमण किया। इस युद्ध में महाराणा सूरजमल ने ईश्वरी सिंह का साथ दिया, लेकिन ईश्वरी सिंह की हार हुई।
23. जयपुर के किस शासक ने मराठों के डर से आत्महत्या कर ली थी?
- (A) माधोसिंह प्रथम
- (B) सवाई प्रतापसिंह
- (C) ईश्वरीसिंह
- (D) सवाई जयसिंह
मराठा सेना को जयपुर की ओर बढ़ता देख हताश होकर ईश्वरी सिंह ने 12 दिसम्बर, 1750 ई. को आत्महत्या कर ली।
24. जयपुर के किस शासक के समय जयपुर शहर में मराठा सैनिकों का कत्लेआम किया गया?
- (A) माधोसिंह प्रथम
- (B) सवाई प्रतापसिंह
- (C) ईश्वरीसिंह
- (D) सवाई जयसिंह
10 जनवरी, 1751 को लगभग 4 हजार मराठा सैनिक जयपुर नगर में प्रवेश किए। उनके अभद्र व्यवहार से नाराज होकर माधोसिंह प्रथम ने उनके विरुद्ध कठोर कदम उठाते हुए कत्लेआम करवा दिया। यह घटना मराठा-राजपूत संबंधों में तनाव का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
25. झाला जालिम सिंह ने अपनी कूटनीति से कभी खुशमाद, कभी धन, कभी सहायता आदि देकर मराठों से किस राज्य की रक्षा की थी?
- (A) उदयपुर
- (B) कोटा
- (C) अलवर
- (D) झालावाड़
झाला जालिम सिंह कोटा राज्य के प्रमुख कूटनीतिज्ञ थे। उन्होंने अपनी सूझबूझ, धन और कूटनीति से मराठों को संतुष्ट रखकर कोटा राज्य को लूटमार और हस्तक्षेप से बचाए रखा। उनकी नीति व्यवहारिक और दूरदर्शी मानी जाती है।
26. मेवाड़ के किस महाराणा ने अपने सामंतों का दमन करने के लिए मराठा सेनापति महादजी सिंधिया से एक समझौता किया था?
- (A) महाराणा जवानसिंह
- (B) महाराणा भीमसिंह
- (C) अमरसिंह द्वितीय
- (D) महाराणा सरदार सिंह
महाराणा भीमसिंह ने आंतरिक सामंती संघर्षों से परेशान होकर महादजी सिंधिया से सहायता ली। 1791 के समझौते के तहत सिंधिया ने मेवाड़ के सामंतों को नियंत्रित कर महाराणा की सत्ता को मजबूत किया।
27. मारवाड़ के किस शासक ने मराठा सेनापति जयप्पा सिंधिया की नागोर में धोखे से हत्या करवा दी थी?
- (A) विजयसिंह
- (B) अभयसिंह
- (C) बख्तसिंह
- (D) रामसिंह
महाराजा विजयसिंह ने 24 जुलाई, 1755 को नागौर के ताऊसर स्थान पर जयप्पा सिंधिया की धोखे से हत्या करवा दी। यह घटना मराठा-राजपूत संबंधों में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई और इससे दोनों के बीच अविश्वास बढ़ा।
28. मराठा राज्य का शासक बनने से पूर्व साहू किसकी जेल या शिविर में बंदी था?
- (A) मेवाड़
- (B) आमेर
- (C) मुगलों के
- (D) गुजरात
साहू को मुगल सम्राट औरंगजेब ने बंदी बना लिया था। औरंगजेब की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार संघर्ष के दौरान उसे मुक्त किया गया। बाद में वह मराठा राज्य का शासक बना और मराठा शक्ति को पुनः संगठित किया।
29. बालाजी विश्वनाथ किस मराठा शासक का पेशवा था?
- (A) छत्रपति शिवाजी
- (B) शिवाजी
- (C) साहू
- (D) मल्हार राव होल्कर
छत्रपति साहू ने 1713 ई. में बालाजी विश्वनाथ को पेशवा नियुक्त किया था। बालाजी विश्वनाथ ने मराठा प्रशासन को सुदृढ़ किया और पेशवा पद को अत्यंत शक्तिशाली बना दिया, जिससे मराठा साम्राज्य का विस्तार हुआ।
30. जयपुर रियासत द्वारा मराठों (1751 ई. में) के कत्लेआम के पीछे मुख्य कारण क्या था?
- (A) जयप्पा सिंधिया द्वारा धन (राज्य की आय का एक बट्टा तीन या एक बट्टा चार भाग) की मांग करना
- (B) मराठों द्वारा बूंदी के बुद्ध सिंह की सहायता करना
- (C) आंतरिक मामलों में मराठों द्वारा ईश्वरी सिंह की सहायता करना
- (D) मुगलों के आदेश पर
6 जनवरी, 1751 को जयप्पा सिंधिया ने जयपुर से राज्य की आय का एक-तिहाई या एक-चौथाई भाग मांग किया। इस अत्यधिक आर्थिक दबाव से माधोसिंह और राजपूत सरदार नाराज हो गए, जिसके परिणामस्वरूप मराठों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई।
31. काकोड़ का युद्ध निम्न में से किसके मध्य लड़ा गया ?
- (A) ईश्वरी सिंह व माधोसिंह
- (B) मराठो, माधोसिंह व ईश्वरी सिंह
- (C) मल्हारराव होल्कर व मोधासिंह
- (D) ईश्वरी सिंह व मल्हार राव होल्कर
माधोसिंह प्रथम ने 1759 में काकोड़ के युद्ध में मल्हारराव होल्कर की सेना का सामना किया और उसे पराजित किया। यह युद्ध मराठों और राजपूतों के बीच शक्ति संतुलन को दर्शाता है।
32. निम्नलिखित में से असत्य कथन की पहचान करें-
- (A) माधोसिंह मेवाड़ की राजकुँवरी चन्द्रकुँवरी का पुत्र था।
- (B) माधोसिंह सिंह की छोटी-छोटी झड़पों से परेशान ईश्वरी सिंह ने सर्वप्रथम मराठों को आंतरिक हस्तक्षेप के लिए आमंत्रित किया।
- (C) 21 सितम्बर, 1743 ई. को सवाई जयसिंह की मृत्यु के बाद उसका ज्येष्ठ पुत्र 'ईश्वरी सिंह' जयपुर का शासक बना ।
- (D) देबारी समझौते (1708) के इकरारनामे के अनुसार मेवाड़ राजकुमारी से उत्पन्न राजकुमार ही जयपुर की गद्दी का वारिस बनना था।
जामोली समझौते के अनुसार माधोसिंह को रामपुरा के अतिरिक्त टॉक का परगना भी दिया गया, लेकिन माधोसिंह इससे संतुष्ट नहीं हुआ।
33. लगभग एक शताब्दी तक मराठों ने राजस्थान में लूटमार की तथा हस्तक्षेप किया, कौनसी दो रियासतों को छोड़कर सभी रियासते मराठों के लूटमार की शिकार हुई थी?
- (A) जैसलमेर-जोधपुर
- (B) उदयपुर-जोधपुर
- (C) बीकानेर - जैसलमेर
- (D) बीकानेर - कोटा
मराठों के आक्रमण और लूटमार से राजस्थान की अधिकांश रियासतें प्रभावित हुईं, लेकिन बीकानेर और जैसलमेर भौगोलिक स्थिति व रणनीतिक कारणों से काफी हद तक सुरक्षित रहे। इन क्षेत्रों में मराठों का प्रभाव सीमित रहा।
34. सितम्बर 1754 ई. में मराठों व विजय सिंह (जोधपुर) के मध्य मेड़ता के पास युद्ध हुआ, जिसमें विजयसिंह की हार हुई। इस युद्ध में बीकानेर व किशनगढ़ के शासक युद्ध क्षेत्र से भाग गए थे, उन शासकों का नाम बताइए?
- (A) गजसिंह व सावंत सिंह
- (B) कल्याणमल व बहादुर सिंह
- (C) गजसिंह व बहादुर सिंह
- (D) जैतसी व बहादुर सिंह
1754 के मेड़ता युद्ध में मराठों के विरुद्ध लड़ाई के दौरान बीकानेर के गजसिंह और किशनगढ़ के बहादुर सिंह युद्ध क्षेत्र से भाग गए थे। इससे विजयसिंह की स्थिति कमजोर हो गई और अंततः उसकी हार हुई।
35. मेवाड़ के आंतरिक मतभेद के बारे में असत्य कथन की पहचान करें-
- (A) मेवाड़ महाराणा राजसिंह द्वितीय की मृत्यु के पश्चात् उसका चाचा अरिसिंह (1761 ई.) शासक बना, जबकि सामंत राजसिंह द्वितीय के नाबालिग पुत्र रतनसिंह को शासक बनाना चाहते थे
- (B) मेवाड़ के इस आंतरिक मतभेद और तनाव ने दोनों पक्षों की ओर से मराठों को आमंत्रित किया
- (C) जनवरी 1769 में क्षिप्रा नदी किनारे अरिसिंह व महादजी सिंधिया (जो रतनसिंह की तरफ से लड़ रहे थे) के मध्य युद्ध हुआ।
- (D) इस युद्ध में अरिसिंह की विजय हुई लेकिन उदयपुर पर महादजी सिंधिया ने अधिकार कर लिया।
16 जनवरी, 1769 को क्षिप्रा नदी के किनारे युद्ध हुआ, जिसमें महादजी सिंधिया की विजय हुई। हालांकि लंबे समय तक घेरा डालने के बावजूद वह उदयपुर पर अधिकार नहीं कर सका। अतः चौथा कथन असत्य है।
36. कोटा राज्य में मराठों द्वारा सर्वप्रथम हस्तक्षेप / घुसपैठ कब की गई?
- (A) 1731
- (B) 1736
- (C) 1740
- (D) 1730
कोटा राज्य में मराठों का पहला हस्तक्षेप 1736 ई. में हुआ। इसी समय पेशवा बाजीराव प्रथम उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा था और कोटा क्षेत्र से गुजरते हुए उसने यहां प्रभाव स्थापित किया।
37. मराठों का मेवाड़ में प्रवेश के समय मुगल बादशाह कौन था, जिसे महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय ने मराठों की लूटपाट आदि गतिविधियों से अवगत करवाया, लेकिन बादशाह कोई उचित कार्यवाही नहीं कर सका?
- (A) औरंगजेब
- (B) मुहम्मद शाह रंगीला
- (C) मुहम्मद शाह
- (D) फर्रुखशियर
मराठों के मेवाड़ में प्रवेश के समय मुगल बादशाह मुहम्मद शाह था। महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय ने मराठों की गतिविधियों की जानकारी दी, लेकिन कमजोर मुगल सत्ता के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
38. पाटन का युद्ध मराठों ने किस राज्य के विरुद्ध लड़ा था, जिसमें मराठों (डी. बोई व लकवा दादा के नेतृत्त्व में) की विजय हुई?
- (A) जयपुर
- (B) जोधपुर
- (C) कोटा
- (D) मेवाड़
पाटन का युद्ध 20 जून, 1790 को मराठों और जयपुर राज्य के बीच हुआ था। डी. बोईन और लकवा दादा के नेतृत्व में मराठों ने जयपुर की सेना को हराकर निर्णायक विजय प्राप्त की।
39. कोटा में सर्वप्रथम 1736 ई. में मराठों का प्रवेश हुआ, इसी दौरान जब पेशवा बाजीराव प्रथम दिल्ली जाते वक्त कोटा से रसद सहायता मांगी थी, उस वक्त कोटा के महाराव कौन थे?
- (A) महाराव शत्रुशाल
- (B) महाराव दुर्जनशाल
- (C) महाराव गुमान सिंह
- (D) महाराव जालिम सिंह
1736 में जब पेशवा बाजीराव प्रथम दिल्ली की ओर जा रहा था, तब उसने कोटा से रसद सहायता मांगी। उस समय कोटा के महाराव दुर्जनशाल थे, जिन्होंने मराठों के साथ संबंध बनाए रखे।
40. बगरू के युद्ध के पश्चात् जोधपुर के किस शासक ने मल्हारराव होल्कर को पगड़ी बदल भाई बनाकर एक साथ भोजन किया तथा सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित किए ?
- (A) बख्त सिंह
- (B) अभयसिंह
- (C) मानसिंह
- (D) रामसिंह
होल्कर के जयपुर अभियान के समय बगरू के युद्ध में अभयसिंह ने होल्कर की सहायता के लिए अपने सैनिक भी भेजे। बाद में दोनों के बीच पगड़ी बदलकर भाईचारे का संबंध स्थापित हुआ, जिससे राजनीतिक सहयोग मजबूत हुआ।
41. किस मराठा पेशवा की माता राधादेवी 1735 ई. में तीर्थ यात्रा हेतु नाथद्वारा, उदयपुर व गलता जी (जयपुर) आई, जहाँ उनका दोनों शासकों द्वारा आदर सत्कार किया गया?
- (A) मल्हारराव होल्कर
- (B) बालाजी बाजीराव प्रथम
- (C) बालाजी बाजीराव द्वितीय
- (D) जयप्पा सिंधिया
राधादेवी, पेशवा बाजीराव प्रथम के पुत्र बालाजी बाजीराव प्रथम की माता थीं। 1735 ई. में उन्होंने राजस्थान के प्रमुख तीर्थ स्थलों नाथद्वारा, उदयपुर व गलता जी की यात्रा की। इस दौरान जयपुर और मेवाड़ के शासकों ने उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया।
42. निम्न में से कौनसा एक मुख्य कारण राजस्थान में मराठा हस्तक्षेप का नहीं है?
- (A) मुगल साम्राज्य का पतन
- (B) मराठों की धन प्राप्ति की लालसा
- (C) मेवाड़ की साम्राज्य विस्तार की नीति
- (D) राजपूत राज्यों में आपसी संघर्ष
राजस्थान में मराठा हस्तक्षेप के मुख्य कारणों में मुगल साम्राज्य का पतन, धन की लालसा और राजपूतों के आपसी संघर्ष शामिल थे। मेवाड़ की साम्राज्य विस्तार की नीति ऐसा कोई प्रमुख कारण नहीं था, इसलिए यह विकल्प असत्य है।
43. राजमहल का युद्ध जो जयपुर का आंतरिक (राजधानी को लेकर) युद्ध था, ईश्वरीसिंह के विरुद्ध इस युद्ध में माधोसिंह के साथ और कौन था?
- (A) मेवाड़ महाराणा जगतसिंह, बूंदी के उम्मेदसिंह व दुर्जनशाल
- (B) मेवाड़ महाराणा जगतसिंह व कोटा के दुर्जनशाल
- (C) मेवाड़ महाराणा जगतसिंह, कोटा महाराव दुर्जनशाल, बूंदी के अपदस्थ शासक उम्मेद सिंह व खांडेराव होल्कर की संयुक्त सेना।
- (D) मेवाड़ महाराणा जगतसिंह
राजमहल का युद्ध 1 मार्च, 1747 ई. को टोंक के पास हुआ। इस युद्ध में माधोसिंह के साथ मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह, कोटा के दुर्जनशाल, बूंदी के उम्मेद सिंह और खांडेराव होल्कर की संयुक्त सेना थी, जबकि अंततः ईश्वरी सिंह विजयी रहा।
44. गिंगोली युद्ध के दौरान अमीर खाँ पिण्डारी के बारे में कौनसा कथन सत्य है?
- (A) वह मारवाड़ की तरफ से युद्ध लड़ा।
- (B) वह जयपुर की ओर से युद्ध लड़ा
- (C) वह पहले मारवाड़ की सेना के साथ था लेकिन मतभेद हो जाने के कारण वह जगत सिंह से मिल गया।
- (D) इसने गिंगोली युद्ध में भाग नहीं लिया।
गिंगोली का युद्ध 13 मार्च, 1807 को जयपुर और जोधपुर के बीच हुआ था। इस युद्ध में अमीर खाँ पिण्डारी ने जयपुर राज्य की ओर से भाग लिया और जगतसिंह का साथ दिया, जिससे जयपुर की विजय सुनिश्चित हुई।
45. भटवाड़ा के युद्ध में (1761 ई.) कोटा की सेना ने किसके नेतृत्त्व में जयपुर के माधोसिंह प्रथम को हराया ?
- (A) झाला जालिम सिंह
- (B) सूरजमल
- (C) दुर्जनशाल
- (D) राणोजी सिंधिया
1761 के भटवाड़ा युद्ध में कोटा की सेना का नेतृत्व झाला जालिम सिंह ने किया। उनकी कुशल रणनीति के कारण जयपुर के माधोसिंह प्रथम को पराजय का सामना करना पड़ा। यह युद्ध कोटा की सैन्य क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
46. कोटा के किस फौजदार ने अपनी कूटनीति से कोटा की जीवाजी अप्पा, मराठा सरदार नरहरराव व खांडेराव आदि को धन देकर रक्षा की?
- (A) गुमानसिंह
- (B) अजीतसिंह
- (C) जालिम सिंह
- (D) भीमसिंह
जालिम सिंह कोटा के कुशल फौजदार थे। उन्होंने अपनी कूटनीति और धन के माध्यम से मराठा सरदारों जैसे जीवाजी अप्पा, नरहरराव और खांडेराव को संतुष्ट कर कोटा राज्य को लूटमार से बचाया।
47. जयपुर में आंतरिक अशांति के चलते (ईश्वरी सिंह व माधोसिंह के मध्य) 'जामोली समझौता' किस-किस के मध्य हुआ था?
- (A) मोधासिंह के मंत्री राजमल खत्री व ईश्वरी सिंह के मध्य
- (B) ईश्वरी सिंह के व माधोसिंह के मध्य
- (C) ईश्वरी सिंह के मंत्री राजमल खत्री व माधोसिंह के मध्य
- (D) ईश्वरी सिंह के मंत्री राजमल खत्री व महाराणा जगतसिंह के मध्य
जामोली समझौता ईश्वरी सिंह के मंत्री राजमल खत्री और मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत माधोसिंह को कुछ क्षेत्र दिए गए, लेकिन वह इससे संतुष्ट नहीं हुआ और संघर्ष जारी रहा।
48. राजमहल का युद्ध (टोंक) माधोसिंह व ईश्वरी सिंह के मध्य कब लड़ा गया?
- (A) 1 अप्रैल, 1747
- (B) 1 मार्च, 1747
- (C) 1 अप्रैल, 1847
- (D) 1 मार्च, 1847
राजमहल (टोंक) का युद्ध 1 मार्च, 1747 को माधोसिंह और ईश्वरी सिंह के बीच हुआ था। यह जयपुर राज्य के आंतरिक संघर्ष का महत्वपूर्ण युद्ध था, जिसमें अंततः ईश्वरी सिंह विजयी रहा।
49. छत्रपति साहू के पेशवा बालाजी विश्वनाथ के बाद पेशवा किसे बनाया गया?
- (A) मल्हारराव होल्कर
- (B) रघुनाथ राव
- (C) बालाजी बाजीराव प्रथम
- (D) राणोजी सिंथिया
बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु के बाद 1720 ई. में उसके पुत्र बाजीराव प्रथम (बालाजी बाजीराव प्रथम) को पेशवा बनाया गया। उसने मराठा साम्राज्य का तेजी से विस्तार किया और उत्तर भारत तक प्रभाव स्थापित किया।
50. जयसिंह की तरफ से नियुक्त बूंदी का उत्तराधिकारी दलेल सिंह करवड के किस जागीरदार का पुत्र था?
- (A) जालिम सिंह
- (B) सालिम सिंह
- (C) उम्मेद सिंह
- (D) दुर्जनशाल
जयसिंह ने बूंदी के शासक बुद्धसिंह को हटाकर करवड़ के जागीरदार सालिम सिंह हाड़ा के पुत्र दलेल सिंह को 1730 ई. में उत्तराधिकारी बनाया। यह कदम राजनीतिक नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से उठाया गया था।
51. मारवाड में किस शासक के शासक बनते ही राजस्थान में मराठों के प्रवेश के द्वितीय चरण की शुरुआत हुई?
- (A) अभयसिंह
- (B) रामसिंह
- (C) बख्नसिंह
- (D) मानसिंह
जून 1749 में अभयसिंह की मृत्यु के बाद रामसिंह मारवाड़ का शासक बना। उसके शासनकाल में आंतरिक संघर्ष बढ़ा, जिससे मराठों के हस्तक्षेप का दूसरा चरण प्रारंभ हुआ।
52. माधोसिंह प्रथम ने नवम्बर 1759 के किस युद्ध में मल्हारराव होल्कर को हराया ?
- (A) तुंगा का युद्ध
- (B) काकोड़ का युद्ध
- (C) जामोली का युद्ध
- (D) राजमहल का युद्ध
नवम्बर 1759 में काकोड़ के युद्ध में माधोसिंह प्रथम ने मल्हारराव होल्कर की सेना को पराजित किया। यह युद्ध मराठों और राजपूतों के बीच संघर्ष का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
53. निम्नलिखित में से किस रियासत में मराठों ने आंतरिक हस्तक्षेप नहीं किया व न ही कोई वसूली की थी?
- (A) जैसलमेर
- (B) बूंदी
- (C) जयपुर
- (D) जोधपुर
राजस्थान की अधिकांश रियासतें मराठों के हस्तक्षेप और धन वसूली से प्रभावित हुईं, लेकिन जैसलमेर अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण काफी हद तक सुरक्षित रहा। वहां मराठों का प्रभाव नगण्य रहा।
54. हुरड़ा सम्मेलन में तय वार्ता के बाद आपसी मतभेद से सम्मेलन असफल रहा तथा रामपुरा मैदान में केवल दो रियासत के शासक उपस्थित हुए थे, वह है-
- (A) जयपुर, कोटा
- (B) जयपुर, मेवाड़
- (C) मेवाड़, कोटा
- (D) जयपुर, मारवाड़
हुरड़ा सम्मेलन के बाद आपसी मतभेद के कारण संयुक्त कार्य योजना सफल नहीं हो सकी। रामपुरा मैदान में केवल जयपुर के सवाई जयसिंह और कोटा के दुर्जनशाल ही अपनी सेना के साथ उपस्थित हुए थे।
55. पेशवा बाजीराव प्रथम ने जनवरी 1736 में उदयपुर पहुंचकर महाराणा जगतसिंह द्वितीय से वार्षिक चौथ वसूलने का समझौता किया, पेशवा बाजीराव प्रथम व जयसिंह के मध्य भेंट किस स्थान पर हुई थी?
- (A) रामपुरा
- (B) भंभोला
- (C) हुरड़ा
- (D) राजमहल
पेशवा बाजीराव प्रथम और सवाई जयसिंह के बीच 4 मार्च 1736 को भंभोला नामक स्थान पर मुलाकात हुई थी। इस भेंट में राजनीतिक और आर्थिक समझौतों पर चर्चा की गई।
56. ईश्वरी सिंह की मृत्यु के पश्चात् माधोसिंह प्रथम जयपुर के शासक कब बने ?
- (A) 12 दिसम्बर, 1750
- (B) 2 जनवरी, 1751
- (C) 12 नवम्बर, 1759
- (D) 1 अप्रैल, 1748
ईश्वरी सिंह की मृत्यु के बाद मल्हारराव होल्कर ने हस्तक्षेप कर माधोसिंह को 2 जनवरी 1751 को जयपुर का शासक बनाया। इसके बदले मराठों को धन देने का समझौता किया गया।
57. मराठों के धनवसूली व लगातार आक्रमणों से परेशान होकर जयपुर के किस शासक ने जोधपुर के शासक विजयसिंह तथा करीली के शिवपुर के शासकों के साथ गठबंधन किया?
- (A) ईश्वरी सिंह
- (B) माधोसिंह
- (C) जयसिंह
- (D) प्रतापसिंह
मराठों के लगातार हस्तक्षेप और धन वसूली से परेशान होकर सवाई प्रतापसिंह ने जोधपुर के विजयसिंह और अन्य शासकों के साथ गठबंधन किया। इसका उद्देश्य मराठों के प्रभाव को सीमित करना था।
58. निम्नलिखित में से असत्य कथन की पहचान कीजिए ?
- (A) ईश्वरी सिंह के शासन के अंतिम दिनों में मल्हारराव व गंगाधर तांतिया सेना सहित जयपुर आए।
- (B) ईश्वरीसिंह ने अपने एक दूत को 2 लाख रुपए देकर मराठों को रास्ते में भेजे, लेकिन मराठों ने यह स्वीकार नहीं किया।
- (C) ईश्वरी सिंह ने 1 अगस्त, 1748 बगरु का युद्ध महाराणा सूरजमल जाट की सहायता से जीता।
- (D) माधोसिंह को शासक बनाने के बदले (ईश्वरी सिंह की मृत्यु के पश्चात्) 10 लाख रुपए मराठों को देने तय हुए व रामपुरा की जागीर तथा टॉक के 4 परगने मल्हार राव होल्कर को दिए।
बगरू के युद्ध में ईश्वरी सिंह की हार हुई थी, न कि विजय। इस युद्ध में सूरजमल ने उसका साथ दिया था, लेकिन संयुक्त सेना के सामने वह पराजित हुआ। इसलिए तीसरा कथन असत्य है।
59. मालपुरा का युद्ध (1790) के बारे में असत्य कथन की पहचान करें-
- (A) यह युद्ध मराठों व जयपुर के सवाई प्रतापसिंह के मध्य हुआ।
- (B) मराठों ने पोहलमेल और शवेलियर दुर्दैनेक को जयपुर पर आक्रमण हेतु भेजा
- (C) यह युद्ध अप्रैल 1800 में मालपुरा में हुआ, इसमें मराठों की बुरी हार हुई
- (D) जयपुर राज्य ने 9 लाख रुपए युद्ध क्षति चुकाकर मराठों से संधि कर ली।
मालपुरा का युद्ध अप्रैल 1800 में हुआ, लेकिन इसमें मराठों की विजय हुई थी। जयपुर को पराजय के बाद धनराशि देकर संधि करनी पड़ी। इसलिए तीसरा कथन असत्य है।
60. निम्नलिखित में से असत्य कथन की पहचान करें- (A) कोटा के दुर्जनशाल से मराठों ने 4 लाख रुपए वसूले तथा केशोरायपाटन व कापरेन के परगने दिए गए। (B) दुर्जनशाल की मृत्यु के पश्चात् गुमानसिंह महाराव बने व झाला जालिमसिंह को फौजदार नियुक्त किया गया। (C) 1764 में महाराव गुमानसिंह से मतभेद के कारण जालिम सिंह यहाँ से निष्कासित होकर मेवाड़ के महाराणा अरिसिंह की सेवा में चले गए। (D) क्षिप्रा के युद्ध (1769) में मेवाड़ की तरफ से सेनापति जालिम सिंह थे, मराठों से हारे, तदुपरांत मराठों ने घायल जालिम सिंह को बंदी बना लिया, जालिम सिंह 60,000 रु. देकर रिहा हुआ। सही कूट की पहचान करें-
- (A) AD
- (B) केवल A
- (C) केवल B
- (D) इनमें से कोई नहीं
दिए गए सभी कथनों का विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि कोई भी कथन पूर्णतः असत्य नहीं है। इसलिए सही उत्तर इनमें से कोई नहीं है।
61. जयपुर के शासक ईश्वरी सिंह का राज्याभिषेक हुआ था?
- (A) 21 सितम्बर, 1743
- (B) 21 सितम्बर, 1742
- (C) 21 जनवरी, 1742
- (D) 21 जनवरी, 1743
सवाई जयसिंह की मृत्यु के बाद 21 सितम्बर 1743 को उनके ज्येष्ठ पुत्र ईश्वरी सिंह का राज्याभिषेक हुआ। यह घटना जयपुर के उत्तराधिकार संघर्ष की शुरुआत का कारण बनी, जिसमें बाद में माधोसिंह ने भी अपना दावा प्रस्तुत किया।
62. जोधपुर के किस शासक की मृत्यु (1772 ई.) के बाद मराठों ने जोधपुर पर पुनः आक्रमण नहीं किया?
- (A) रामसिंह
- (B) विजय सिंह
- (C) बख्त सिंह
- (D) अभय सिंह
1772 ई. में रामसिंह की मृत्यु के बाद विजय सिंह ने जालौर नगर व आधा मारवाड़ पुनः अपने अधिकार में कर लिए। इसके बाद मराठों ने पुनः जोधपुर पर आक्रमण नहीं किया।
63. ईश्वरी सिंह ने किस समझौते का उल्लंघन कर टोंक पर अधिकार कर लिया था जबकि एक समझौते के तहत फागी, बरवाड़ा, टॉक, टोडा व मालपुरा माधोसिंह को दिया गया था?
- (A) जमोली समझौता
- (B) राजमहल समझौता
- (C) निवाई समझौता
- (D) टोंक समझौता
निवाई समझौते के अनुसार कई परगने माधोसिंह को दिए जाने थे, लेकिन ईश्वरी सिंह ने इस समझौते का पालन नहीं किया और टोंक पर अधिकार कर लिया। इससे दोनों पक्षों के बीच संघर्ष और बढ़ गया।
64. ईश्वरी सिंह (जयपुर) ने अपने ही किस स्वामी भक्त दीवान को विष देकर मरवा दिया था?
- (A) गंगाधर
- (B) केशवदास
- (C) माधव दास
- (D) ईसरदास
ईश्वरी सिंह ने अपने विश्वासपात्र दीवान केशवदास को विष देकर मरवा दिया था। यह घटना उस समय की आंतरिक राजनीति और अविश्वास को दर्शाती है, जहाँ शासक अपने निकट सहयोगियों पर भी संदेह करने लगे थे।
65. 1708 ई. में महाराणा अमर सिंह ने अपनी पुत्री चन्द्रकुँवरी का विवाह जयपुर के किस शासक के साथ किया था जो आगे चलकर उत्तराधिकार संघर्ष का कारण बनी ?
- (A) मिर्जाराजा जयसिंह
- (B) सवाई जयसिंह
- (C) रामसिंह
- (D) ईश्वरीसिंह
1708 ई. में मेव ाड़ के महाराणा अमर सिंह ने अपनी पुत्री चन्द्रकुँवरी का विवाह सवाई जयसिंह से किया। इस विवाह से उत्पन्न उत्तराधिकार का प्रश्न बाद में जयपुर में ईश्वरी सिंह और माधोसिंह के बीच संघर्ष का प्रमुख कारण बना।
66. धौलपुर समझौते के अनुसार मालवा की सूबेदारी किसे गई थी?
- (A) पेशवा को
- (B) सवाई जयसिंह को
- (C) मुगल बादशाह को
- (D) चम्बल के पूर्व व दक्षिण के जमीदारों को
धौलपुर समझौता 1741 ई. में सवाई जयसिंह की मध्यस्था से पेशवा बाजीराव और मुगल बादशाह के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत मालवा की सूबेदारी पेशवा को सौंप दी गई, जिससे मराठों का प्रभाव बढ़ा।
67. सवाई जयसिंह को मालवा का तीसरी बार सूबेदार कब नियुक्त किया गया?
- (A) 1730
- (B) 1713
- (C) 1729
- (D) 1732
सवाई जयसिंह को तीसरी बार 1732 ई. में मालवा का सूबेदार नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति मराठों के बढ़ते प्रभाव को रोकने और क्षेत्र में मुगल नियंत्रण बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी।
68. सितम्बर 1730 ई. में मुगल बादशाह ने सवाई जयसिंह को हटाकर मालवा का सूबेदार किसे नियुक्त किया था?
- (A) मीर बख्शी
- (B) अरीसिंह
- (C) मुहम्मद बंगश
- (D) मुहमद अलबख्श खाँ
1730 ई. में मुगल बादशाह ने सवाई जयसिंह को हटाकर मुहम्मद बंगश को मालवा का सूबेदार नियुक्त किया। यह निर्णय मराठों के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करने के प्रयास का हिस्सा था।
69. जयसिंह ने अपनी किस पुत्री का विवाह (1732 ई.) दलेल सिंह से करवाकर बूंदी का शासक घोषित कर दिया था?
- (A) चन्द्र कुंवरी
- (B) अमर कुंवरी
- (C) कृष्णा कुंवरी
- (D) चाँद कुंवरी
बुद्धसिंह अपने पुत्र उम्मेद सिंह को राजा बनाना चाहता था, परंतु सवाई जयसिंह ने दलेल सिंह को ही शासक बनाए रखा और अपनी पुत्री कृष्णा कुमारी का विवाह दलेल सिंह से कर दिया।
70. बुद्धसिंह की कच्छावी रानी से उत्पन्न पुत्र का नाम क्या था जिसे सवाई जयसिंह ने जयपुर बुलाकर मरवा दिया था?
- (A) उम्मेद सिंह
- (B) भवानी सिंह
- (C) भानसिंह
- (D) मानसिंह
बुद्धसिंह की कच्छावी रानी से उत्पन्न भवानी सिंह को सवाई जयसिंह ने जयपुर बुलाकर उसकी हत्या करवा दी। यह कदम बूंदी के उत्तराधिकार विवाद को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया था।
71. जोधपुर के रामसिंह व बख्त सिंह के मध्य आतंरिक संघर्ष किस परगने को लेकर हुआ, जिसके कारण उन्होंने मराठों को पुनः राजस्थान में आमंत्रित किया?
- (A) सिवाणा
- (B) पोकरण
- (C) जालौर
- (D) चम्पारण
रामसिंह और बख्त सिंह के बीच जालौर (जालीर) परगने को लेकर संघर्ष हुआ। इस आंतरिक विवाद के कारण दोनों पक्षों ने मराठों को हस्तक्षेप के लिए आमंत्रित किया, जिससे राजस्थान में मराठों का प्रभाव पुनः बढ़ा।
72. किस वंश द्वारा राजपूताना से कर के रूप में निश्चित धनराशि 'खिराज / चौथ' की वसूली की?
- (A) मुगलों ने
- (B) पिण्डारियों ने
- (C) अरब आक्रमणकारियों ने
- (D) मराठों ने
मराठों ने राजस्थान की रियासतों से चौथ या खिराज के रूप में कर वसूला। यह उनकी आय का प्रमुख स्रोत था और इसी के माध्यम से उन्होंने राजपूताना में अपना प्रभाव स्थापित किया।
73. 1728 ई. में मराठों ने मेवाड़ के अर्द्ध स्वतंत्र किन दो राज्यों से चौथ वसूली की थी?
- (A) बाँसवाड़ा डूंगरपुर
- (B) प्रतापगढ़ - चित्तौड़गढ़
- (C) प्रतापगढ़-शाहपुरा
- (D) चित्तौड़गढ़-शाहपुरा
1728 ई. में मराठों ने मेवाड़ के अधीन अर्द्ध स्वतंत्र राज्यों बाँसवाड़ा और डूंगरपुर से चौथ वसूली। यह मराठों के बढ़ते प्रभाव और आर्थिक दबाव की शुरुआत को दर्शाता है।
74. निम्न में से कौनसा कथन सत्य नहीं है?
- (A) सवाई जयसिंह को दूसरी बार मालवा का सूबेदार 1729 में बनाया गया।
- (B) सितम्बर 1730 ई. में इन्हें हटाकर मुहम्मद बंगश को मालवा का सूबेदार नियुक्त किया गया ।
- (C) 1730 ई. में सवाई जयसिंह ने दीपसिंह के नेतृत्त्व में एक शिष्टमण्डल मराठा जयप्पा सिंधिया के दरबार में सतारा भेजा।
- (D) 1732 ई. में सवाई जयसिंह ने तीसरी बार मालवा की सूबेदारी के दौरान मराठों को रोकने हेतु मेवाड़ से सहायता लेने का प्रयास किया।
1730 ई. में सवाई जयसिंह ने दीपसिंह के नेतृत्व में शिष्टमंडल मराठा छत्रपति साहू के दरबार में भेजा था, न कि जयप्पा सिंधिया के दरबार में। इसलिए तीसरा कथन असत्य है।
75. बूँदी उत्तराधिकार संघर्ष के संदर्भ में कौनसा कथन सत्य नहीं है?
- (A) सवाई जयसिंह के समय बूंदी का शासक बुद्ध सिंह था।
- (B) बुद्धसिंह की चूड़ावती रानी से उत्पन्न 'उम्मेद सिंह' को बुद्धसिंह ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया ।
- (C) जयसिंह अपने भांजे भवानी सिंह को बूंदी का उत्तराधिकारी घोषित किया व उसे शासक बनाने के लिए भरसक प्रयास किए।
- (D) होल्कर ने अप्रैल 1734 ई. में बूंदी पर आक्रमण कर दलेलसिंह को हटाकर बुद्ध सिंह को शासक बना दिया। यह बूँदी उत्तराधिकार को लेकर राजपूताना में मराठों का पहला आक्रमण था।
सवाई जयसिंह ने भवानी सिंह को उत्तराधिकारी बनाने का प्रयास नहीं किया, बल्कि उसे जयपुर बुलाकर उसकी हत्या करवा दी। इसलिए तीसरा कथन असत्य है।
76. निवाई समझौता के अनुसार सवाई ईश्वरी सिंह को कितनी धनराशि पेशवा को उपहार स्वरूप देना तय हुआ था?
- (A) 10 लाख
- (B) 20 लाख
- (C) 24 लाख
- (D) 12 लाख
निवाई समझौते के अनुसार ईश्वरी सिंह को पेशवा को 12 लाख रुपये देने का वचन देना पड़ा। यह राशि मराठों की बढ़ती शक्ति और जयपुर की राजनीतिक मजबूरी को दर्शाती है।
77. तुंगा का युद्ध कब व किस-किस के मध्य लड़ा गया ?
- (A) 28 जुलाई, 1887 सवाई प्रतापसिंह व महारानी सिंधिया
- (B) 28 जुलाई, 1787 सवाई प्रतापसिंह व विजयसिंह (मारवाड़)
- (C) 28 जुलाई, 1787 माधोसिंह व ईश्वरी सिंह
- (D) 28 जुलाई, 1787 सवाई प्रतापसिंह व महादजी सिंधिया
तुंगा का युद्ध 28 जुलाई, 1787 को सवाई प्रतापसिंह (जयपुर) और महादजी सिंधिया के बीच लड़ा गया। यह युद्ध मराठों और राजपूतों के बीच महत्वपूर्ण संघर्ष था, जिसमें मराठों की शक्ति को चुनौती दी गई।
78. निम्न में से किस स्थान पर विजय सिंह (जोधपुर शासक) ने जयप्पा सिंधिया की हत्या कर दी थी?
- (A) किशनगढ़
- (B) ताऊसर
- (C) पाटन
- (D) जामोली
जोधपुर के शासक विजयसिंह ने 24 जुलाई 1755 को नागौर के ताऊसर नामक स्थान पर जयप्पा सिंधिया की हत्या करवा दी। यह घटना मराठा-राजपूत संबंधों में महत्वपूर्ण रही।
79. माधोसिंह ने मराठों का कत्लेआम करने के पश्चात् अपने वकील को किस मराठा के पास क्षमा याचना हेतु भेजा था?
- (A) जयप्पा सिंधिया
- (B) मल्हारराव होल्कर
- (C) राणोजी सिंधिया
- (D) बाजीराव प्रथम
19 जनवरी 1751 को माधोसिंह ने अपने वकील को मल्हारराव होल्कर के पास भेजकर मराठा सैनिकों के कत्लेआम के लिए क्षमा मांगी। यह घटना मराठा-जयपुर संबंधों में तनाव को दर्शाती है।
80. मेवाड़ महाराणा राजसिंह द्वितीय की मृत्यु के पश्चात् (1761 ई. में) मेवाड़ का शासक कौन बना था, जो मराठों से हारने के बाद कुछ परगने व 60 लाख रु. देकर मराठों (1769) के संधि कर ली थी?
- (A) रतनसिंह
- (B) जगत सिंह
- (C) भीमसिंह
- (D) अरिसिंह
महाराणा अरिसिंह 1761 में मेवाड़ के शासक बने। 1769 में महादजी सिंधिया से हार के बाद उन्होंने कुछ परगने और 60 लाख रुपये देकर संधि कर ली, जिससे मेवाड़ को अस्थायी शांति मिली।
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